Angry with Trump, Lula takes a big step : अमेरिका से दूरी, अब ब्रिक्स नेताओं से बढ़ाएंगे हाथ
India News Live,Digital Desk : अमेरिका और ब्राज़ील के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों में काफ़ी तनाव है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्राज़ील से आयातित वस्तुओं पर 40 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ़ लगा दिया है, जिससे कुल टैरिफ़ 50 प्रतिशत हो गया है। इस कड़े कदम के जवाब में ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुईज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने ट्रंप से बातचीत करने से साफ़ इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि अब वह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत ब्रिक्स के अन्य नेताओं से बात करेंगे। इस बयान से पता चलता है कि ब्राज़ील अब वैश्विक स्तर पर अमेरिका से अलग होकर दूसरे देशों के साथ संबंध मज़बूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
अमेरिका ने ब्राज़ील पर 40 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है, जिससे दोनों देशों के बीच संबंध और तनावपूर्ण हो गए हैं। ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला ने ट्रंप से बात करने के बजाय, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित अन्य ब्रिक्स नेताओं से बात करने का फैसला किया है। लूला ने इस कदम को ब्राज़ील-अमेरिका संबंधों का सबसे बुरा दिन बताया है और कहा है कि वह विश्व व्यापार संगठन सहित हर संभव तरीके से अपने व्यापारिक हितों की रक्षा करेंगे। यह घटनाक्रम वैश्विक राजनीति में ब्रिक्स देशों के बढ़ते प्रभाव और बहुपक्षवाद के प्रति उनके झुकाव को दर्शाता है।
ब्राज़ील की कठोर प्रतिक्रिया
अमेरिका ने ब्राज़ील के आयात पर 40 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है, जिससे ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुईज़ इनासियो लूला दा सिल्वा नाराज़ हैं। उन्होंने इस कदम को "ब्राज़ील-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों का सबसे दुखद दिन" बताया। लूला, जिन्होंने ट्रंप से बात करने से साफ़ इनकार कर दिया, ने कहा, "अगर ट्रंप बात नहीं करना चाहते, तो मैं फ़ोन क्यों करूँ?" यह बयान अमेरिकी व्यापारिक दादागिरी के ख़िलाफ़ ब्राज़ील के कड़े रुख का संकेत देता है।
ब्रिक्स देशों की ओर झुकाव
इस तनावपूर्ण स्थिति में, लूला ने कहा कि अब वह चीन, भारत और अन्य ब्रिक्स देशों के नेताओं से संपर्क करेंगे। उन्होंने कहा, "मैं शी जिनपिंग से बात करूँगा, प्रधानमंत्री मोदी से बात करूँगा।" हालाँकि, उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से न मिल पाने का कारण यात्रा प्रतिबंधों को बताया। लूला के इस फैसले से साफ़ संकेत मिलता है कि ब्राज़ील अब वैश्विक व्यापार और राजनीति में अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय दूसरे विकल्पों की तलाश कर रहा है।
अमेरिकी टैरिफ और कानूनी विवाद
अमेरिका द्वारा ब्राज़ील पर टैरिफ लगाने के पीछे एक कारण ब्राज़ील द्वारा ब्रिक्स नीतियों का समर्थन है, जो अमेरिकी हितों के विरुद्ध हैं। इसके अलावा, ट्रम्प प्रशासन का ब्राज़ील की न्यायपालिका के साथ भी विवाद चल रहा है। ब्राज़ील के सर्वोच्च न्यायालय ने तख्तापलट की साजिश रचने के आरोप में पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो को नज़रबंद कर दिया है। अमेरिका ने इस फ़ैसले को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए न्यायाधीश एलेक्ज़ेंडर डी मोरेस पर मैग्निट्स्की अधिनियम के तहत प्रतिबंध लगाए हैं। डी मोरेस ने इस आरोप पर कहा है कि वह अपने कर्तव्यों का पालन करते रहेंगे।
यह पूरा घटनाक्रम दर्शाता है कि दुनिया में बहुपक्षीय व्यापारिक और राजनीतिक संबंध बन रहे हैं। ट्रंप की 'अमेरिका फ़र्स्ट' नीति के जवाब में ब्रिक्स जैसे संगठन सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। लूला का बयान वैश्विक शक्ति समीकरणों में बदलाव का एक मज़बूत प्रमाण है।