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October 03 2026 02:35 pm

इस बार 9 या 10 कितने दिनों की होगी नवरात्रि? जानें किस तिथि की वृद्धि से बन रहा है महासंयोग

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सनातन धर्म में शक्ति साधना का महापर्व शारदीय नवरात्रि हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होता है। मां दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों की आराधना का यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि पंचांगीय गणनाओं के लिहाज से भी अत्यंत विशिष्ट माना जाता है। हर वर्ष की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं और ज्योतिष प्रेमियों के मन में यह सवाल सबसे प्रमुख है कि इस बार नवरात्रि पूरे नौ दिनों की होगी, किसी तिथि का क्षय होने से आठ दिनों की रहेगी, अथवा तिथि वृद्धि के कारण पूरे दस दिनों तक मां भगवती का उत्सव मनाया जाएगा। वैदिक पंचांग के अनुसार जब भी किसी तिथि का विस्तार दो सूर्योदयों तक बना रहता है, तो उस तिथि की 'वृद्धि' मानी जाती है, जिससे नवरात्रि के दिनों में बदलाव आता है।

इस बार 9 या 10 कितने दिनों की होगी शारदीय नवरात्रि?

वैदिक ज्योतिष और पंचांगीय गणित के अनुसार तिथियों की गणना सूर्योदय की स्थिति यानी उदयातिथि के आधार पर की जाती है। जब कोई तिथि एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय के बाद तक बनी रहती है, तो वह तिथि दो दिनों तक मान्य हो जाती है। इसे ज्योतिष शास्त्र में 'तिथि वृद्धि' कहा जाता है। इस बार आश्विन शुक्ल पक्ष में एक विशेष तिथि दो दिनों तक प्रभावी रहने के कारण नवरात्रि का पर्व 9 नहीं बल्कि पूरे 10 दिनों का होने जा रहा है। शास्त्रों में नवरात्रि के दिनों की संख्या बढ़ना बेहद शुभ, मंगलकारी और समृद्धिदायक माना गया है। इससे मां दुर्गा के भक्तों को उपासना, व्रत, जप और अनुष्ठान के लिए एक अतिरिक्त दिन का पुण्य अवसर प्राप्त होता है।

कौन सी तिथि में हो रही है वृद्धि: जानिए पंचांगीय गणना

पंचांग के विश्लेषण के अनुसार इस बार नवरात्रि के मध्य काल में तृतीया तिथि (मां चंद्रघंटा की पूजा का दिन) की वृद्धि हो रही है। तृतीया तिथि का आरंभ पहले दिन दोपहर या सायंकाल में होकर अगले पूरे दिन और उसके अगले दिन के सूर्योदय तक बना रहेगा। इसके चलते तृतीया तिथि का व्रत और मां चंद्रघंटा की पूजा लगातार दो दिनों तक संपन्न की जाएगी। तृतीया तिथि के दो दिन रहने से चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी और नवमी की तिथियां एक दिन आगे बढ़ेंगी। इस दुर्लभ खगोलीय स्थिति के कारण कलश स्थापना से लेकर महानवमी तक का पूरा कालखंड दस दिनों में विस्तृत हो गया है, जिसके उपरांत दशमी तिथि पर विजयादशमी यानी दशहरा का पर्व मनाया जाएगा।

तिथि वृद्धि का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

ज्योतिष ग्रंथों जैसे 'निर्णय सिंधु' और 'धर्म सिंधु' में तिथि वृद्धि को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। जब नवरात्रि में किसी तिथि का क्षय होता है (यानी आठ दिन की नवरात्रि होती है), तो उसे राष्ट्र और समाज के लिए उथल-पुथल का संकेत माना जाता है। इसके विपरीत, जब नवरात्रि 9 दिनों से बढ़कर 10 दिनों की होती है, तो इसे अत्यंत कल्याणकारी, धन-धान्य में वृद्धि करने वाला और शांतिदायक माना गया है। तृतीया तिथि का दोहरा प्रभाव साहस, पराक्रम, मानसिक शांति और वैवाहिक सुख में वृद्धि करने वाला माना जाता है, क्योंकि मां चंद्रघंटा शांति और कल्याण की देवी हैं।

घटस्थापना से लेकर विजयादशमी तक की 10 दिवसीय तिथिवार रूपरेखा

इस बार के दस दिवसीय शक्ति महापर्व की तिथियां और देवी स्वरूपों की उपासना का क्रम इस प्रकार रहेगा:

प्रथम दिन: प्रतिपदा तिथि - घटस्थापना एवं मां शैलपुत्री की पूजा

दूसरा दिन: द्वितीया तिथि - मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

तीसरा दिन: तृतीया तिथि (प्रथम दिवस) - मां चंद्रघंटा की विशेष आराधना

चौथा दिन: तृतीया तिथि (वृद्धि दिवस) - मां चंद्रघंटा की पुनः उपासना व अनुष्ठान

पांचवां दिन: चतुर्थी तिथि - मां कुष्मांडा की पूजा

छठा दिन: पंचमी तिथि - मां स्कंदमाता की पूजा

सातवां दिन: षष्ठी तिथि - मां कात्यायनी की पूजा

आठवां दिन: सप्तमी तिथि - मां कालरात्रि की पूजा (सरस्वती आवाहन)

नौवां दिन: अष्टमी तिथि - महागौरी पूजन एवं महाअष्टमी कन्या पूजन

दसवां दिन: नवमी तिथि - मां सिद्धिदात्री पूजन, महानवमी हवन एवं कन्या भोज

अगला दिन: दशमी तिथि - नवरात्रि व्रत पारण, दुर्गा प्रतिमा विसर्जन और विजयादशमी (दशहरा)

10 दिनों की नवरात्रि में कैसे करें विशेष साधना

इस बार नवरात्रि की अवधि लंबी होने के कारण साधकों को दुर्गा सप्तशती के नित्य पाठ, नवार्ण मंत्र जप और अखंड ज्योति की साधना का पूर्ण फल प्राप्त होगा। तृतीया तिथि के विस्तार के कारण मां चंद्रघंटा को दूध से बनी मिठाइयों और केसर की खीर का भोग दो दिन लगातार लगाना अत्यंत शुभ रहेगा। अष्टमी और नवमी के दिन विधिपूर्वक कन्या पूजन कर उन्हें उपहार, फल और भोजन अर्पित करने से घर में मां अन्नपूर्णा और मां लक्ष्मी का स्थाई वास बना रहता है।