यूपी में बिजली संकट पर बड़ी कार्रवाई: संविदा कर्मियों की छंटनी पर विद्युत नियामक आयोग सख्त, मध्यांचल एमडी से 7 दिन में मांगा जवाब...
India News Live,Digital Desk : उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था और कर्मचारियों के भविष्य को लेकर विद्युत नियामक आयोग ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम (MVVNL) द्वारा बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों की छंटनी और उसके परिणामस्वरूप विभिन्न क्षेत्रों में बाधित हो रही बिजली आपूर्ति को लेकर आयोग ने नाराजगी जताई है। आयोग ने इस पूरे मामले में संज्ञान लेते हुए मध्यांचल निगम से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
संविदा कर्मियों की छंटनी से गहराया संकट
बीते कुछ दिनों से मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के अंतर्गत आने वाले जनपदों में संविदा कर्मियों को हटाए जाने की खबरें सुर्खियों में थीं। कर्मचारियों को बिना किसी ठोस आधार के सेवा से मुक्त किए जाने के कारण न केवल श्रमिक संगठनों में रोष है, बल्कि इसका सीधा असर प्रदेश की विद्युत व्यवस्था पर भी पड़ा है। तकनीकी कर्मचारियों की कमी के कारण कई उपकेंद्रों पर फाल्ट ठीक करने में घंटों का समय लग रहा है, जिससे आम जनता को भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
नियामक आयोग ने थमाया नोटिस, 7 दिन की मोहलत
विद्युत नियामक आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मध्यांचल निगम के प्रबंधन को नोटिस जारी किया है। आयोग ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि संविदा कर्मियों की छंटनी किन परिस्थितियों में की गई और क्या इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी? आयोग ने निगम को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए सात दिनों का समय दिया है। यदि निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो आयोग इस मामले में सख्त दंडात्मक कार्रवाई भी कर सकता है।
उपभोक्ताओं की परेशानी पर आयोग की पैनी नजर
आयोग के पास पहुंची शिकायतों के अनुसार, संविदा कर्मियों को हटाए जाने के बाद से मेंटेनेंस का काम पूरी तरह चरमरा गया है। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में बिजली की ट्रिपिंग और लो-वोल्टेज की समस्या बढ़ गई है। उपभोक्ता संगठनों का तर्क है कि एक तरफ सरकार निर्बाध बिजली आपूर्ति का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ अनुभवी संविदा कर्मियों को हटाकर व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। अब देखना यह है कि मध्यांचल निगम प्रशासन आयोग के इन तीखे सवालों का क्या जवाब देता है।