2025: जब भारत की संस्कृति ने दुनिया का ध्यान खींचा, परंपरा से कूटनीति तक बना स्वर्णिम वर्ष

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India News Live,Digital Desk : साल 2025 भारत की सांस्कृतिक यात्रा में एक खास मुकाम बनकर उभरा। यह साल केवल उत्सवों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत की प्राचीन परंपराओं, विरासत और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर मजबूती से स्थापित करने का वर्ष भी रहा। प्रयागराज महाकुंभ से लेकर यूनेस्को की मान्यता तक, संस्कृति मंत्रालय के लिए 2025 उपलब्धियों से भरा रहा।

महाकुंभ 2025 और कलाग्राम: संस्कृति का जीवंत अनुभव

जनवरी-फरवरी में प्रयागराज महाकुंभ के दौरान बने विशाल तंबू शहर में ‘कलाग्राम’ आकर्षण का केंद्र रहा। करीब 10.24 एकड़ में फैले इस सांस्कृतिक परिसर को एक संवेदी यात्रा की तरह तैयार किया गया था, जहां भारत की मूर्त और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत एक साथ देखने को मिली।

कलाग्राम में लोककला, शिल्प, संगीत, नृत्य और पारंपरिक जीवनशैली की झलक ने देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भारत की सांस्कृतिक गहराई से जोड़ा। इस अवसर को यादगार बनाने के लिए देशभर के कई केंद्रीय संरक्षित स्मारकों पर महाकुंभ का लोगो भी प्रदर्शित किया गया।

वंदे मातरम के 150 वर्ष: राष्ट्रीय भावना का उत्सव

नवंबर 2025 में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर साल भर चलने वाले समारोहों की शुरुआत की गई। इसी क्रम में भोपाल में अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती का आयोजन हुआ, जबकि देशभर में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती भी पूरे सम्मान के साथ मनाई गई।

यूनेस्को से भारत को मिली दो बड़ी उपलब्धियां

2025 भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बेहद खास रहा।

जुलाई में पेरिस में आयोजित यूनेस्को विश्व धरोहर समिति के 47वें सत्र में ‘भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य’ को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।

इसके बाद 10 दिसंबर को दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में जगह मिली। यह भारत की ऐसी 16वीं परंपरा बनी जिसे यह वैश्विक सम्मान मिला।

दिसंबर में ही अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से जुड़ी अंतरसरकारी समिति का 20वां सत्र दिल्ली के लाल किले में आयोजित किया गया, जो खुद एक विश्व धरोहर स्थल है।

ज्ञान भारतम: हस्तलिखित धरोहर को डिजिटल पहचान

सितंबर 2025 में संस्कृति मंत्रालय की एक ऐतिहासिक पहल के रूप में ‘ज्ञान भारतम’ पोर्टल लॉन्च किया गया। 12 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पोर्टल का शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य भारत की दुर्लभ हस्तलिखित धरोहरों को संरक्षित करना, डिजिटाइज करना और दुनिया तक पहुंचाना है। यह पहल ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के अनुरूप मानी जा रही है।

सांस्कृतिक कूटनीति को मिली नई मजबूती

नवंबर में राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली में संरक्षित बुद्ध अवशेषों का एक हिस्सा भूटान की राजधानी थिम्फू में 17 दिनों की सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए भेजा गया। अब 2026 की शुरुआत में सरकार श्रीलंका के कोलंबो में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी आयोजित करने की योजना बना रही है, जिससे भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को और मजबूती मिलेगी।

2026 की ओर उम्मीदें

2025 ने यह साफ कर दिया कि भारत अपनी संस्कृति को केवल संजो ही नहीं रहा, बल्कि उसे आधुनिक तकनीक, वैश्विक मंच और अंतरराष्ट्रीय संवाद से जोड़कर आगे भी बढ़ा रहा है। आने वाला साल 2026 भी इसी सांस्कृतिक निरंतरता को आगे ले जाने वाला माना जा रहा है।