Yastika Bhatia Lords Test Century: ऐतिहासिक लॉर्ड्स में शतक जड़ने वाली पहली महिला क्रिकेटर बनीं यास्तिका भाटिया
क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले प्रतिष्ठित लॉर्ड्स स्टेडियम के मैदान पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विकेटकीपर बल्लेबाज यास्तिका भाटिया ने इतिहास रच दिया है। यास्तिका लॉर्ड्स के मैदान पर टेस्ट शतक लगाने वाली दुनिया की पहली महिला क्रिकेटर बन गई हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल करने के बाद यास्तिका ने बेहद आत्मविश्वास से भरा बयान देते हुए कहा कि उनका ‘‘सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन आना अभी बाकी है.’’
यास्तिका भाटिया ने इंग्लैंड के खिलाफ खेले जा रहे एकमात्र टेस्ट मैच में शानदार बल्लेबाजी करते हुए महज 158 गेंदों पर 113 रनों की यादगार शतकीय पारी खेली। उनकी इस बेहतरीन पारी के दम पर भारतीय टीम ने मैच के तीसरे दिन चायकाल के ठीक पहले अपनी दूसरी पारी घोषित की और मेजबान इंग्लैंड के सामने जीत के लिए 457 रनों का विशालकाय लक्ष्य रखा।
सम्मान बोर्ड (Honours Board) पर नाम आने को बताया अविश्वसनीय
तीसरे दिन के खेल की समाप्ति के बाद यास्तिका भाटिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, ‘‘लॉर्ड्स में शतक बनाने वाली पहली महिला क्रिकेटर बनना मेरे लिए पूरी तरह से अविश्वसनीय है। छह महीने पहले मैं इससे बिल्कुल विपरीत और मुश्किल स्थिति से गुजर रही थी। अगर उस वक्त मुझसे किसी ने कहा होता कि मेरा नाम लॉर्ड्स के प्रतिष्ठित ऑनर्स बोर्ड पर लिखा जाएगा, तो शायद मैं उस पर कभी विश्वास नहीं करती.’’
यास्तिका ने अपने भविष्य के इरादों को साफ करते हुए आगे कहा, ‘‘अभी तो इससे भी बेहतर प्रदर्शन करना बाकी है। मैं शुरू से ही खुद में यह विश्वास रखती आई हूं कि मैं पहले से और बेहतर कर सकती हूं। यह तो सिर्फ एक शुरुआत है, आगे बहुत कुछ आना बाकी है और मैं उसका बेसब्री से इंतजार कर रही हूं.’’
घुटने की गंभीर सर्जरी और विश्व कप छूटने का दर्द
यास्तिका के लिए यह ऐतिहासिक शतक इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि पिछले साल अक्टूबर में उनके बाएं घुटने में गंभीर चोट लग गई थी। इस चोट के कारण उन्हें मेजर सर्जरी करानी पड़ी, जिसके चलते वह भारत में ही खेले गए वनडे विश्व कप का हिस्सा नहीं बन पाई थीं, जिसे टीम इंडिया ने जीता था।
अपनी इस शानदार वापसी का पूरा श्रेय यास्तिका ने अपने परिवार और सपोर्ट स्टाफ को दिया। उन्होंने भावुक होकर कहा, ‘‘इस सफलता के पीछे पर्दे के पीछे काम करने वाले बहुत से लोग हैं। मेरा परिवार, मेरे माता-पिता और मेरी बहन मेरे सबसे बड़े पिलर रहे हैं। मेरे कोच, टीम के सहयोगी स्टाफ और टीम के साथियों ने मेरा पूरा साथ दिया। इसके अलावा बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) के सदस्यों ने रिहैब के दौरान मेरी बहुत मदद की, जिनके बिना यह मुकाम पाना नामुमकिन था.’’
खेल के प्रति जुनून और खुद पर अटूट विश्वास
चोट के उस मुश्किल दौर को याद करते हुए यास्तिका ने बताया कि खेल के प्रति उनके अटूट प्यार ने उन्हें हमेशा पॉजिटिव बनाए रखा। उन्होंने कहा, ‘‘सर्जरी होने के बाद मुझे हर चीज बिल्कुल नए सिरे से शुरू करनी पड़ी थी। डॉक्टरों ने मुझे दो महीने तक पूरी तरह बेड रेस्ट की सलाह दी थी। लेकिन मुझे खुद पर पूरा भरोसा था कि मैं इस दर्द से उबरकर मैदान पर दोबारा धमाकेदार वापसी करूंगी। जीवन में चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं, अपने खेल के प्रति जुनून और खुद पर विश्वास बनाए रखना सबसे जरूरी होता है.’’
यास्तिका ने अपनी पारी की रणनीति पर बात करते हुए अंत में कहा, ‘‘ईमानदारी से कहूं तो मैदान पर उतरते समय मैंने शतक बनाने के बारे में बिल्कुल नहीं सोचा था। मेरा पूरा ध्यान सिर्फ अच्छी रन-रेट के साथ एक बड़ा स्कोर खड़ा करने पर था, ताकि हमारी टीम को इंग्लैंड के सभी 10 विकेट चटकाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। मेरे दिमाग में बस यही योजना थी क्योंकि देश के लिए खेलना मेरे लिए सबसे बड़े गर्व की बात है.’’