BREAKING:
October 03 2026 05:07 pm

आराधना मिश्रा को कमान, 'ब्राह्मण-दलित-मुस्लिम' बेस पर क्या 2027 में होगा कमाल?

Post

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस आलाकमान ने अपने सांगठनिक ढांचे में आमूलचूल बदलाव करते हुए एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। पार्टी ने प्रतापगढ़ की रामपुर खास सीट से लगातार तीसरी बार विधायक आराधना मिश्रा 'मोना' को उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस फेरबदल के जरिए पार्टी सीधे तौर पर अपने 80 के दशक वाले उस पारंपरिक वोटबैंक—ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम—को पुनर्जीवित करने की कोशिश करती दिख रही है, जो कभी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता का सबसे मजबूत आधार हुआ करता था।

2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने यूपी की 17 सीटों पर लड़कर 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर इंडिया गठबंधन का आंकड़ा 43 तक पहुंचा था। उस चुनाव में 'संविधान बचाओ' विमर्श के सहारे दलित मतदाताओं का एक बड़ा तबका कांग्रेस और गठबंधन के साथ जुड़ा था। उस सफलता से उत्साहित कांग्रेस ने अब चुनावी रण में उतरने से पहले अपने नेतृत्व के शीर्ष पदों पर इन तीनों वर्गों को सीधा प्रतिनिधित्व सौंप दिया है: प्रदेश प्रभारी के रूप में दलित चेहरा, प्रदेश अध्यक्ष के रूप में ब्राह्मण और कार्यकारी अध्यक्ष के पद पर मुस्लिम नेता।

जातियों का बड़ा गुलदस्ता: ओबीसी, निषाद और आधी आबादी को भी साधा

कांग्रेस नेतृत्व ने केवल सवर्ण और अल्पसंख्यक समीकरण तक ही खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि अन्य पिछड़े वर्गों (OBC) और गैर-यादव जातियों को जोड़ने के लिए भी सधी हुई नियुक्तियां की हैं। आराधना मिश्रा के अध्यक्ष बनने के बाद खाली हुए कांग्रेस विधानमंडल दल (CLP) के नेता पद की जिम्मेदारी पार्टी ने ओबीसी समुदाय से आने वाले विधायक वीरेंद्र चौधरी को सौंपी है।

इसके साथ ही संगठन में देवेंद्र निषाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाकर पूर्वांचल और तराई के निषाद (मल्लाह/केवट) समुदाय को सीधा राजनीतिक संदेश दिया गया है। वहीं आराधना मिश्रा के जरिए कांग्रेस ने 'आधी आबादी' यानी महिला मतदाताओं के बीच भी एक मजबूत वैधानिक और अनुभवी चेहरा पेश किया है। रीता बहुगुणा जोशी के बाद लगभग डेढ़ दशक में यह पहला मौका है जब किसी महिला नेता को यूपी कांग्रेस की कमान मिली है।

इमरान मसूद और राजेंद्र पाल गौतम: पश्चिमी यूपी में 'दलित-मुस्लिम' गठजोड़ की बिसात

सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने का सीधा लक्ष्य पश्चिमी उत्तर प्रदेश का चुनावी गणित है। पश्चिमी यूपी में मुस्लिम आबादी के साथ-साथ हिंदू मतदाताओं में सबसे बड़ा हिस्सा दलितों (विशेषकर जाटव बिरादरी) का है। पार्टी ने पहले ही दिल्ली के पूर्व मंत्री और जाटव समाज के प्रमुख नेता राजेंद्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया था।

अब इमरान मसूद को कार्यकारी कमान सौंपकर कांग्रेस ने पश्चिमी यूपी में दलित-मुस्लिम वोटों के साझा ध्रुवीकरण की मजबूत जमीन तैयार करने की कोशिश की है। 2024 के लोकसभा चुनाव और पिछले विधानसभा चुनावों में इंडिया गठबंधन के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश सबसे कठिन चुनौतियों में से एक रहा था। इस नई जोड़ी के जरिए पार्टी बहुजन समाज पार्टी (BSP) के पारंपरिक कैडर और अल्पसंख्यक वोटरों को एक मंच पर लाने का प्रयास करेगी।

आराधना मिश्रा पर क्यों जताया भरोसा: गांधी परिवार की करीबी और सपा से आसान समन्वय

राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रमोद तिवारी की बेटी आराधना मिश्रा 'मोना' न केवल एक मजबूत राजनीतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करती हैं, बल्कि पार्टी के भीतर उनका सियासी कद भी निर्विवाद रहा है। वे मोदी लहर के चरम दौर में भी रामपुर खास से लगातार तीन बार विधानसभा चुनाव जीतने में सफल रहीं। पार्टी नेतृत्व में उनकी स्वीकार्यता इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि वे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी दोनों के भरोसेमंद खेमे में पूरी तरह फिट बैठती हैं।

इसके अलावा, समाजवादी पार्टी (SP) के साथ 2027 के चुनाव में सीटों के तालमेल और समन्वय के लिहाज से भी आराधना मिश्रा की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। प्रमोद तिवारी परिवार के मुलायम सिंह यादव परिवार और अखिलेश यादव से दशकों पुराने सहज संबंध रहे हैं। ऐसे में गठबंधन की मेज पर जब सीटों के बंटवारे और चुनावी रणनीति की बात आएगी, तो आराधना मिश्रा के नेतृत्व में बातचीत का माहौल ज्यादा सुगम और सकारात्मक रहने की उम्मीद है।

अजय राय का योगदान और नए नेतृत्व के सामने 2027 की जमीनी चुनौतियां

कांग्रेस ने निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के कार्यकाल की खुलकर सराहना की है। अगस्त 2023 में कमान संभालने वाले अजय राय ने लगभग तीन वर्षों के कार्यकाल में विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कार्यकर्ताओं में सड़क पर उतरकर संघर्ष करने का जज्बा भरा था। 2024 के आम चुनाव में सपा के साथ केमिस्ट्री बनाने और पार्टी को 1 सीट से 6 सीटों पर पहुंचाने में उनकी आक्रामकता की बड़ी भूमिका रही। अजय राय ने भी फैसले का स्वागत करते हुए शीर्ष नेतृत्व का आभार जताया और नई टीम को शुभकामनाएं दीं।

पदभार संभालने के बाद आराधना मिश्रा ने स्पष्ट किया कि वे कांग्रेस की चौथी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और वरिष्ठों व कार्यकर्ताओं को साथ लेकर पूरी ऊर्जा से मैदान में उतरेंगी। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कागजों पर 'ब्राह्मण-दलित-मुस्लिम-ओबीसी' का यह गुलदस्ता बेहद संतुलित दिखता है, लेकिन इसे 2027 में वोट में तब्दील करना आसान नहीं होगा। उत्तर प्रदेश में बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की कमी, भाजपा का आक्रामक माइक्रो-मैनेजमेंट और सपा का पहले से मजबूत 'PDA' कैडर ऐसी जमीनी चुनौतियां हैं, जिनसे पार पाए बिना 80 के दशक वाले बेस वोटर की पूर्ण वापसी एक कठिन परीक्षा बनी रहेगी।