Devuthani Ekadashi 2025 : जब विष्णु जागते हैं और शुरू होती है शुभ कार्यों की शुरुआत
India News Live,Digital Desk : देवउठनी एकादशी, जिसे देवोत्थान एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में अत्यंत पावन पर्व माना जाता है। यह दिन कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं और ब्रह्मांड के संचालन का कार्य पुनः अपने हाथों में लेते हैं।
देवउठनी एकादशी से ही शुभ कार्यों जैसे विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञ और मांगलिक संस्कारों की शुरुआत मानी जाती है। यह दिन धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी मां लक्ष्मी की पूजा के लिए भी विशेष माना जाता है।
मां लक्ष्मी के 108 नामों का जप करने का महत्व
कहा जाता है कि देवउठनी एकादशी के दिन यदि श्रद्धा और भक्ति से मां लक्ष्मी के 108 नामों का जप किया जाए, तो जीवन में धन, सुख और शांति का वास होता है। साथ ही भगवान विष्णु भी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं।
नीचे मां लक्ष्मी के 108 नाम दिए गए हैं, जिनका स्मरण और जप इस दिन विशेष रूप से फलदायी माना गया है —
मां लक्ष्मी के 108 नाम
- ऊँ प्रकृत्यै नमः
- ऊँ विकृत्यै नमः
- ऊँ विद्यायै नमः
- ऊँ सर्वभूत-हितप्रदायै नमः
- ऊँ श्रद्धायै नमः
- ऊँ विभूत्यै नमः
- ऊँ वसुन्धरायै नमः
- ऊँ उदारांगायै नमः
- ऊँ हरिण्यै नमः
- ऊँ हेममालिन्यै नमः
- ऊँ धनधान्यकर्यै नमः
- ऊँ सिद्ध्यै नमः
- ऊँ स्त्रैणसौम्यायै नमः
- ऊँ शुभप्रदायै नमः
- ऊँ नृपवेश्मगतानन्दायै नमः
- ऊँ सुरभ्यै नमः
- ऊँ परमात्मिकायै नमः
- ऊँ वाचे नमः
- ऊँ पद्मालयायै नमः
- ऊँ पद्मायै नमः
- ऊँ शुच्यै नमः
- ऊँ स्वाहायै नमः
- ऊँ स्वधायै नमः
- ऊँ सुधायै नमः
- ऊँ धन्यायै नमः
- ऊँ हिरण्मय्यै नमः
- ऊँ लक्ष्म्यै नमः
- ऊँ नित्यपुष्टायै नमः
- ऊँ विभावर्यै नमः
- ऊँ आदित्यै नमः
- ऊँ दित्यै नमः
- ऊँ दीप्तायै नमः
- ऊँ वसुधायै नमः
- ऊँ वसुधारिण्यै नमः
- ऊँ कमलायै नमः
- ऊँ कान्तायै नमः
- ऊँ कामाक्ष्यै नमः
- ऊँ क्रोधसंभवायै नमः
- ऊँ अनुग्रहप्रदायै नमः
- ऊँ बुद्ध्यै नमः
- ऊँ अनघायै नमः
- ऊँ हरिवल्लभायै नमः
- ऊँ अशोकायै नमः
- ऊँ अमृतायै नमः
- ऊँ दीप्तायै नमः
- ऊँ लोकशोकविनाशिन्यै नमः
- ऊँ धर्मनिलयायै नमः
- ऊँ करुणायै नमः
- ऊँ लोकमात्रे नमः
- ऊँ पद्मप्रियायै नमः
- ऊँ पद्महस्तायै नमः
- ऊँ पद्माक्ष्यै नमः
- ऊँ पद्मसुन्दर्यै नमः
- ऊँ पद्मोद्भवायै नमः
- ऊँ भास्कर्यै नमः
- ऊँ बिल्वनिलयायै नमः
- ऊँ वरारोहायै नमः
- ऊँ यशस्विन्यै नमः
- ऊँ वरलक्ष्म्यै नमः
- ऊँ वसुप्रदायै नमः
- ऊँ शुभायै नमः
- ऊँ हिरण्यप्राकारायै नमः
- ऊँ समुद्रतनयायै नमः
- ऊँ पद्ममुख्यै नमः
- ऊँ पद्मनाभप्रियायै नमः
- ऊँ रमायै नमः
- ऊँ पद्ममालाधरायै नमः
- ऊँ देव्यै नमः
- ऊँ पद्मिन्यै नमः
- ऊँ पद्मगन्धिन्यै नमः
- ऊँ पुण्यगन्धायै नमः
- ऊँ सुप्रसन्नायै नमः
- ऊँ प्रसादाभिमुख्यै नमः
- ऊँ प्रभायै नमः
- ऊँ चन्द्रवदनायै नमः
- ऊँ चन्द्रायै नमः
- ऊँ चन्द्रसहोदर्यै नमः
- ऊँ चतुर्भुजायै नमः
- ऊँ विष्णुपत्न्यै नमः
- ऊँ प्रसन्नाक्ष्यै नमः
- ऊँ नारायणसमाश्रितायै नमः
- ऊँ दारिद्र्यध्वंसिन्यै नमः
- ऊँ देव्यै नमः
- ऊँ सर्वोपद्रववारिण्यै नमः
- ऊँ नवदुर्गायै नमः
- ऊँ महाकाल्यै नमः
- ऊँ ब्रह्माविष्णुशिवात्मिकायै नमः
- ऊँ त्रिकालज्ञानसंपन्नायै नमः
- ऊँ भुवनेश्वर्यै नमः
- ऊँ चन्द्ररूपायै नमः
- ऊँ इन्दिरायै नमः
- ऊँ इन्दुशीतलायै नमः
- ऊँ अह्लादजनन्यै नमः
- ऊँ पुष्ट्यै नमः
- ऊँ शिवायै नमः
- ऊँ शिवकर्यै नमः
- ऊँ सत्यै नमः
- ऊँ विमलायै नमः
- ऊँ विश्वजनन्यै नमः
- ऊँ तुष्ट्यै नमः
- ऊँ दारिद्र्यनाशिन्यै नमः
- ऊँ प्रीतिपुष्करिण्यै नमः
- ऊँ शान्तायै नमः
- ऊँ शुक्लमाल्याम्बरायै नमः
- ऊँ श्रियै नमः
- ऊँ जयायै नमः
- ऊँ मंगलादेव्यै नमः
- ऊँ विष्णुवक्षस्थलस्थितायै नमः
देवउठनी एकादशी के दिन क्या करें
- भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करें।
- तुलसी विवाह या तुलसी पूजन करें।
- दान-पुण्य, भक्ति गीत और व्रत का पालन करें।
- रात्रि में दीपदान और हरि नाम संकीर्तन का विशेष महत्व है।