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November 06 2026 03:44 pm

लाइफ टाइम फ्री (LTF) क्रेडिट कार्ड को बंद करने की जल्दबाजी न करें: सिबिल स्कोर और क्रेडिट लिमिट पर पड़ सकता है बुरा असर

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क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल आज हमारी आधुनिक वित्तीय जीवनशैली का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा ग्राहकों को लुभाने के लिए अक्सर 'लाइफ टाइम फ्री' (Lifetime Free - LTF) क्रेडिट कार्ड जारी किए जाते हैं, जिन पर कोई जॉइनिंग फीस या एनुअल मेंटेनेंस चार्ज (Annual Fee) नहीं लगता। कई बार लोग कई सारे कार्ड ले लेते हैं और जब कोई कार्ड लंबे समय तक बिना इस्तेमाल के पर्स या दराज में पड़ा रहता है, तो मन में पहला विचार यही आता है कि 'जब इसका कोई इस्तेमाल नहीं है, तो इसे बंद (Cancel/Close) क्यों न करवा दिया जाए?' ऊपर से यह फैसला बिल्कुल सही और सहज लग सकता है, लेकिन पर्सनल फाइनेंस और क्रेडिट स्कोरिंग के नियमों के अनुसार किसी पुराने लाइफ टाइम फ्री क्रेडिट कार्ड को अचानक बंद करना आपके सिबिल स्कोर (CIBIL Score) और भविष्य में लोन मिलने की क्षमता को तगड़ा झटका दे सकता है। किसी भी फ्री क्रेडिट कार्ड को बंद करने से पहले इन 5 महत्वपूर्ण वित्तीय बातों को समझना बेहद जरूरी है।

1. क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो (CUR) में अचानक उछाल और सिबिल स्कोर का गिरना

क्रेडिट कार्ड बंद करने का सबसे सीधा और नकारात्मक प्रभाव आपके क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो (Credit Utilization Ratio - CUR) पर पड़ता है। सीयूआर का मतलब है कि आपके पास कुल कितनी क्रेडिट लिमिट उपलब्ध है और आप उसका कितना प्रतिशत इस्तेमाल करते हैं। वित्तीय नियमों के अनुसार, बेहतर सिबिल स्कोर के लिए आपका सीयूआर हमेशा 30 प्रतिशत से नीचे रहना चाहिए।

इसे एक आसान उदाहरण से समझें: मान लीजिए आपके पास दो क्रेडिट कार्ड हैं। कार्ड-A की लिमिट ₹1,00,000 है और कार्ड-B (लाइफ टाइम फ्री) की लिमिट भी ₹1,00,000 है। इस प्रकार आपकी कुल क्रेडिट लिमिट ₹2,00,000 हुई। यदि आप हर महीने ₹40,000 खर्च करते हैं, तो आपका CUR मात्र 20% (₹40,000 / ₹2,00,000) है, जो सिबिल के लिहाज से बहुत सुरक्षित है।

लेकिन यदि आप इस्तेमाल न होने वाले कार्ड-B को बंद करवा देते हैं, तो आपकी कुल लिमिट घटकर केवल ₹1,00,000 रह जाएगी। अब उसी ₹40,000 के खर्च पर आपका सीयूआर उछलकर सीधे 40% हो जाएगा। 30% से ऊपर क्रेडिट यूटिलाइजेशन जाते ही क्रेडिट ब्यूरो (CIBIL, Experian) यह मान लेते हैं कि आप कर्ज पर बहुत अधिक निर्भर हैं और आपका सिबिल स्कोर 20 से 40 अंक तक गिर सकता है।

2. क्रेडिट हिस्ट्री की लंबाई (Length of Credit History) का नुकसान

आपके सिबिल स्कोर की गणना में क्रेडिट हिस्ट्री की औसत आयु (Average Age of Accounts) का 15% वेटेज होता है। बैंक और ऋणदाता उन ग्राहकों को सबसे सुरक्षित कर्जदार मानते हैं जिनका क्रेडिट रिकॉर्ड सालों पुराना और बेदाग होता है।

यदि वह लाइफ टाइम फ्री कार्ड आपका सबसे पहला या सबसे पुराना क्रेडिट कार्ड है, जिसे आप पिछले 5 या 8 सालों से रखे हुए हैं, तो उसे बंद करते ही आपकी कुल क्रेडिट हिस्ट्री की औसत उम्र काफी कम हो जाएगी। एक बार पुराना खाता बंद होने पर क्रेडिट ब्यूरो के रिकॉर्ड में आपका प्रोफाइल नया दिखने लगता है, जिससे भविष्य में होम लोन या कार लोन लेते समय कम ब्याज दरों का लाभ मिलने में दिक्कत आ सकती है।

3. इमरजेंसी के लिए 'बैकअप फंड' और सुरक्षा कवच का छिनना

लाइफ टाइम फ्री कार्ड पर जब कोई सालाना चार्ज ही नहीं देना है, तो वह आपके लिए एक 'जीरो-कॉस्ट इमरजेंसी फंड' की तरह काम करता है। कई बार मेडिकल इमरजेंसी, विदेश यात्रा या किसी अप्रत्याशित वित्तीय संकट के दौरान जब प्राथमिक कार्ड की लिमिट खत्म हो जाती है, तो यह बैकअप कार्ड संकटमोचक बन जाता है।

इसके अलावा, यदि आपका मुख्य क्रेडिट कार्ड किसी धोखाधड़ी, डैमेज या खो जाने के कारण ब्लॉक हो जाता है, तो नया कार्ड आने में 5 से 7 दिन का समय लगता है। ऐसी स्थिति में आपके पास मौजूद दूसरा फ्री कार्ड आपके दैनिक वित्तीय लेन-देन को बिना किसी रुकावट के चालू रखता है।

4. ई-कॉमर्स डिस्काउंट्स, मर्चेंट ऑफर्स और रिवॉर्ड पॉइंट्स का नुकसान

हर बैंक के अपने अलग-अलग मर्चेंट पार्टनर्स होते हैं। उदाहरण के लिए, अमेज़न की सेल में किसी विशेष बैंक (जैसे ICICI या HDFC) के कार्ड पर 10% का इंस्टेंट डिस्काउंट मिलता है, तो फ्लिपकार्ट की सेल में Axis या SBI के कार्ड पर छूट मिलती है।

यदि आपके पास किसी बैंक का लाइफ टाइम फ्री कार्ड है, तो भले ही आप उसे रोजाना इस्तेमाल न करें, लेकिन ऑनलाइन फेस्टिव सेल्स, ट्रैवल बुकिंग्स (MakeMyTrip, Cleartrip) या डाइनिंग आउट के दौरान उस कार्ड से जुड़े डिस्काउंट्स का फायदा आसानी से उठा सकते हैं। कार्ड बंद करने से पहले यह भी जांच लें कि उस पर कोई पुराने रिवॉर्ड पॉइंट्स या कैशबैक तो जमा नहीं हैं। कार्ड बंद होने के साथ ही अनरिडीम्ड रिवॉर्ड पॉइंट्स पूरी तरह शून्य (Lapse) हो जाते हैं।

5. आरबीआई (RBI) का इनएक्टिव कार्ड नियम: हर 6-12 महीने में एक छोटा ट्रांजैक्शन जरूरी

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार, यदि कोई क्रेडिट कार्ड लगातार 12 महीने (1 साल) तक पूरी तरह निष्क्रिय (Inactive) रहता है, तो बैंक ग्राहक को 30 दिन का नोटिस देकर उस कार्ड को खुद से बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

यदि आप अपने लाइफ टाइम फ्री कार्ड को केवल क्रेडिट स्कोर और लिमिट मजबूत रखने के लिए एक्टिव रखना चाहते हैं, तो साल में कम से कम 1 या 2 बार उससे कोई छोटा सा लेन-देन जरूर करें—जैसे मोबाइल रिचार्ज, पेट्रोल भरवाना, या यूटिलिटी बिल पेमेंट—और बिल जनरेट होते ही तुरंत भुगतान कर दें। ऐसा करने से कार्ड 'एक्टिव' बना रहता है और आपको कोई ब्याज या लेट फीस भी नहीं देनी पड़ती।

कब बंद करना ही सही फैसला हो सकता है?

लाइफ टाइम फ्री कार्ड को हमेशा अपने पास रखना समझदारी है, लेकिन कुछ दुर्लभ मामलों में इसे बंद करना उचित हो सकता है:

यदि आपको लगता है कि कई कार्ड होने के कारण आप फिजूलखर्ची पर नियंत्रण नहीं रख पा रहे हैं।

यदि आपको कार्ड के खो जाने, फ्रॉड या साइबर फ्रॉड की निगरानी करने में अत्यधिक तनाव होता है।

यदि बैंक ने शर्तों में बदलाव करके उस फ्री कार्ड पर हिडन चार्ज या नया एनुअल चार्ज जोड़ दिया हो (जिसकी सूचना बैंक द्वारा भेजी जाती है)।

यदि ऐसी कोई मजबूरी नहीं है, तो बिना किसी सालाना फीस वाले कार्ड को बंद करने के बजाय उसे संभालकर रखना और साल में इक्का-दुक्का इस्तेमाल करके एक्टिव रखना ही आपके वित्तीय स्वास्थ्य और क्रेडिट स्कोर के लिए सबसे बेहतरीन रणनीति है।