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September 08 2026 04:35 pm

भौम प्रदोष पर शिवलिंग का अभिषेक करते समय न करें ये 3 बड़ी गलतियां, जानें किस धातु के पात्र से करें जलाभिषेक

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सनातन धर्म में त्रयोदशी तिथि भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने का सबसे पावन दिन मानी जाती है। जब यह त्रयोदशी तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है, तो इसे 'भौम प्रदोष व्रत' कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को 'भौम' कहा गया है, जो पराक्रम, भूमि और रक्त के कारक हैं। वहीं मंगलवार का दिन भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार संकटमोचन हनुमान जी की उपासना के लिए समर्पित होता है।

शास्त्रों के अनुसार भौम प्रदोष के दिन सूर्यास्त के तुरंत बाद यानी प्रदोष काल में शिवलिंग का विधिवत अभिषेक करने से कुंडली का गंभीर मंगल दोष शांत होता है, कर्ज के बोझ से मुक्ति मिलती है और घर-परिवार में आ रही अड़चनें दूर होती हैं। हालांकि, भोलेनाथ जितने शीघ्र प्रसन्न होने वाले देव हैं, उनके अभिषेक के नियम भी उतने ही संवेदनशील और महत्वपूर्ण हैं। यदि अभिषेक के दौरान शास्त्रीय मर्यादाओं की अनदेखी हो जाए, तो पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।

शिवलिंग का अभिषेक करते समय कभी न करें ये 3 बड़ी गलतियां

शिवलिंग की पूजा करते समय अनजाने में होने वाली तीन ऐसी गलतियां हैं, जिनसे हर शिवभक्त को बचना चाहिए:

1. तांबे के लोटे से दूध का अभिषेक करना: यह सबसे सामान्य किंतु गंभीर भूल है जो कई श्रद्धालु कर बैठते हैं। आयुर्वेद और धर्मशास्त्र दोनों में तांबे के बर्तन में दूध, दही या किसी भी दुग्ध उत्पाद को डालना वर्जित माना गया है। तांबे के संपर्क में आते ही दूध रासायनिक क्रिया के कारण दूषित (विषैला) हो जाता है। शास्त्र कहते हैं कि भगवान शिव को हमेशा शुद्ध और सात्विक द्रव्य ही अर्पित करने चाहिए। इसलिए तांबे के लोटे से केवल शुद्ध जल का ही अभिषेक करना चाहिए, दूध या पंचामृत का कभी नहीं।

2. जलाधारी (निर्मली) को लांघना और परिक्रमा के नियम तोड़ना: शिवलिंग का अभिषेक करते समय ध्यान रखें कि शिवजी की पूरी परिक्रमा कभी नहीं की जाती। शिवलिंग की परिक्रमा हमेशा आधी यानी 'चंद्राकार' की जाती है। अभिषेक का जल जिस जलहरी (नाली) से होकर बाहर निकलता है, उसे 'निर्मली' या 'सोमसूत्र' कहा जाता है। इसे शक्ति का स्वरूप माना गया है और इसे लांघना शास्त्रों में महापाप की श्रेणी में रखा गया है। हमेशा बाईं ओर से परिक्रमा शुरू करें और जल निकासी के स्थान तक पहुंचकर वहीं से वापस मुड़ जाएं।

3. तुलसी, हल्दी, सिंदूर या केतकी के फूल अर्पित करना: अभिषेक के दौरान या उसके तुरंत बाद शिवलिंग पर कुछ वर्जित सामग्री चढ़ाने की गलती न करें:

हल्दी और सिंदूर: शिवलिंग पुरुष तत्व और वैराग्य का प्रतीक है, जबकि हल्दी व सिंदूर स्त्री सौंदर्य और विलास से जुड़े हैं। इसलिए शिवलिंग पर केवल सफेद या लाल चंदन, भस्म और अक्षत ही चढ़ाएं। (हल्दी-सिंदूर केवल माता पार्वती की पिंडी पर चढ़ाया जा सकता है)।

तुलसी दल: पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने तुलसी के पति शंखचूड़ का वध किया था, इसलिए शिवलिंग पर तुलसी चढ़ाना पूर्णतः वर्जित है।

केतकी या केवड़े का फूल: भगवान शिव ने एक बार ब्रह्मा जी के मिथ्या भाषण में साक्षी बनने के कारण केतकी के फूल को अपनी पूजा से निष्कासित कर दिया था।

जानिए किस पात्र से करें अभिषेक: धातु का चयन और उसका फल

शिवलिंग पर अभिषेक करते समय किस धातु के पात्र (लोटे) का उपयोग किया जा रहा है, इसका आध्यात्मिक प्रभाव सीधे पूजा के फल से जुड़ा होता है:

तांबे का लोटा (केवल जल के लिए सर्वोत्तम): तांबे के पात्र से केवल शुद्ध गंगाजल मिश्रित जल का अभिषेक करें। यह नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है और स्वास्थ्य में सुधार लाता है।

चांदी का पात्र (दूध और पंचामृत के लिए सर्वश्रेष्ठ): यदि आप शिवलिंग पर कच्चा दूध, पंचामृत या गन्ने का रस अर्पित कर रहे हैं, तो चांदी का लोटा सबसे उत्तम और पवित्र माना गया है। चांदी चंद्रमा की धातु है, जो मन को शांति और आर्थिक स्थिरता देती है।

पीतल या कांसे का लोटा: पीतल के पात्र से भी जल या पंचामृत का अभिषेक किया जा सकता है। यह गुरु ग्रह के प्रभाव को मजबूत करता है और मान-सम्मान बढ़ाता है।

स्टील, प्लास्टिक या लोहे का प्रयोग वर्जित: शिवलिंग अभिषेक के लिए प्लास्टिक, कांच, एल्युमिनियम या लोहे के बर्तनों का उपयोग कभी नहीं करना चाहिए। ये धातुएं अशुद्ध और नकारात्मक ऊर्जा संवाहक मानी जाती हैं।

भौम प्रदोष पर कर्ज मुक्ति के लिए विशेष अभिषेक विधि

भौम प्रदोष के दिन कर्ज से मुक्ति और भूमि-भवन के लाभ के लिए प्रदोष काल में तांबे के लोटे में शुद्ध जल लें और उसमें थोड़ा सा लाल चंदन, लाल कनेर का फूल और थोड़ा सा शहद मिला लें। इसके बाद ॐ भौमाय नमः और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करते हुए एक पतली धार से शिवलिंग का अभिषेक करें। इसके पश्चात भगवान शिव को 11 बेलपत्र अर्पित करें जिन पर लाल चंदन से 'राम' नाम लिखा हो। यह उपाय ऋण मुक्ति के मार्ग शीघ्र प्रशस्त करता है।