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September 09 2026 03:33 am

सितंबर में 4 दिन लगातार ठप हो सकती हैं बैंकिंग सेवाएं: 5-डे बैंकिंग और PLI विवाद पर 11 सितंबर को देशव्यापी हड़ताल का ऐलान; मांगें न मानने पर 26 अक्टूबर से बेमियादी चक्का जाम की चेतावनी

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त्योहारी सीजन की शुरुआत से ठीक पहले देश भर के करोड़ों बैंक ग्राहकों, कारोबारियों और वेतनभोगियों के लिए एक बड़ा अलर्ट सामने आया है। बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के सबसे बड़े शीर्ष संगठन ‘यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस’ (UFBU) ने केंद्र सरकार और भारतीय बैंक संघ (IBA) के कथित उदासीन रवैये के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 11 सितंबर को राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल का औपचारिक ऐलान कर दिया है। यदि यह हड़ताल अपने तय कार्यक्रम के अनुसार होती है, तो देश के कई राज्यों में सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कामकाज लगातार 4 दिनों तक पूरी तरह ठप रह सकता है। इसका सीधा असर न केवल बैंक शाखाओं में नकद निकासी और जमा पर पड़ेगा, बल्कि चेक क्लियरेंस, ड्राफ्ट जारी करने, आरटीजीएस/नेफ्ट प्रोसेसिंग और एटीएम मशीनों में कैश की उपलब्धता पर भी देखने को मिल सकता है। इतना ही नहीं, बैंक यूनियनों ने अपनी लंबित मांगें पूरी न होने की स्थिति में सितंबर के अंत में छमाही क्लोजिंग के दौरान 3 दिन की अतिरिक्त हड़ताल और 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन काम बंद करने का कड़ा अल्टीमेटम भी थमा दिया है।

11 से 14 सितंबर तक 4 दिन का लंबा गतिरोध: कैसे बिगड़ेंगे आम जनता के काम?

कैलेंडर के अनुसार, 11 सितंबर को शुक्रवार का दिन पड़ रहा है, जिस दिन यूएफबीयू के तहत आने वाले सभी 9 प्रमुख बैंक यूनियनों (AIBEA, AIBOC, NCBE, AIBOA, BEFI, INBEF, INBOC आदि) ने देश भर में हड़ताल का आह्वान किया है। इसके ठीक अगले दिन 12 सितंबर को महीने का 'दूसरा शनिवार' (Second Saturday) होने के कारण बैंकों का निर्धारित अवकाश रहेगा। इसके बाद 13 सितंबर को रविवार का साप्ताहिक अवकाश है। वहीं 14 सितंबर (सोमवार) को देश के कई प्रमुख राज्यों—विशेषकर महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना और ओडिशा में गणेश चतुर्थी के पावन पर्व के उपलक्ष्य में बैंकों में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इस तरह लगातार चार दिनों तक शाखाओं के ताले न खुलने से व्यावसायिक भुगतान, व्यापारिक लेन-देन, लोन डिस्बर्सल और आयात-निर्यात से जुड़े बिलों का क्लीयरेंस बुरी तरह बाधित होने की प्रबल आशंका है।

5-डे बैंकिंग (5-Day Work Week) पर 2 साल से अटकी सरकारी मंजूरी

बैंक कर्मचारियों की सबसे प्रमुख और पुरानी मांग सप्ताह में केवल 5 दिन बैंकिंग कार्य दिवस लागू करने की है। यूएफबीयू के अनुसार, भारतीय बैंक संघ (IBA) ने 8 मार्च 2024 को हस्ताक्षरित 12वें द्विवार्षिक समझौते (12th Bipartite Settlement) और 9वें जॉइंट नोट के तहत सभी शनिवार को अवकाश घोषित करने और सोमवार से शुक्रवार तक दैनिक कार्य समय में 40 मिनट की बढ़ोतरी करने पर लिखित सहमति दे दी थी। आईबीए ने औपचारिक रूप से यह प्रस्ताव अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय और सरकार को भेज दिया था। लेकिन 2 वर्ष से अधिक का लंबा समय बीत जाने के बावजूद केंद्र सरकार ने इस फाइल को ठंडे बस्ते में डाल रखा है। बैंक कर्मचारियों का तर्क है कि जब एलआईसी (LIC), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और केंद्र सरकार के अधिकांश कार्यालयों में 5-डे वर्किंग व्यवस्था लागू है, तो फिर कमर्शियल बैंक कर्मियों के साथ यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है।

पीएलआई (PLI) को लेकर छिड़ा विवाद: वरिष्ठ अधिकारियों और आम कर्मचारियों में भेदभाव का आरोप

हड़ताल के पीछे दूसरा सबसे ज्वलंत मुद्दा 'परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव' (PLI) वितरण ढांचे में किया गया एकतरफा बदलाव है। यूनियनों का आरोप है कि आईबीए के साथ यह तय हुआ था कि पीएलआई बैंक के समग्र वित्तीय प्रदर्शन (Overall Bank Performance) के आधार पर तय होगा और स्केल VII तक के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को समान दिनों का प्रोत्साहन मिलेगा। लेकिन वित्तीय सेवा विभाग (DFS) ने एक नई विवादित गाइडलाइन जारी कर दी, जिसके तहत स्केल IV और उससे ऊपर के उच्चाधिकारियों को व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर 365 दिनों के मूल वेतन (Basic Pay) तक का भारी-भरकम इंसेंटिव देने का प्रावधान किया गया है, जबकि क्लर्क, चपरासी और स्केल III तक के सामान्य अधिकारियों के लिए यह अधिकतम 15 दिनों के मूल वेतन + डीए तक सीमित कर दिया गया है। यूनियनों का कहना है कि बैंकों के 8 लाख कुल कर्मचारियों में से स्केल IV से ऊपर के अधिकारी केवल 5 प्रतिशत (करीब 40,000) हैं। 95 प्रतिशत जमीनी कर्मचारियों को दरकिनार कर केवल शीर्ष अधिकारियों को लाभ पहुंचाना कर्मचारियों के बीच भारी असंतोष पैदा कर रहा है।

पेंशन अपडेशन और ओपीएस (OPS) की मांग: सुलह वार्ता और अदालती प्रक्रिया

वेतन और कार्य दिवसों के अलावा बैंक यूनियनों की कई अन्य बुनियादी मांगें भी लंबे समय से अनसुलझी हैं। इनमें 1995 से सेवानिवृत्त हुए पूर्व बैंक कर्मचारियों के लिए 'पेंशन अपडेशन' (जिसमें अंतिम वेतन आयोग के अनुसार पेंशन में संशोधन हो), सभी पेंशनभोगियों के लिए 100% डीए न्यूट्रलाइजेशन का समान फॉर्मूला लागू करना और 2010 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों को नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से पुरानी पेंशन योजना (OPS) में स्विच करने का विकल्प देना शामिल है। यूएफबीयू का कहना है कि पीएलआई का मामला मुख्य श्रम आयुक्त (CLC) के समक्ष सुलह कार्यवाही में और दिल्ली उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने एकतरफा तरीके से नई योजना लागू करने के निर्देश बैंकों को दे दिए हैं, जो श्रम कानूनों की यथास्थिति (Status Quo) का खुला उल्लंघन है।

सितंबर अंत में 3 दिन की हड़ताल और 26 अक्टूबर से बेमियादी हड़ताल का अल्टीमेटम

यूएफबीयू ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि 11 सितंबर की 1 दिन की सांकेतिक हड़ताल तो सिर्फ शुरुआत है। यदि इसके बाद भी वित्त मंत्रालय और बैंक प्रबंधन ने कर्मचारियों की जायज मांगों पर द्विपक्षीय बातचीत शुरू नहीं की, तो 28, 29 और 30 सितंबर को लगातार 3 दिनों की देशव्यापी हड़ताल की जाएगी। चूंकि सितंबर का अंतिम सप्ताह बैंकों की अर्धवार्षिक क्लोजिंग (Half-Yearly Financial Closing) का समय होता है, इसलिए उस दौरान हड़ताल होने से सरकार के राजस्व संग्रह और कॉरपोरेट बैलेंस शीट फाइनल करने पर गंभीर असर पड़ेगा। इसके अलावा, यदि गतिरोध बना रहा तो दिवाली और छठ पूजा के ठीक पहले 26 अक्टूबर से पूरे देश के बैंकिंग तंत्र को अनिश्चितकालीन हड़ताल के जरिए ठप कर दिया जाएगा।

ग्राहकों और व्यापारियों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

इस संभावित गतिरोध को देखते हुए वित्तीय जानकारों ने आम जनता, व्यापारियों और कंपनियों को सलाह दी है कि वे सितंबर के पहले सप्ताह में ही अपने आवश्यक बैंकिंग कार्यों की योजना बना लें। यदि आपको चेक क्लीयर कराना है, डिमांड ड्राफ्ट बनवाना है, भारी मात्रा में नकद राशि जमा या निकालनी है, तो 10 सितंबर (गुरुवार) से पहले ही शाखाओं में जाकर काम निपटा लें। ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई (UPI), आईएमपीएस (IMPS) और नेट बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से चालू रहने की उम्मीद है, लेकिन अगर हड़ताल लंबी खिंची तो बैंक शाखाओं से जुड़े एटीएम में कैश रीफिलिंग का संकट खड़ा हो सकता है। सरकार और यूनियनों के बीच जल्द किसी समझौते पर सहमति न बनने की स्थिति में सितंबर का दूसरा सप्ताह आम आदमी की जेब और वित्तीय लेन-देन के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।