राम मंदिर में अब तैनात होंगे डिप्टी CEO, एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र के साथ संभालेंगे कमान
अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए उमड़ रहे लाखों श्रद्धालुओं के सैलाब और दिन-प्रतिदिन बढ़ते प्रशासनिक व वित्तीय दायित्वों को सुचारू रूप से संभालने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने संगठनात्मक ढांचे के विस्तार का एक और बड़ा नीतिगत फैसला लिया है। भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र को ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त करने के ठीक बाद अब मंदिर प्रशासन में डिप्टी सीईओ (उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी) और जॉइंट सीईओ के नए पद सृजित किए जा रहे हैं। ट्रस्ट के नए नियमित महासचिव नियुक्त किए गए स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने स्पष्ट किया है कि मंदिर के बढ़ते आकार, बहुस्तरीय सुरक्षा, विशाल वित्तीय प्रवाह और तकनीक-सक्षम व्यवस्था को संभालने के लिए सीईओ की सहायता हेतु एक अत्यंत कुशल प्रशासनिक कोर टीम बनाई जा रही है। इस टीम में डिप्टी सीईओ की भूमिका बेहद अहम होगी, जिसके चयन का पारदर्शी और कड़ा पैमाना तय कर दिया गया है।
राम मंदिर ट्रस्ट में अब होंगे डिप्टी सीईओ: एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र की मदद के लिए बनेगा 'स्पेशल अमला'
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नवनियुक्त महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठकों के बाद औपचारिक रूप से जानकारी दी कि राम मंदिर का दैनिक संचालन अब किसी सामान्य धार्मिक स्थल जैसा नहीं रह गया है। प्रतिदिन एक से दो लाख श्रद्धालुओं का आगमन, वीआईपी और वीवीआईपी प्रोटोकॉल, गर्भगृह से लेकर परकोटा तक की बहुस्तरीय सुरक्षा, दान पेटियों की सतत डिजिटल निगरानी और परिसर में चल रहे शेष निर्माण कार्यों के समन्वय के लिए अकेले एक अधिकारी का होना व्यावहारिक रूप से पर्याप्त नहीं है।
यही कारण है कि ट्रस्ट ने यह सैद्धांतिक फैसला लिया है कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी एयर मार्शल (रिटा.) जीतेंद्र मिश्र के अधीन एक सुदृढ़ और पेशेवर सचिवालय काम करेगा। इस सचिवालय के केंद्र में डिप्टी सीईओ या जॉइंट सीईओ का पद होगा, जो सीईओ के सीधे निर्देशन में दैनिक प्रशासनिक, वित्तीय और जन-सुविधाओं से जुड़ी शाखाओं का नेतृत्व करेंगे। नए महासचिव ने बताया कि डिप्टी सीईओ मंदिर परिसर के विभिन्न विभागों के बीच एक मजबूत सेतु का काम करेंगे, जिससे किसी भी प्रशासनिक निर्णय को जमीन पर लागू करने में अनावश्यक देरी न हो और मंदिर प्रबंधन चौबीसों घंटे बिना किसी गतिरोध के चलता रहे।
नए महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि का बड़ा खुलासा: कैसे और किस आधार पर होगा डिप्टी सीईओ का चयन?
डिप्टी सीईओ की नियुक्ति की प्रक्रिया पर विस्तार से रोशनी डालते हुए स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने बताया कि ट्रस्ट ने इसके लिए किसी नए सिरे से लंबी भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के बजाय पहले से मौजूद अत्यंत समृद्ध डेटाबेस का उपयोग करने का निर्णय लिया है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद के लिए देश भर से 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस प्रमोद कोहली, परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावरे और सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकान्त चतुर्वेदी की तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय सर्च कमेटी ने इन आवेदनों की 600 अंकों की जटिल मूल्यांकन प्रणाली के आधार पर सूक्ष्म जांच की थी।
इस मूल्यांकन में 470 से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 108 शीर्ष उम्मीदवारों के साथ ऑनलाइन साक्षात्कार आयोजित किए गए थे, जिनमें से 16 दिग्गजों को अयोध्या बुलाकर आमने-सामने अंतिम साक्षात्कार लिया गया था। स्वामी गोविंद देव गिरि ने स्पष्ट किया कि डिप्टी सीईओ और प्रशासनिक अधिकारियों का चयन इसी शॉर्टलिस्ट किए गए विशिष्ट पैनल में से किया जाएगा। इस सूची में देश के शीर्ष सेवानिवृत्त आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS), राज्य सिविल सेवा (PCS) के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, सेना के पूर्व उच्चाधिकारी और बड़े औद्योगिक घरानों व संस्थानों का संचालन कर चुके अनुभवी पेशेवर शामिल हैं। ट्रस्ट और नए सीईओ एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र मिलकर इन योग्य अधिकारियों के प्रशासनिक अनुभव, संकट प्रबंधन की क्षमता, तकनीकी दक्षता और ट्रैक रिकॉर्ड की समीक्षा करेंगे, जिसके आधार पर डिप्टी सीईओ के नाम पर अंतिम मुहर लगाई जाएगी।
चयन में राष्ट्रवाद, निष्पक्ष छवि और सख्त अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता
स्वामी गोविंद देव गिरि ने जोर देकर कहा कि राम मंदिर के किसी भी शीर्ष प्रशासनिक पद पर नियुक्ति के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता या डिग्री ही पर्याप्त नहीं है। चयन के लिए सबसे बुनियादी शर्त उम्मीदवार की पूर्ण निष्पक्षता, बेदाग छवि, राष्ट्रभक्ति की भावना और सनातन आस्था व परंपराओं के प्रति गहरी समझ और सम्मान है। ट्रस्ट ने यह नीति बनाई है कि ऐसे अधिकारियों को तरजीह दी जाए जिनका अयोध्या में पहले से कोई स्थानीय राजनीतिक या व्यावसायिक हित न जुड़ा हो, ताकि वे बिना किसी दबाव या पक्षपात के निष्पक्ष होकर अपनी सेवाएं दे सकें।
डिप्टी सीईओ और उनकी टीम के लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जा रही है। इस एसओपी में डिप्टी सीईओ के अधिकार, कर्तव्य, जवाबदेही और सेवा शर्तें स्पष्ट रूप से लिपिबद्ध होंगी। स्वामी गोविंद देव गिरि ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रस्ट परिचालन लागत (ऑपरेशनल कॉस्ट) को पूरी तरह नियंत्रित रखेगा। प्रशासनिक खर्चों को कम से कम रखते हुए अधिकतम कार्यकुशलता प्राप्त करना इस व्यवस्था का मूल मंत्र होगा, जिससे श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए धन का एक-एक पैसा केवल मंदिर के विकास, लोक-कल्याण और धार्मिक कार्यों में ही खर्च हो सके।
'स्पेशल-7' कोर टीम और कार्यक्षेत्र का विभाजन: सुरक्षा, वित्त और श्रद्धालु प्रबंधन की अलग-अलग कमान
डिप्टी सीईओ के नेतृत्व में जो प्रशासनिक ढांचा आकार ले रहा है, उसे ट्रस्ट के गलियारों में 'स्पेशल-7' कोर टीम के रूप में भी देखा जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत राम मंदिर के पूरे प्रबंधन को सात प्रमुख कार्यक्षेत्रों में विभाजित किया जाएगा, जिनकी सीधी मॉनिटरिंग डिप्टी सीईओ करेंगे और अंतिम रिपोर्टिंग सीईओ एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र को होगी:
चढ़ावा एवं वित्तीय निगरानी: दान पेटियों से नकदी निकालने, अत्याधुनिक स्वचालित मशीनों द्वारा गिनती, बैंकों में तत्काल सुरक्षित ट्रांसफर और दिन-प्रतिदिन के ऑडिट की ऐसी प्रणाली जिसमें मानवीय हस्तक्षेप शून्य हो।
तीर्थयात्री सुविधा व भीड़ नियंत्रण: भीषण गर्मी, सर्दी या त्योहारों पर उमड़ने वाली लाखों की भीड़ को बिना किसी असुविधा के सुगम दर्शन कराना, व्हीलचेयर, पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा और विश्राम गृहों का संचालन।
सुरक्षा व सर्विलांस समन्वय: केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल (यूपीएसएसएफ), नागरिक पुलिस और निजी सुरक्षा एजेंसियों के साथ 24 घंटे रियल-टाइम तालमेल।
परिसर अधोसंरचना व मेंटेनेंस: बिजली आपूर्ति, सौर ऊर्जा संयंत्र, सीवेज शोधन संयंत्र (एसटीपी), एयर कंडीशनिंग और मंदिर की ऐतिहासिक पत्थरों की सफाई व रखरखाव।
धार्मिक अनुष्ठान व दर्शन व्यवस्था: गर्भगृह में पुजारियों, आरती, भोग, प्रसाद वितरण और धार्मिक उत्सवों के निर्बाध आयोजन का समय प्रबंधन।
डिजिटल व सूचना प्रौद्योगिकी: बायोमेट्रिक एक्सेस, ऑनलाइन दर्शन पास, एआई-आधारित सीसीटीवी सर्विलांस और ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट का संचालन।
विधिक एवं जनसंपर्क विंग: सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालय और विभिन्न सरकारी विभागों के साथ कानूनी समन्वय और मीडिया को आधिकारिक व तथ्यपरक सूचनाएं प्रदान करना।
दान चोरी विवाद के बाद जीरो टॉलरेंस: सैन्य अनुशासन के साथ कॉरपोरेट ट्रांसपेरेंसी
राम मंदिर ट्रस्ट का यह अभूतपूर्व प्रशासनिक बदलाव हाल ही में दान पेटियों से नकदी चोरी के लगे आरोपों, एसआईटी जांच और पूर्व महासचिव चंपत राय व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे की पृष्ठभूमि में हो रहा है। यद्यपि ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसआईटी जांच का दायरा बढ़ाए जाने के निर्णय का खुला स्वागत किया है, लेकिन अंदरूनी तौर पर यह संकल्प लिया गया है कि भविष्य में किसी भी वित्तीय या प्रशासनिक लापरवाही की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त कर दी जाए।
स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि पूर्व कार्यवाहक महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन ने संकट के दौर में ट्रस्ट का कुशलता से मार्गदर्शन किया और अब नियमित महासचिव के तौर पर वे स्वयं यह सुनिश्चित करेंगे कि पूरी व्यवस्था पारदर्शी हो। मंदिर में कॉरपोरेट गवर्नेंस की वित्तीय जवाबदेही और भारतीय सेना के उच्च कोटि के अनुशासन का ऐसा अनूठा संगम स्थापित किया जा रहा है, जिससे राम मंदिर का प्रबंधन पूरे विश्व के धार्मिक संस्थानों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बन सके। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और आईआईटी के तकनीकी विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर कैश काउंटिंग और लॉजिस्टिक्स को पूरी तरह कंप्यूटरीकृत किया जा रहा है।
नए ट्रस्टियों का आगमन और अयोध्या को 'विश्व की सांस्कृतिक राजधानी' बनाने का महासंकल्प
ट्रस्ट की इस ऐतिहासिक बैठक में केवल प्रशासनिक फेरबदल ही नहीं हुआ, बल्कि संचालन मंडल का भी विस्तार किया गया है। रामलला की ओर से दशकों तक अदालती लड़ाई लड़ने वाले अयोध्या के प्रख्यात अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय, दिल्ली के प्रमुख उद्योगपति महेश भागचंदका (जिन्हें नया कोषाध्यक्ष भी बनाया गया है) और शिकोहाबाद की वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. निर्मला यादव को नए ट्रस्टी के रूप में शामिल किया गया है। डॉ. निर्मला यादव के शामिल होने से ट्रस्ट में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को भी मजबूती मिली है।
महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि ने अपने संदेश के अंत में अयोध्या के भविष्य के विजन को रेखांकित करते हुए कहा, "हमारा अंतिम लक्ष्य प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या को विश्व की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए ट्रस्ट संसाधनों, अनुशासन और पारदर्शिता में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगा।" उन्होंने जानकारी दी कि मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्य आगामी 30 सितंबर तक अपने अंतिम चरण में पहुंच जाएंगे और 30 अक्टूबर तक निर्माण एजेंसियां परिसर खाली कर देंगी। इसके बाद मंदिर का संपूर्ण आंतरिक और बाह्य प्रबंधन नवगठित प्रशासनिक विंग, सीईओ और डिप्टी सीईओ की निगरानी में पूरी तरह स्वतंत्र रूप से काम करने लगेगा।