बड़ा झटका! अब 14.2 किलो नहीं, रसोई सिलेंडर में मिलेगी सिर्फ 10 किलो गैस; खाड़ी युद्ध के चलते सरकार बना रही है 'प्लान-B'

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India News Live,Digital Desk : रूस-यूक्रेन के बाद अब ईरान और खाड़ी देशों के बीच छिड़े भीषण संघर्ष की तपिश भारतीय रसोई तक पहुंच गई है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण एलपीजी (LPG) के आयात में भारी गिरावट आई है, जिससे देश में गैस का संकट गहराने लगा है। इस आपात स्थिति से निपटने के लिए सरकार एक बेहद चौंकाने वाले फैसले पर विचार कर रही है। नई योजना के तहत, आपके घरों में आने वाले पारंपरिक 14.2 किलोग्राम के लाल सिलेंडर में अब केवल 10 किलो गैस ही भरी जाएगी।

क्यों आ रही है गैस की किल्लत? आयात में भारी गिरावट

भारत अपनी जरूरत की अधिकांश एलपीजी खाड़ी देशों से आयात करता है। युद्ध के कारण समुद्री रास्तों में व्यवधान आया है, जिससे नए जहाजों की आवक लगभग ठप हो गई है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले सप्ताह भारत में केवल 92,700 टन गैस पहुंची, जो पूरे देश की मात्र एक दिन की खपत के बराबर है। तेल कंपनियों के पास जमा पुराना स्टॉक (बफर स्टॉक) तेजी से खत्म हो रहा है, जिसने पेट्रोलियम मंत्रालय की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

सरकार की मजबूरी: 'सबको मिले गैस, भले ही मिले कम'

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 14.2 किलो के बजाय 10 किलो गैस देने के पीछे सरकार का तर्क 'राशनिंग' है। सरकार चाहती है कि गैस की कमी के कारण किसी की रसोई बंद न हो। वजन कम करने से उपलब्ध स्टॉक को ज्यादा से ज्यादा परिवारों तक पहुंचाया जा सकेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने भी स्वीकार किया है कि वर्तमान में एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

क्या कम वजन से ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा असर?

आम जनता के मन में सबसे बड़ा सवाल इसकी कीमत को लेकर है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि सिलेंडर में गैस का वजन घटाया जाता है, तो उसकी कीमत भी उसी अनुपात में कम की जाएगी। यानी ग्राहकों को 4.2 किलो कम गैस के लिए कम पैसे चुकाने होंगे, जिससे उन्हें आर्थिक चपत नहीं लगेगी।

कैसे होगी पहचान? लगेंगे विशेष स्टिकर

भ्रम की स्थिति से बचने के लिए सरकार ने कुछ सुरक्षा उपाय भी सोचे हैं:

स्पेशल स्टिकर: कम वजन वाले इन सिलेंडरों पर स्पष्ट रूप से वजन की जानकारी देने वाले स्टिकर लगाए जाएंगे।

मशीन सेटिंग में बदलाव: गैस बॉटलिंग प्लांट्स में मशीनों को 10 किलो फिलिंग के हिसाब से री-कैलिब्रेट किया जाएगा।

कानूनी मंजूरी: इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए आवश्यक कानूनी और तकनीकी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।

गैस कंपनियों और राजनीतिक हलकों में खलबली

भले ही सरकार इसे संकट प्रबंधन कह रही हो, लेकिन गैस कंपनियों ने इस योजना पर हाथ खड़े कर दिए हैं। कंपनियों का मानना है कि अचानक वजन कम करने से उपभोक्ताओं के बीच भारी नाराजगी पैदा होगी और वे इसे 'धोखाधड़ी' के रूप में देख सकते हैं। खासकर उन राज्यों में जहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, वहां यह मुद्दा एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर सकता है। कंपनियों ने आगाह किया है कि अगर अगले महीने तक आयात नहीं सुधरा, तो स्थिति बेकाबू हो सकती है।