'सुप्रीम कोर्ट शॉपिंग की जगह नहीं...', CM हिमंत सरमा के शूटिंग वीडियो विवाद पर SC की सख्त टिप्पणी, सुनवाई से इनकार

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India News Live,Digital Desk : असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के एक कथित विवादित वीडियो को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने आज कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने मुख्यमंत्री के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने और एसआईटी (SIT) जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाकर्ताओं को फटकार लगाते हुए कहा कि हर मामले को लेकर सीधे सुप्रीम कोर्ट आना अब एक 'परेशान करने वाला ट्रेंड' बन गया है।

"हाईकोर्ट का हौसला न तोड़ें": सुप्रीम कोर्ट की नसीहत

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ताओं से सवाल किया कि वे इस मामले को लेकर गुवाहाटी हाई कोर्ट क्यों नहीं गए? अदालत ने टिप्पणी की कि सीधे शीर्ष अदालत का रुख करना हाई कोर्ट्स की गरिमा और अधिकार क्षेत्र को कमतर दिखाने जैसा है। बेंच ने सख्त लहजे में कहा, "आप सीधे यहां आकर हाई कोर्ट का हौसला तोड़ रहे हैं। हमें पूरे देश के न्यायिक प्रशासन का ध्यान रखना है।"

अभिषेक मनु सिंघवी और CJI के बीच तीखी बहस

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि मामला गंभीर है और मुख्यमंत्री के बयानों से एक विशेष समुदाय के अधिकारों का हनन हो रहा है। सिंघवी ने मांग की कि अगर इस अदालत में सुनवाई नहीं हो रही, तो मामले को किसी दूसरे हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया जाए। इस पर चीफ जस्टिस बिफर गए और उन्होंने कहा, "यह हाई कोर्ट की अथॉरिटी को कमजोर करने की एक सोची-समझी कोशिश है। सुप्रीम कोर्ट 'शॉपिंग' के लिए कोई आसान जगह नहीं हो सकती कि बस इसलिए यहां आ गए क्योंकि बड़े वकील यहां बैठते हैं।"

क्या है पूरा विवाद?

यह विवाद असम भाजपा की ओर से जारी एक सोशल मीडिया वीडियो के बाद शुरू हुआ। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि वीडियो में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को निशाना साधते (Target Shooting) हुए दिखाया गया है, जिसे सांकेतिक रूप से एक विशेष समुदाय (बंगाली भाषी मुस्लिम) से जोड़कर पेश किया गया। इसके अलावा, सीएम द्वारा 'मियां' समुदाय को लेकर की गई टिप्पणियों को भी आधार बनाया गया था। याचिकाकर्ताओं ने इसे भड़काऊ बताते हुए पुलिस जांच की मांग की थी।

चुनाव से पहले याचिकाओं के 'ट्रेंड' पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने एक और महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनावों से ठीक पहले इस तरह की याचिकाएं दाखिल करना अब एक फैशन या ट्रेंड बन गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता कानूनी प्रक्रिया का पालन करें और पहले संबंधित हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएं। इस फैसले के बाद अब याचिकाकर्ताओं के पास गुवाहाटी हाई कोर्ट जाने का विकल्प बचा है।