भारत-चीन रिश्तों में कूटनीति आगे, लेकिन व्यापार पर अटका विवाद
India News Live,Digital Desk : चीन एक ओर भारत के साथ राजनयिक संबंध सुधारने के संकेत दे रहा है, लेकिन आर्थिक रिश्तों को लेकर वही सहयोगी रुख देखने को नहीं मिल रहा। खासकर दुर्लभ पृथ्वी चुम्बक (Rare Earth Magnets) और अन्य महत्त्वपूर्ण धातुओं की आपूर्ति को लेकर बीजिंग ने अब तक कोई सकारात्मक संकेत नहीं दिया है।
भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियों की लगातार मांग और भारत सरकार के आग्रह के बावजूद चीन ने अब तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। इसी वजह से अब सबकी निगाहें सोमवार शाम को होने वाली भारत-चीन विदेश मंत्रियों की बैठक पर टिकी हैं, जहाँ वांग यी और एस. जयशंकर आमने-सामने होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित चीन यात्रा भी इस चर्चा का अहम हिस्सा हो सकती है, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती व्यापारिक मसले पर सहमति बनाना होगी।
ड्रैगन की शर्तें
सूत्रों के मुताबिक, चीन ने साफ कर दिया है कि दुर्लभ मृदा चुम्बक वह केवल उन्हीं देशों की कंपनियों को बेचेगा जिनसे उसका विशेष समझौता होगा। इन समझौतों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि चीन से निर्यात की गई धातुओं का उपयोग रक्षा क्षेत्र में न हो।
निर्यात पर रोक और असर
अप्रैल 2025 में चीन ने दुर्लभ मृदा चुम्बकों के निर्यात पर रोक लगाई थी। चीन का कहना था कि इनका दुरुपयोग रक्षा उपकरणों में हो सकता है। लेकिन इस फैसले से भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग पर गहरा असर पड़ा है क्योंकि यह धातु उनकी निर्माण प्रक्रिया में बेहद अहम है।
विकल्प तलाश में भारत
कुछ भारतीय कंपनियाँ अब जापान और अन्य देशों से आपूर्ति करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन यह पूरी तरह से ज़रूरतें पूरी नहीं कर पा रहा। भारतीय राजदूत ने भी इस मुद्दे को बीजिंग में उठाया था, फिर भी चीन के रुख में अभी कोई बदलाव नहीं दिखा है।