बुध प्रदोष व्रत 2026: आज शिवजी और गणेश जी की बरसेगी कृपा, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और विशेष उपाय
India News Live,Digital Desk : आज यानी 15 अप्रैल 2026 को बुध प्रदोष व्रत है। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है, जो भगवान शिव को समर्पित होता है। चूंकि आज बुधवार है, इसलिए इसे बुध प्रदोष कहा जा रहा है। बुधवार का दिन भगवान गणेश का होता है, ऐसे में आज शिव परिवार की संयुक्त पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
बुध प्रदोष व्रत 2026: शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा शाम के समय यानी 'प्रदोष काल' में की जाती है। पंचांग के अनुसार, आज पूजा के लिए केवल डेढ़ घंटे का विशेष मुहूर्त उपलब्ध है:
पूजा का समय: शाम 06:01 बजे से शाम 07:31 बजे तक।
महत्व: इस शुभ समय में की गई पूजा अत्यंत फलदायी और शीघ्र फल देने वाली मानी जाती है।
सरल पूजा विधि
संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
शाम की तैयारी: शाम के समय पुनः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान पर शिव प्रतिमा या शिवलिंग के पास बैठें।
अभिषेक: शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें।
अर्पण: शिवजी को प्रिय बेलपत्र, धतूरा, अक्षत (चावल) और श्वेत फूल अर्पित करें।
पाठ व मंत्र: प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जाप करें।
आरती: अंत में धूप-दीप जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
आज के विशेष उपाय (बुध दोष से मुक्ति के लिए)
बुध प्रदोष के दिन कुछ खास उपाय करने से बुद्धि, व्यापार और करियर में उन्नति होती है:
हरे मूंग का उपाय: आज शिवलिंग पर एक मुट्ठी हरे मूंग अर्पित करें। मान्यता है कि इससे दरिद्रता दूर होती है और आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है।
गणेश जी को दूर्वा: चूंकि आज बुधवार है, इसलिए भगवान गणेश को 21 दूर्वा की गांठें चढ़ाएं। इससे कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
दान: जरूरतमंदों को हरी वस्तुओं या अनाज का दान करना शुभ माना जाता है।
व्रत के लाभ
बुध प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति की वाणी, बुद्धि और कार्यक्षमता में निखार आता है।
यह व्रत वैवाहिक जीवन में मधुरता लाता है और संतान सुख की प्राप्ति में सहायक होता है।
शिवजी की कृपा से मानसिक शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
पूरे दिन सात्विक आहार लें और मन में किसी के प्रति द्वेष न रखें।
पूजा के समय उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना श्रेष्ठ होता है।
व्रत के दौरान क्रोध और विवाद से बचें, शांत मन से भगवान का ध्यान करें।