जानिए 'पंचायत' और 'मिर्जापुर' फेम आसिफ खान का रोंगटे खड़े कर देने वाला संघर्ष
ओटीटी और भारतीय सिनेमा की दुनिया में जब भी किसी किरदार के छोटे से दृश्य में पूरी महफिल लूट लेने की बात होती है, तो अभिनेता आसिफ खान का नाम सबसे आगे आता है। 'पंचायत' के पहले सीजन में दूल्हे गणेश के रोल में उनका वह डायलॉग—"अरे दो मिनट रुकिए ना दामाद जी, देख रहे हैं बिनोद..." आज सोशल मीडिया पर मीम्स की दुनिया का सबसे बड़ा मुहावरा बन चुका है। इसके अलावा 'मिर्जापुर' में गुड्डू पंडित के वफादार 'बाबर' का किरदार हो, या 'पाताल लोक' का कबीर एम—आसिफ खान ने हर बार साबित किया है कि स्क्रीन टाइम चाहे कुछ मिनटों का हो, अगर अदाकारी में दम है तो दर्शक आपके मुरीद हो ही जाते हैं। लेकिन आज जिस अभिनेता की कॉमिक टाइमिंग और सहज अभिनय पर दुनिया फिदा है, उस मुकाम तक पहुंचने के लिए आसिफ ने जिंदगी के ऐसे-ऐसे कड़वे घूंट पिए हैं जिन्हें सुनकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं।
राजस्थान के निंबाहेड़ा से मुंबई तक: पिता के निधन के बाद टूटा मुसीबतों का पहाड़
आसिफ खान का जन्म राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के एक छोटे से कस्बे निंबाहेड़ा में हुआ था। बचपन से ही उनका सपना अभिनेता बनने का था, लेकिन एक आम मध्यमवर्गीय परिवार में इस तरह के सपने देखना आसान नहीं होता। जब वे महज 17-18 साल के थे, तभी उनके पिता का अचानक इंतकाल हो गया। पिता के साये के उठते ही पूरे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी आसिफ के कंधों पर आ गई। घर के हालात इतने तंग हो चुके थे कि दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना भी दूभर हो गया था। अपने सपनों को बचाने और परिवार का पेट भरने की खातिर आसिफ ने मुंबई का रुख करने का फैसला किया, लेकिन मायानगरी में उनके लिए संघर्ष का एक ऐसा दौर इंतजार कर रहा था जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी।
सैफ अली खान-करीना कपूर के रिसेप्शन में धोए बर्तन, बने होटल में वेटर
मुंबई पहुंचने के बाद आसिफ के पास न तो रहने का कोई ठिकाना था और न ही जेब में पैसे। अपनी गुजर-बसर के लिए उन्होंने एक होटल में वेटर और रसोई में हेल्पर के तौर पर काम करना शुरू किया। उस दौर का एक बेहद दर्दनाक किस्सा खुद आसिफ ने अपने साक्षात्कारों में साझा किया था। साल 2012 में जब बॉलीवुड स्टार सैफ अली खान और करीना कपूर खान के शाही निकाह का वेडिंग रिसेप्शन मुंबई के एक आलीशान वेन्यू पर हुआ था, तो आसिफ उस पार्टी की कैटरिंग सर्विस में वेटर और क्लीनर के रूप में काम कर रहे थे। जिस अभिनेता को वे बड़े पर्दे पर देखने का ख्वाब देखते थे, उसी इंडस्ट्री की सबसे बड़ी शादी में आसिफ कोने में खड़े होकर मेहमानों के जूठे बर्तन साफ कर रहे थे। उस रात बर्तनों को धोते हुए आसिफ की आंखों से आंसू बह रहे थे, लेकिन दिल में एक ही जिद थी कि एक दिन वे इस इंडस्ट्री के भीतर एक कलाकार के रूप में अपनी जगह जरूर बनाएंगे।
जूनियर आर्टिस्ट से कास्टिंग असिस्टेंट तक: हर नाकामी से सीखा नया हुनर
होटल की नौकरी से कुछ पैसे जमा करने के बाद आसिफ ने थिएटर की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने दिल्ली जाकर एनएसडी (नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा) के कलाकारों के साथ थिएटर वर्कशॉप्स कीं और फिर मुंबई लौटकर ऑडिशन देने लगे। शुरुआती दिनों में उन्हें फिल्मों और विज्ञापनों में महज भीड़ का हिस्सा यानी 'जूनियर आर्टिस्ट' या बैकग्राउंड एक्स्ट्रा के तौर पर काम मिला। कई फिल्मों में वे हीरो के पीछे खड़े नजर आए, जहां कैमरे का फोकस भी उन पर नहीं होता था।
खुद को कैमरे और स्क्रीनप्ले की बारीकियों से रूबरू कराने के लिए आसिफ ने मशहूर कास्टिंग डायरेक्टर अभिषेक बनर्जी और अनमोल आहूजा की कंपनी 'कास्टिंग बे' (Casting Bay) में कास्टिंग असिस्टेंट की नौकरी शुरू की। यहां रहकर वे आने वाले सैकड़ों कलाकारों के ऑडिशन रिकॉर्ड करते थे। इस काम ने आसिफ को यह सिखाया कि एक अभिनेता को ऑडिशन में क्या करना चाहिए और किन गलतियों से बचना चाहिए।
'मिर्जापुर' के बाबर और 'पंचायत' के गणेश ने पलट दी किस्मत की लकीर
सालों के कड़े संघर्ष और अनगिनत रिजेक्शंस के बाद आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई। साल 2018 में आई एक्सेल एंटरटेनमेंट की कल्ट वेब सीरीज 'मिर्जापुर' में उन्हें 'बाबर' का रोल मिला। कालीन भैया और गुड्डू पंडित के बीच सत्ता की खूनी जंग में बाबर के रूप में आसिफ ने अपनी गंभीर और ईमानदार छवि से आलोचकों का ध्यान खींचा।
लेकिन उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा यू-टर्न साबित हुआ साल 2020 में आई टीवीएफ की सीरीज 'पंचायत'। इसमें वे महज एक एपिसोड में अपनी शादी के लिए फुलेरा गांव आए नखरेबाज दूल्हे 'गणेश' के किरदार में थे। प्रधान जी और सचिव जी के साथ पानी की टंकी, चप्पल और कुर्सी को लेकर उनका वह देसी ताना और संवाद अदायगी इतनी स्वाभाविक थी कि वह सीन भारतीय पॉप-कल्चर का हिस्सा बन गया। इसके बाद 'पाताल लोक', 'ह्यूमन', 'पगलैट' और 'द ग्रेट इंडियन मर्डर' जैसी फिल्मों और सीरीज में उन्होंने एक से बढ़कर एक चुनौतीपूर्ण किरदार निभाकर खुद को बॉलीवुड के सबसे भरोसेमंद चरित्र अभिनेताओं की कतार में खड़ा कर दिया।
आज बड़े प्रोजेक्ट्स और रियलिटी शोज में जमा रहे हैं अपनी धाक
वेटर की नौकरी से सफर शुरू करने वाले आसिफ खान आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। वेब सीरीज और फिल्मों के बाद अब वे मुख्यधारा के बड़े प्रोजेक्ट्स और रियलिटी शोज में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। आसिफ खान का यह पूरा सफर हर उस आम नौजवान के लिए एक जिंदा मिसाल है जो बिना किसी गॉडफादर के अपनी जेब में सिर्फ सपने लेकर मुंबई की अंधेरी गलियों में कदम रखता है। उनकी यह कहानी साबित करती है कि अगर इंसान अपनी असफलताओं से टूटे बिना अपनी कला को तराशता रहे, तो एक दिन उसकी मेहनत पूरे देश को सलाम करने पर मजबूर कर देती है।