बुद्ध पूर्णिमा 2026: रामनगरी अयोध्या में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, सरयू तट पर हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
India News Live,Digital Desk : वैशाख मास की पूर्णिमा यानी बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर धर्मनगरी अयोध्या में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। गुरुवार तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही पवित्र सरयू नदी के घाटों पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हजारों की संख्या में आए भक्तों ने सरयू के शीतल जल में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। मान्यता है कि वैशाख पूर्णिमा पर सरयू स्नान करने से पूरे माह के पुण्य फल की प्राप्ति होती है, इसी श्रद्धा के साथ पूरी रामनगरी आज 'जय श्रीराम' और 'हर-हर सरयू' के जयकारों से गुंजायमान रही।
सरयू तट पर भोर से ही रही रौनक
धार्मिक नगरी में बुद्ध पूर्णिमा का विशेष महत्व है। गुरुवार भोर से ही आसपास के जिलों और दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था। जैसे-जैसे सूर्य की पहली किरण दिखाई दी, सरयू के विभिन्न घाटों— नया घाट, गुप्तार घाट और चौधरी चरण सिंह घाट पर तिल रखने की जगह नहीं बची। परिवार सहित आए श्रद्धालुओं ने स्नान के पश्चात तट पर ही पूजा-अर्चना की और सामर्थ्य अनुसार दान-पुण्य किया। ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आज के दिन किया गया दान कई गुना अधिक फलदायी होता है, इसीलिए घाटों पर दान देने वालों का तांता लगा रहा।
हनुमानगढ़ी और रामलला के दरबार में लगी लंबी कतारें
पवित्र स्नान के बाद श्रद्धालुओं का रुख अयोध्या के प्रमुख मंदिरों की ओर हुआ। संकटमोचन हनुमानगढ़ी मंदिर में बजरंगबली के दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं। इसके साथ ही राम जन्मभूमि परिसर, कनक भवन और पौराणिक नागेश्वर नाथ मंदिर में भी दर्शन-पूजन का सिलसिला दोपहर तक अनवरत जारी रहा। पूरी नगरी में उत्सव जैसा माहौल दिखा और मंदिरों के बाहर भक्तों की कतारें भक्ति की पराकाष्ठा को दर्शा रही थीं।
सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम, ड्रोन से रखी गई नजर
भारी भीड़ को देखते हुए अयोध्या प्रशासन और पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रही। सरयू के गहरे पानी में श्रद्धालुओं को जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई थी और जल पुलिस की टीमें तैनात रहीं। प्रमुख मार्गों और मंदिर परिसरों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी। पुलिस प्रशासन ने ड्रोन कैमरों के जरिए भीड़ के दबाव और सुरक्षा व्यवस्था की निरंतर निगरानी की। प्रशासन के कुशल प्रबंधन के चलते श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन में किसी बड़ी असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
बुद्ध पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
अयोध्या के संतों और विद्वानों के अनुसार, बुद्ध पूर्णिमा को 'सत्य विनायक' पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के अवतार महात्मा बुद्ध का प्राकट्य हुआ था। सरयू स्नान और दान-पुण्य से भक्तों के मानसिक और शारीरिक कष्ट दूर होते हैं। श्रद्धालुओं ने न केवल अपने लिए बल्कि विश्व कल्याण के लिए भी प्रभु से प्रार्थना की।