Bravery of Quit India Movement : गोरखपुर के डोहरिया कलां के नौ अमर बलिदानी
- by Priyanka Tiwari
- 2025-08-12 18:00:00
India News Live,Digital Desk : स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में जब भी गोरखपुर की वीरगाथा सुनाई जाएगी, सहजनवां के डोहरिया कलां गांव का नाम सम्मान से लिया जाएगा। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी के “करो या मरो” के नारे को यहां के नौ रणबांकुरों ने अपने सीने पर गोलियां खाकर साकार किया। 23 अगस्त 1942 का वह दिन हमेशा के लिए इतिहास में दर्ज हो गया, जब इन वीरों ने अंग्रेजी हुकूमत से सीधा टकराव किया और मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी का संदेश जब डोहरिया कलां पहुंचा, तो यहां के स्वतंत्रता प्रेमियों ने आंदोलन में कूदने का संकल्प लिया। तय हुआ कि 23 अगस्त को गांव में “अंग्रेजों भारत छोड़ो” का बिगुल बजाया जाएगा। जैसे ही भीड़ ने नारे लगाने शुरू किए, गोरखपुर के तत्कालीन कलेक्टर एम.एस. मास के आदेश पर पुलिस और अधिकारियों ने आंदोलन रोकने की कोशिश की।
लोग पीछे हटने को तैयार नहीं थे, बल्कि विरोध और तेज हो गया। हालात बिगड़ते देख तत्कालीन थानेदार एनुल हक ने सशस्त्र पुलिस बुलाकर पहले लाठीचार्ज कराया, फिर गोलियां चलवा दीं। गोलियों की बौछार में नौ स्वतंत्रता सेनानी शहीद हो गए और 23 गंभीर रूप से घायल हो गए।
इतना ही नहीं, अंग्रेजी पुलिस ने पूरे डोहरिया गांव में आग लगा दी, घर जला दिए और ग्रामीणों पर अमानवीय अत्याचार किए। इस घटना ने पूरे गोरखपुर और पूर्वांचल में आजादी की लहर को और तेज कर दिया।
आज यह स्मारक स्थल न केवल पूर्वांचल बल्कि पूरे देश के लिए स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बन चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इसे एक संरक्षित ऐतिहासिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया गया है, जहां हर साल हजारों लोग उन नौ अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि देने पहुंचते हैं।