June 23 2026 02:23 pm

अखिलेश यादव ने संभाला पढ़ाई का जिम्मा, अग्निकांड की दिल दहला देने वाली तस्वीर हुई वायरल

Post

India News Live,Digital Desk : उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से आई एक भावुक कर देने वाली तस्वीर ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। जहाँ एक तरफ भीषण अग्निकांड में आशियाने जलकर खाक हो गए, वहीं दूसरी तरफ कक्षा 4 की छात्रा सावित्री ने हार नहीं मानी। राख के ढेर पर बैठकर अपनी अधजली कॉपियों पर लिखती हुई सावित्री की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई, जिसके बाद सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने बच्ची की शिक्षा का पूरा खर्च उठाने का बड़ा ऐलान किया है।

"जज़्बा हो तो पढ़ लेते हैं, बैठकर राख में"

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सावित्री की तस्वीर अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा करते हुए बेहद मार्मिक पंक्तियां लिखीं। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि वह उस "शिक्षा विरोधी सरकार" से मुआवजे की उम्मीद भी नहीं करेंगे। अखिलेश ने लिखा:

“जज़्बा हो तो वे पढ़ लेते हैं, बैठकर राख में, भले झुलस गई हों जिनकी किताबें आग में।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि वे निजी तौर पर सावित्री की आगे की पूरी पढ़ाई और व्यवस्था की जिम्मेदारी उठाएंगे, ताकि गरीबी और आपदा उसके सपनों के बीच न आ सके।

भीषण अग्निकांड की दास्तां: क्या हुआ था सरैंया चलाकापुर में?

सीतापुर के सदरपुर थाना क्षेत्र के सरैंया चलाकापुर गाँव में शनिवार की रात एक भयावह हादसा हुआ। तेज आंधी के दौरान खाना बनाते समय उठी चिंगारी ने विकराल रूप ले लिया और देखते ही देखते कई घरों को अपनी चपेट में ले लिया।

तीन मौतें: इस हादसे में झुलसकर इदुरा (75), फूलमती (55) और सात साल की मासूम माही की मौत हो गई।

भारी नुकसान: राजाराम, सत्रोहनलाल और वीरेश समेत करीब एक दर्जन ग्रामीणों के घर पूरी तरह जलकर राख हो गए। लाखों की संपत्ति नष्ट हो गई।

सावित्री की वो बहादुरी, जिसने सबका दिल जीत लिया

अग्निकांड के वक्त सावित्री का स्कूल बैग आग की भेंट चढ़ गया, लेकिन वह अपनी जान जोखिम में डालकर अपनी एक-दो कॉपियां और किताबें बचाने में सफल रही। रविवार की सुबह जब गाँव में मातम छाया था, सावित्री अपने जले हुए घर की राख पर बैठकर अपनी बची हुई कॉपी पर कुछ लिख रही थी। माँ संगीता जहाँ जले हुए आशियाने को निहार रही थीं, वहीं सावित्री की आँखों में भविष्य की उम्मीद साफ दिख रही थी।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा और मुआवजे की मांग

अखिलेश यादव के इस कदम के बाद स्थानीय प्रशासन और सरकार पर भी दबाव बढ़ गया है। हालांकि डीएम और तहसीलदार ने मौके का मुआयना किया है, लेकिन अखिलेश यादव का सीधा हस्तक्षेप सावित्री के लिए एक नई किरण बनकर आया है। ग्रामीणों का कहना है कि सावित्री की यह हिम्मत उन सभी के लिए प्रेरणा है जिन्होंने इस आग में अपना सब कुछ खो दिया है।