दीदी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर ED का बड़ा एक्शन! मनी लॉन्ड्रिंग केस में 'कालीघाट' आवास पर छापेमारी, घर पर नहीं मिले TMC सांसद
पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहा हाई-प्रोफाइल ड्रामा थमने का नाम नहीं ले रहा है. एक तरफ जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर 58 विधायकों की ऐतिहासिक बगावत से ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है, वहीं दूसरी तरफ उनके भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें भी बेहद बढ़ गई हैं.
बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एक विशेष टीम मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) के एक गंभीर मामले में अचानक अभिषेक बनर्जी के कोलकाता स्थित 'कालीघाट' आवास पर धमक पड़ी. केंद्रीय जांच एजेंसी के इस कड़े रुख से पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है.
शिक्षक भर्ती घोटाले में समन देने पहुंची ED, घर पर नहीं मिले अभिषेक
अभिषेक बनर्जी इस समय पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित प्राइमरी स्कूल भर्ती घोटाले (Primary School Recruitment Scam) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केंद्रीय एजेंसियों के रडार पर हैं. बुधवार को ईडी के आला अधिकारी उन्हें नया नोटिस थमाने और पूछताछ के लिए समन जारी करने उनके घर पहुंचे थे.
हालांकि, जब ईडी की टीम उनके आवास पर पहुंची, तो अभिषेक बनर्जी वहां मौजूद नहीं थे. अंदरूनी सूत्रों और सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी उस समय पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास पर चल रही एक बेहद महत्वपूर्ण और आपातकालीन बैठक में हिस्सा लेने गए हुए थे.
फर्जी सिग्नेचर विवाद: सीआईडी (CID) भी कस चुकी है शिकंजा
अभिषेक बनर्जी पर यह संकट अकेला नहीं आया है. इससे ठीक पहले, राज्य की आपराधिक जांच विभाग (CID) ने भी एक फर्जी सिग्नेचर (जाली हस्ताक्षर) मामले में उन पर शिकंजा कसा था. सीआईडी के अधिकारी शनिवार को ही उनके घर जांच में सहयोग करने का नोटिस देने पहुंचे थे और उन्हें सोमवार को भवानी भवन स्थित सीआईडी मुख्यालय में पेश होने का आदेश दिया था.
हालांकि, अभिषेक बनर्जी तय समय पर सीआईडी के सामने पेश नहीं हुए और उन्होंने अपने वकीलों के जरिए जांच एजेंसी से कुछ और अतिरिक्त समय की मांग की थी.
गिरफ्तारी से बचने के लिए भागे-भागे कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचे अभिषेक
सीआईडी की इस आक्रामक कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारी के डर से घबराए अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को ही तुरंत कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर कर सीआईडी द्वारा जारी किए गए नोटिस को चुनौती दी है.
अभिषेक बनर्जी ने अदालत से मांग की है कि जांच एजेंसी की किसी भी दंडात्मक कार्रवाई (जिसमें गिरफ्तारी भी शामिल है) से उन्हें कानूनी संरक्षण (Protection from Arrest) दिया जाए. कलकत्ता हाई कोर्ट ने उन्हें याचिका दाखिल करने की अनुमति दे दी है और इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को जस्टिस अपूर्ब सिन्हा राय की पीठ के समक्ष होने की पूरी संभावना है.
आखिर क्या है यह पूरा 'लेटर और सिग्नेचर' विवाद?
इस पूरे सियासी बवंडर की जड़ में विधानसभा में पदों के आवंटन को लेकर लिखा गया एक पत्र है. आइए इसे आसान शब्दों में समझते हैं:
विवादित पत्र: यह विवाद उस पत्र को लेकर शुरू हुआ, जिसे तृणमूल कांग्रेस विधायक दल की ओर से विधानसभा में प्रमुख पदों के लिए पार्टी नेताओं के नाम प्रस्तावित करते हुए प्रस्तुत किया गया था.
प्रस्तावित नाम: इस पत्र में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, असीमा पात्रा व नयना बंद्योपाध्याय को उपनेता और फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक नियुक्त करने की मांग की गई थी.
फर्जी हस्ताक्षर का आरोप: चूंकि अभिषेक बनर्जी टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव हैं, इसलिए इस आधिकारिक पत्र पर उनके हस्ताक्षर भी मौजूद थे. बाद में इस पत्र के हस्ताक्षरों में भारी गड़बड़ी और हेरफेर के आरोप लगे, जिसके बाद राज्य सरकार ने इसकी जांच सीआईडी को सौंप दी.
पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में हाल ही में हुए हमले के बाद अभिषेक बनर्जी के लिए यह हफ्ता राजनीतिक और कानूनी तौर पर बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है. अब देखना यह होगा कि शुक्रवार को हाई कोर्ट से उन्हें राहत मिलती है या केंद्रीय एजेंसियों का शिकंजा और ज्यादा कसता चला जाता है.