पीएसी और सशस्त्र पुलिस कर्मियों की पदोन्नति असमानता दूर करने को बनी समिति, सभी को मिलेगा समान अवसर
India News Live,Digital Desk : सशस्त्र पुलिस और पीएसी कर्मियों की पदोन्नति में लंबे समय से चल रही असमानता का समाधान जल्द निकाला जाएगा। नागरिक पुलिस की तुलना में पीछे रह रहे पीएसी के जवानों को अब बराबरी का मौका दिलाने के लिए उच्चस्तरीय पहल शुरू हो गई है।
आइजी पीएसी मध्य जोन, डॉ. प्रीतिन्दर सिंह की अध्यक्षता में एक पांच सदस्यीय समिति बनाई गई है। यह समिति पदोन्नति से जुड़े वैधानिक नियमों और असमानताओं की बारीकी से जांच करेगी ताकि सभी पुलिसकर्मियों को समान अवसर मिल सके।
एडीजी पीएसी डॉ. आर.के. स्वर्णकार ने इस समिति का गठन किया है। इसमें आइजी पीएसी मुख्यालय उपेन्द्र कुमार अग्रवाल, डीआइजी पीएसी बरेली अनुभाग शालिनी, 27वीं वाहिनी सीतापुर की सेनानायक बबिता साहू और 25वीं वाहिनी रायबरेली के सेनानायक लाल भरत कुमार पाल सदस्य हैं। समिति को निर्देश दिया गया है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अन्य अधिकारियों से चर्चा कर पीएसी व सशस्त्र पुलिस के जवानों की पदोन्नति संबंधी दिक्कतों पर मंथन करे।
यह मामला नया नहीं है। करीब चार साल पहले भी डीजीपी मुख्यालय ने शासन को प्रस्ताव भेजा था, जिसमें पीएसी के लिए 3,134 नए पद बनाने की सिफारिश की गई थी। इसमें 45 निरीक्षक और 3,089 उपनिरीक्षक के पद शामिल थे।
जानकारी के मुताबिक 1992 बैच के कई आरक्षी नागरिक पुलिस में पदोन्नति पाकर निरीक्षक तक बन चुके हैं। जबकि उसी बैच के पीएसी के जवान पदों की कमी के चलते आगे नहीं बढ़ पाए। कई कर्मियों को न्याय के लिए अदालत तक का सहारा लेना पड़ा।
इतना ही नहीं, पहले यह भी सामने आया था कि 932 पीएसी कर्मियों को, जो लंबे समय से नागरिक पुलिस में काम कर रहे थे, पदोन्नति का लाभ मिल गया। बाद में जब उन्हें उनके मूल विभाग पीएसी में वापस भेजा गया, तो इस पर काफी विवाद भी हुआ।