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October 27 2026 03:00 am

टीईटी की अनिवार्यता पर शिक्षकों में चिंता, संघ ने सरकार से नियमों में बदलाव की उठाई मांग

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India News Live,Digital Desk : शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य बनाने के सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश से देशभर के शिक्षकों में गहरी चिंता है। लाखों शिक्षक, विशेषकर 2011 से पहले नियुक्त हुए शिक्षक, अपनी नौकरी को लेकर असमंजस में हैं।

अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग करते हुए सरकार से नियमों में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। संघ का कहना है कि शिक्षकों को उन्हीं शर्तों पर नौकरी और पदोन्नति का अधिकार मिलना चाहिए, जिन शर्तों पर उनकी नियुक्ति हुई थी।

संघ ने स्पष्ट किया है कि अगर नियुक्ति के समय टीईटी अनिवार्य नहीं था, तो अब इसे अनिवार्य बनाना अनुचित होगा। इस मुद्दे पर संघ ने कानूनी रास्ता अपनाने के संकेत भी दिए हैं और वकीलों से लगातार सलाह ली जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश और शिक्षकों में डर का माहौल

सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर को अपने फैसले में कहा था कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों को दो साल के भीतर टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। जो शिक्षक परीक्षा में असफल होंगे, उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी। साथ ही, पदोन्नति के लिए भी टीईटी पास करना जरूरी कर दिया गया है।

हालांकि, जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में पांच साल से कम समय बचा है, उन्हें टीईटी से छूट मिलेगी, लेकिन पदोन्नति के लिए उन्हें भी यह परीक्षा पास करनी होगी।

इस आदेश से पूरे देश में लाखों शिक्षक प्रभावित होंगे। संघ के अध्यक्ष सुशील पांडे और सचिव मनोज कुमार समेत कई राज्यों के शिक्षक नेता इस विषय पर रणनीति बनाने दिल्ली पहुंचे हैं।

संघ का तर्क: पुराने नियमों के तहत मिले अधिकार

संघ का कहना है कि जब शिक्षकों की भर्ती हुई थी, उस समय के नियमों में टीईटी की अनिवार्यता का प्रावधान नहीं था। इसलिए उन्हें उन्हीं सेवा शर्तों पर काम करने और पदोन्नति पाने का हक मिलना चाहिए।

संघ केंद्र और राज्य सरकारों से मांग करेगा कि नियमों और कानूनों में बदलाव कर स्पष्ट करें कि पुराने नियमों के तहत नियुक्त शिक्षकों को किसी भी नए प्रावधान के तहत नौकरी खोने का डर न हो।

संघ का पहला प्रयास सरकार से राहत पाने पर रहेगा, लेकिन वह कानूनी विकल्पों को भी खुला रखेगा।