डोनाल्ड ट्रंप का पाकिस्तान की ओर झुकाव: भारत के लिए क्यों बढ़ रही है 'टेंशन'? समझिए रणनीतिक और सुरक्षा समीकरण

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India News Live,Digital Desk : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में पाकिस्तान के प्रति बढ़ते 'सॉफ्ट कॉर्नर' ने भारतीय रणनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। हालिया घटनाक्रमों, विशेषकर अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की उभरती भूमिका ने भारत की सुरक्षा चिंताओं को गहरा कर दिया है। यह केवल कूटनीतिक बदलाव नहीं है, बल्कि सीमा पार आतंकवाद और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन (Power Balance) के लिए एक गंभीर चुनौती माना जा रहा है।

1. पाकिस्तान की 'मध्यस्थ' भूमिका: भारत के लिए रणनीतिक जोखिम

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान जिस तरह से 'ब्रिज' (Bridge) का काम कर रहा है, उससे पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर का कद वाशिंगटन में बढ़ गया है।

बढ़ती निकटता: यदि पाकिस्तान इस समझौते को सफल बनाने में कामयाब रहता है, तो ट्रंप प्रशासन उसे 'प्रमुख सहयोगी' का दर्जा फिर से दे सकता है।

साजिशों को नजरअंदाज करना: आशंका है कि इस नई दोस्ती के बदले अमेरिका, भारत के खिलाफ पाकिस्तान की साजिशों और कश्मीर जैसे मुद्दों पर अपनी 'आंखें मूंद' सकता है।

2. आतंकवाद में वृद्धि का खतरा: 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद नई चुनौती

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता आतंकवादी वित्तपोषण (Terror Financing) को लेकर है।

वित्तीय सहायता: ट्रंप प्रशासन द्वारा पाकिस्तान को दी जाने वाली संभावित आर्थिक मदद का एक बड़ा हिस्सा आतंकवादी संगठनों तक पहुंचने का खतरा है।

आतंकी ठिकानों की सक्रियता: सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान नष्ट किए गए आतंकी लॉन्च पैड फिर से सक्रिय हो सकते हैं। इससे पहलगाम जैसी घुसपैठ और हमलों का खतरा बढ़ सकता है।

3. भारत पर दबाव बनाने की 'ट्रंप-मुनीर' रणनीति

विशेषज्ञों का मानना है कि जनरल मुनीर के प्रभाव में आकर ट्रंप प्रशासन भारत पर कुछ संवेदनशील मुद्दों पर दबाव डाल सकता है:

सिंधु जल समझौता: जल बंटवारे को लेकर पाकिस्तान नए विवाद खड़े कर सकता है जिसमें अमेरिका का समर्थन मिलने की उम्मीद है।

क्रिकेट और खेल: पाकिस्तान पर लगे क्रिकेट प्रतिबंधों को हटवाने के लिए वाशिंगटन भारत से 'सॉफ्ट पावर' डिप्लोमेसी की मांग कर सकता है।

कश्मीर और बलूचिस्तान: कश्मीर मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण करना और बलूचिस्तान के मुद्दे पर भारत को घेरना ट्रंप प्रशासन की नई नीति का हिस्सा हो सकता है।

4. मोदी और ट्रंप के बीच कूटनीतिक दूरी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में वाशिंगटन के निमंत्रण के बजाय ओडिशा (भुवनेश्वर) की यात्रा को प्राथमिकता दी। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के 'स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी' (रणनीतिक स्वायत्तता) के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भारत यह संदेश दे रहा है कि वह अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।

भारत की तैयारी: सतर्कता ही सुरक्षा

भारत वर्तमान में अपनी रक्षा पंक्ति को और मजबूत कर रहा है:

सीमा पर निगरानी: सुरक्षा एजेंसियां और सेना सीमा पार की हर गतिविधि पर नजर रख रही हैं।

राजनयिक घेराबंदी: भारत वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान की 'दोहरी चाल' को बेनकाब करने के लिए अपनी कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा रहा है।