Columbia University immigration raid: छात्रा की गिरफ्तारी से मचा बवाल, राष्ट्रपति ट्रंप के दखल के बाद हुई रिहाई
India News Live,Digital Desk : अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी एक बार फिर सुर्खियों में है। गुरुवार, 26 फरवरी की सुबह फेडरल इमिग्रेशन एजेंट्स द्वारा छात्रा एली अघायेवा (Ellie Aghayeva) की गिरफ्तारी के बाद पूरे कैंपस में तनाव फैल गया। हालांकि, इस हाई-प्रोफाइल मामले में न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी के हस्तक्षेप और राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के सीधे आदेश के बाद छात्रा को कुछ ही घंटों में रिहा कर दिया गया।
कैसे हुई गिरफ्तारी? पुलिस बनकर आए थे एजेंट्स
गिरफ्तारी का तरीका काफी विवादित रहा, जिसने छात्रों के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया:
भेष बदलकर एंट्री: आरोप है कि फेडरल इमिग्रेशन एजेंट्स पुलिस अधिकारी बनकर कैंपस में दाखिल हुए।
बहाना: उन्होंने दावा किया कि वे एक 'लापता बच्चे' की तलाश कर रहे हैं, लेकिन उनकी असल मंशा एली अघायेवा को हिरासत में लेना था।
सोशल मीडिया पर अपील: गिरफ्तारी के तुरंत बाद एली ने इंस्टाग्राम पर अपनी फोटो शेयर कर मदद मांगी, जिसमें उनके पैर गाड़ी की पिछली सीट पर दिख रहे थे। उन्होंने लिखा, "DHS ने मुझे गैर-कानूनी तरीके से गिरफ्तार किया है।"
वीजा विवाद या विरोध प्रदर्शन का नतीजा?
डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने इस कार्रवाई पर सफाई देते हुए कहा कि अघायेवा का स्टूडेंट वीजा 2016 में ही खत्म कर दिया गया था क्योंकि वह क्लासेस में उपस्थित नहीं हो रही थीं। दूसरी ओर, समर्थकों का मानना है कि यह कार्रवाई इजरायल के खिलाफ चल रहे कैंपस विरोध प्रदर्शनों में उनकी सक्रिय भूमिका के कारण की गई है।
राष्ट्रपति ट्रंप का दखल और जोहरान ममदानी की भूमिका
न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने इस मामले में निर्णायक भूमिका निभाई। ममदानी ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के साथ एक विशेष बैठक के दौरान इस गिरफ्तारी पर गहरी चिंता जताई।
ट्रंप का आदेश: मेयर की दलीलों के बाद, राष्ट्रपति ट्रंप ने मानवीय आधार पर छात्रा को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया।
रिहाई की पुष्टि: रिहाई के बाद एली ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर बताया कि वह सुरक्षित हैं, लेकिन इस पूरी घटना से सदमे में हैं।
अन्य छात्रों के लिए भी ममदानी की अपील
मेयर ममदानी ने केवल एली ही नहीं, बल्कि उन सभी वर्तमान और पूर्व छात्रों के खिलाफ मामले वापस लेने की अपील की है जो विरोध प्रदर्शनों के कारण डिपोर्टेशन (देश निकाला) का सामना कर रहे हैं। इस घटना ने अमेरिका में छात्रों के अधिकारों और इमिग्रेशन नीतियों पर एक नई बहस छेड़ दी है।