BREAKING:
August 16 2026 01:30 am

3,000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर लग सकता है चार्ज! सर्वे में खुलासा- 53% यूजर्स छोड़ सकते हैं UPI, विकल्प तलाशेंगे लोग

Post

अगर केंद्र सरकार भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (Payment and Settlement Systems Act, 2007) में प्रस्तावित संशोधनों को मंजूरी देती है, तो भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव आ सकता है। इन संशोधनों के बाद 3,000 रुपये से अधिक के लेन-देन के लिए आधे से अधिक यूपीआई (UPI) यूजर्स दूसरे विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। दरअसल, इन संशोधनों से यूपीआई लेन-देन पर एक बार फिर 'मर्चेंट डिस्काउंट रेट' (MDR) लागू होने का रास्ता साफ हो सकता है।

संशोधन के जरिए सरकार को धारा 10A के तहत मौजूदा 'जीरो MDR' प्रावधान को हटाकर यूपीआई पर MDR लागू करने का अधिकार मिल जाएगा। यह प्रावधान वर्तमान में बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को अधिसूचित डिजिटल पेमेंट पर शुल्क लेने से रोकता है। हालांकि, यह प्रस्ताव स्पष्ट करता है कि यूपीआई का उपयोग करने वाले ग्राहकों पर कोई प्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगाया जाएगा, यानी इसका बोझ सीधे तौर पर बड़े व्यापारियों (Merchants) पर पड़ेगा। बावजूद इसके, इसका असर ग्राहकों के भुगतान विकल्पों पर पड़ सकता है।

लोकलसर्किल्स सर्वे की खास बातें

मंगलवार को जारी लोकलसर्किल्स (LocalCircles) के एक नए सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। देश भर के 322 जिलों से मिली 45,000 से अधिक प्रतिक्रियाओं के आधार पर सर्वे के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

53% यूजर्स: यदि बड़े व्यापारियों पर MDR लागू किया जाता है, तो वे 3,000 रुपये से अधिक के लेन-देन के लिए यूपीआई का उपयोग करना छोड़ सकते हैं।

वैकल्पिक विकल्प: इनमें से 27% ने कहा कि वे क्रेडिट कार्ड, 14% डेबिट कार्ड और 12% बैंक ट्रांसफर या कैश का विकल्प चुनेंगे।

व्यापारी पर निर्भरता: 18% यूजर्स ने कहा कि वे यूपीआई का उपयोग तभी जारी रखेंगे जब शुल्क व्यापारी द्वारा वहन किया जाए।

शुल्क देने को तैयार: 12% यूजर्स ने कहा कि चाहे उन्हें शुल्क देना पड़े, फिर भी वे यूपीआई का उपयोग जारी रखेंगे।

रकम पर फैसला: 14% यूजर्स ने माना कि उनका निर्णय शुल्क की सटीक राशि पर निर्भर करेगा।

यह सर्वे सरकार द्वारा भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम की धारा 10A में संशोधन के प्रस्ताव के बाद सामने आया है। साल 2020 से, यूपीआई और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन के लिए यह शुल्क 0% है, क्योंकि सरकार ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए ग्राहकों और व्यापारियों दोनों के लिए MDR न लगाने का निर्देश दिया था।

क्या है MDR और यह कैसे काम करता है?

जब कोई ग्राहक क्रेडिट या डेबिट कार्ड से 1,000 रुपये का भुगतान करता है, तो उसमें से एक छोटा प्रतिशत काटकर दोनों बैंकों के बीच बांट दिया जाता है, जबकि व्यापारी को शेष राशि मिलती है। वर्तमान व्यवस्था के तहत यूपीआई लेन-देन में व्यापारियों को पूरी राशि मिलती है, लेकिन MDR लागू होने पर इसमें मर्चेंट को शुल्क चुकाना पड़ सकता है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

Paramotor Digital Technology Limited की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया आशेर (Sonia Asher) का कहना है कि ये संशोधन भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए अधिक टिकाऊ बिजनेस स्ट्रक्चर तैयार करने में मददगार साबित हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि 'शून्य MDR' ने यूपीआई को देश में लोकप्रिय बनाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है, लेकिन इतनी विशाल मात्रा में हो रहे लेन-देन के लिए विश्व स्तरीय भुगतान बुनियादी ढांचे को बनाए रखने हेतु इनोवेशन, सिक्योरिटी, फ्लेक्सिबिलिटी और ग्राहक अनुभव में निरंतर निवेश की आवश्यकता होती है।