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September 26 2026 12:07 am

आलिया भट्ट के प्रोडक्शन की फिल्म OTT पर रिलीज, नई पीढ़ी के सुख-दुख का रोलर कोस्टर

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आलिया भट्ट और शाहीन भट्ट के प्रोडक्शन हाउस 'इटरनल सनशाइन प्रोडक्शंस' के बैनर तले बनी नई यूथ-सेंट्रिक रोम-कॉम फिल्म 'डोंट बी शाय' (Don't Be Shy) ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम वीडियो पर दस्तक दे चुकी है। कॉलेज लाइफ, महत्वाकांक्षा, सोशल स्टेटस के दिखावे और नई पीढ़ी के रिश्तों की पेचीदगियों के इर्द-गिर्द बुनी गई यह कहानी आज के दौर के युवाओं की प्राथमिकताओं और उनकी असुरक्षाओं को छूने का प्रयास करती है। 'ये जवानी है दीवानी' और 'ऐ दिल है मुश्किल' जैसी फिल्मों में सहायक निर्देशक के रूप में काम कर चुकीं श्रीति मुखर्जी ने इस फिल्म के निर्देशन और लेखन की कमान संभाली है।

क्या है 'डोंट बी शाय' की कहानी?

फिल्म की कहानी का केंद्र है 20 वर्षीय श्यामिली दास (आरुषी बजाज), जिसे कॉलेज में सभी 'शाय' नाम से पुकारते हैं। शाय एक महत्वाकांक्षी और जरूरत से ज्यादा योजनाएं बनाने वाली मध्यवर्गीय लड़की है, जो कॉलेज में खुद को एक अमीर और कुलीन परिवार से दिखाने का दिखावा करती है। उसने अपने पूरे जीवन की योजनाएं पहले ही तय कर रखी हैं—डिग्री लेना, अपने रईस बॉयफ्रेंड मयंक (पीयूष खाती) से 25 की उम्र में शादी करना और मयंक के पारिवारिक कारोबार का हिस्सा बनकर ऐशो-आराम की जिंदगी जीना।

शाय का यह बनावटी और नियंत्रित संसार तब बिखर जाता है जब मयंक अचानक अपने पारिवारिक बिजनेस को छोड़कर सिंगिंग में करियर बनाने का फैसला करता है। इस फैसले से नाराज शाय और मयंक का ब्रेकअप हो जाता है। चोट खाई शाय बदले की आग में मयंक को नीचा दिखाने की योजना बनाती है। इसी दौरान उसकी जिंदगी में मयंक की नई गर्लफ्रेंड तारा (बियांका अरोड़ा) और शाय का बचपन का सच्चा दोस्त ध्रुव (अंश दुग्गल) सामने आते हैं। पूर्व प्रेमिका और नई गर्लफ्रेंड के बीच प्रतिद्वंद्विता के बजाय एक अनूठी दोस्ती (सिस्टरहुड) पनपने लगती है। यह सफर शाय को यह अहसास कराता है कि असल जिंदगी योजना बोर्ड पर नहीं, बल्कि सच्चाई और आत्मस्वीकृति पर चलती है।

कलाकारों का अभिनय और ताजगी

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी नई और युवा स्टारकास्ट की ऊर्जा है। मुख्य भूमिका में नवोदित अभिनेत्री आरुषी बजाज ने एक कन्फ्यूज्ड, महत्वाकांक्षी और बनावटी चेहरे के पीछे छिपी असुरक्षित लड़की के किरदार को संजीदगी और सहज कॉमिक टाइमिंग के साथ निभाया है। बियांका अरोड़ा 'तारा' के रूप में स्क्रीन पर काफी सहज और प्रभावशाली लगती हैं; उन्होंने रूढ़िवादी 'मीन गर्ल' की छवि को तोड़ते हुए एक मददगार और समझदार सहेली के भाव को बहुत खूबसूरती से पेश किया है।

अंश दुग्गल ने 'ध्रुव' के संजीदा और शांत स्वभाव वाले किरदार में गहराई जोड़ी है, जबकि पीयूष खाती ने मयंक के रोल में अपनी छाप छोड़ी है। वहीं, फिल्ममेकर अनुराग बसु को शाय के खाने-पीने के शौकीन और दिलखुश पिता के रूप में देखना एक सुखद अनुभव है। कुणाल रॉय कपूर कॉलेज प्रोफेसर/काउंसलर के तौर पर अपनी मौजूदगी से चेहरे पर मुस्कान लाते हैं।

निर्देशन, संगीत और तकनीकी पहलू

श्रीति मुखर्जी का निर्देशन युवाओं की दुनिया को चमकदार विजुअल्स और वाइब्रेंट रंगों के जरिए पेश करता है। प्रथम मेहता की सिनेमैटोग्राफी कॉलेज कैंपस, फेस्ट और युवा लाइफस्टाइल को एक आकर्षक रूप देती है। राम संपत का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर हल्का-फुल्का और सुनने में सुखद है, जिसमें 'झूमो' और 'रे बावरी' जैसे ट्रैक माहौल के साथ तालमेल बिठाते हैं।

कहां चूकी फिल्म?

फिल्म की मुख्य कमजोरी इसकी अत्यधिक पूर्वानुमेय (प्रेडिक्टेबल) पटकथा और लंबा रनटाइम है। लगभग 2 घंटे 28 मिनट की यह फिल्म कई मौकों पर 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर', 'आयशा', और ओटीटी शोज 'नेवर हैव आई एवर' व 'द आर्चीज' की याद दिलाती है। मध्यांतर के बाद कहानी कई गैर-जरूरी सबप्लॉट्स में उलझ जाती है, जिससे मुख्य द्वंद्व की गति धीमी पड़ जाती है। भावनात्मक गहराई की जगह सतही ग्लैमर और सोशल मीडिया ट्रिक्स पर ज्यादा जोर दिया गया है, जिसके कारण किरदारों के अंतर्द्वंद्व दर्शकों को पूरी तरह झकझोर नहीं पाते।

कुल मिलाकर, 'डोंट बी शाय' एक हल्की-फुल्की, ऊर्जावान और मॉडर्न कमिंग-ऑफ-एज रोम-कॉम है, जिसे वीकेंड पर पॉपकॉर्न के साथ एक बार देखा जा सकता है। अगर आप कहानी में भारी-भरकम सस्पेंस या अनोखे ट्विस्ट की उम्मीद किए बिना केवल यंग वाइब्स और फ्रेश चेहरों की मस्ती देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी।