बिहार के लाल का कमाल विवेक कुमार बने JA एशिया पैसिफिक के नए प्रेसिडेंट और CEO, संभालेंगे 60% वैश्विक युवाओं की कमान

Post

India News Live,Digital Desk : ग्लोबल यूथ स्किलिंग की दुनिया से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रतिष्ठित संस्थान 'JA वर्ल्डवाइड' ने भारतीय मूल के विवेक कुमार को JA एशिया पैसिफिक का नया प्रेसिडेंट और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) नियुक्त किया है। विवेक कुमार की यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब पूरी दुनिया की नजरें एशिया-प्रशांत क्षेत्र के युवाओं के कौशल विकास और उनकी आर्थिक प्रगति पर टिकी हैं।

WWF-सिंगापुर के पूर्व CEO अब JA में दिखाएंगे दम

विवेक कुमार के पास निजी क्षेत्र, सार्वजनिक सेवा और अंतरराष्ट्रीय एनजीओ (NGO) में नेतृत्व का दो दशकों से अधिक का शानदार अनुभव है। इससे पहले उन्होंने WWF-सिंगापुर के CEO के तौर पर अपनी सेवाएं दी थीं, जहां उन्होंने कार्बन फाइनेंस और संरक्षण के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर संगठन को मजबूती प्रदान की। उनकी रणनीतिक सोच और बड़ी साझेदारियां बनाने की क्षमता ने उन्हें लीडरशिप की दुनिया में एक अलग पहचान दिलाई है।

बिहार से सिंगापुर तक: शिक्षा और संघर्ष की कहानी

भारत के बिहार राज्य में जन्मे और पले-बढ़े विवेक कुमार शिक्षा की ताकत को बखूबी समझते हैं। उनका मानना है कि जब शिक्षा प्रणाली युवाओं को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में विफल रहती है, तो इसके परिणाम गंभीर होते हैं। यही कारण है कि वे लंबे समय से ऐसे एजुकेशन सिस्टम की वकालत कर रहे हैं, जो किताबी ज्ञान के बजाय युवाओं को 'रियल वर्ल्ड' यानी वास्तविक दुनिया के अनुभवों से जोड़े।

60% युवाओं के भविष्य को संवारने का जिम्मा

एशिया-प्रशांत क्षेत्र दुनिया के सबसे विविधतापूर्ण और तेजी से बदलते क्षेत्रों में से एक है। दुनिया के 60 प्रतिशत से अधिक युवा इसी क्षेत्र में रहते हैं। JA एशिया पैसिफिक के बोर्ड चेयरमैन पीजी रघुरामन ने विवेक पर भरोसा जताते हुए कहा, "विवेक की लीडरशिप युवाओं के लिए नवाचार और नई तकनीक के जरिए अवसरों के द्वार खोलेगी। वे एक मूल्य-आधारित दृष्टिकोण (Value-driven approach) के साथ संगठन को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।"

चुनौतियों से डर नहीं, आगे बढ़ने का जुनून

विवेक कुमार का करियर ग्राफ बेहद प्रभावशाली रहा है। शेल (Shell) जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों से लेकर सिंगापुर के लेबर मूवमेंट में क्षेत्रीय नेतृत्व तक, उन्होंने हर भूमिका को बखूबी निभाया। अपनी कार्यशैली पर वे कहते हैं, "जब कोई बड़ी चुनौती मेरे सामने आती है, तो मैं खुद को आगे बढ़ाने से रोक नहीं पाता।" अब उनकी यही 'क्रिएटिव बेचैनी' एशिया-प्रशांत के करोड़ों युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करेगी।