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September 26 2026 09:40 am

गोविंदा को दोबारा स्वीकार करने और माफ करने पर छलका पत्नी सुनीता का दर्द: बोलीं- मेरी डिक्शनरी में माफी शब्द नहीं

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हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता गोविंदा और उनकी पत्नी सुनीता आहूजा के पारिवारिक विवाद में हर दिन नए और चौंकाने वाले मोड़ सामने आ रहे हैं। लालबागचा राजा के पंडाल में गोविंदा का अपनी को-स्टार कोमल रानी स्वर्णकार के साथ दर्शन करना और फिर मुंबई एयरपोर्ट पर सुनीता का इंसानों को 'धोखेबाज' बताना पहले से ही चर्चा में बना हुआ था। अब सुनीता आहूजा ने अपने हालिया पॉडकास्ट में अपनी 39 साल पुरानी शादी, प्यार, अलगाव और पति को दोबारा माफ करने के सवाल पर ऐसा बेबाक बयान दिया है, जिसने बॉलीवुड से लेकर सोशल मीडिया तक खलबली मचा दी है। जब उनसे सीधा सवाल किया गया कि क्या वे कभी गोविंदा को माफ कर पाएंगी और उन्हें अपनी जिंदगी में वापस आने देंगी, तो सुनीता ने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि 'माफी' शब्द उनकी डिक्शनरी में मौजूद ही नहीं है।

सुनीता ने अपने दिल की बात बयां करते हुए कहा कि उन्होंने गोविंदा से उस दौर में बेपनाह मोहब्बत की थी, जब उनके पास न तो स्टारडम था, न पैसा और न ही नाम। उन्होंने अपने पिता की मर्जी के खिलाफ जाकर यह शादी की थी और उन्हें अपने उस फैसले पर आज भी कोई पछतावा नहीं है। हालांकि, बदलते वक्त और रिश्तों में आए कड़वे अनुभवों ने उन्हें यह समझा दिया है कि आत्मसम्मान की कीमत पर कोई भी रिश्ता नहीं टिक सकता।

गोविंदा से शादी का पछतावा नहीं, पिता के न आने पर भी की थी शादी

पॉडकास्ट में अपने रिश्ते के शुरुआती दिनों को याद करते हुए सुनीता आहूजा ने बताया कि उनका और गोविंदा का प्यार कोई दिखावा नहीं था। उन्होंने कहा, "मैं उनसे बहुत प्यार करती थी, और कहते हैं न कि प्यार अंधा होता है। मैं एक बहुत बड़े और संपन्न परिवार से ताल्लुक रखती थी, जबकि गोविंदा उस समय साधारण पृष्ठभूमि से थे और संघर्ष कर रहे थे। मेरे पिता इस शादी के सख्त खिलाफ थे और वे मेरी शादी में शामिल तक नहीं हुए थे। लेकिन मैंने अपने पिता से साफ कह दिया था कि अगर आप नहीं आना चाहते तो मत आइए, मैं गोविंदा से ही शादी करूंगी क्योंकि मुझे उन पर पूरा भरोसा था। जब मैं उनसे मिली थी, तो वे एक बेहद सरल, ईमानदार और सच्चे इंसान थे। मुझे उनसे शादी करने का आज भी कोई अफसोस या पछतावा नहीं है।"

सुनीता ने कहा कि आज भी उनके दिल के किसी कोने में वो पुराने जज्बात जिंदा हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "जब उनके पास कुछ भी नहीं था, तब भी मैंने उन्हें चाहा था। मेरे मन में आज भी वो सम्मान और भावनाएं हैं। मुझे नहीं पता कि उनके दिल में मेरे लिए वही भावनाएं बची हैं या नहीं, लेकिन मेरी नीयत हमेशा साफ रही है।"

'मैं नारियल जैसी हूं- बाहर से सख्त, अंदर से बहुत नरम और भावुक'

अक्सर मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर अपनी बेबाकी और तीखे तेवरों के लिए जानी जाने वाली सुनीता ने अपनी छवि पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि लोगों को लगता है कि वे बहुत जिद्दी, अड़ियल, कठोर और बेपरवाह महिला हैं, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।

सुनीता ने कहा, "लोग सोचते हैं कि मैं बहुत सख्त और मुंहफट हूं। लेकिन असल में मैं जो कुछ भी कहती हूं, अपने दिल से कहती हूं। मुझे चापलूसी या दोगलापन करना नहीं आता। बहुत कम लोग हैं जो मेरी असलियत को समझ पाते हैं। मैं एक नारियल की तरह हूं—बाहर से बेहद सख्त और सख्त खोल वाली, लेकिन अंदर से पूरी तरह नरम, संवेदनशील और भावुक। मैंने जिंदगी में बहुत दर्द सहा है, और वही दर्द कभी-कभी मेरी बातों में तीखेपन के रूप में बाहर आ जाता है।"

'माफी शब्द मेरी डिक्शनरी में नहीं, आप जो चाहें करें और फिर माफी मांगें?'

इंटरव्यू के दौरान जब एंकर ने सीधा और सबसे संवेदनशील सवाल दागा कि अगर गोविंदा अपनी गलतियों को सुधारकर वापस आना चाहें, तो क्या वे उन्हें माफ कर देंगी और अपनाएंगी? इस पर सुनीता का चेहरा गंभीर हो गया। उन्होंने बिना लाग-लपेट के कहा, "मैं इस पर कोई औपचारिक टिप्पणी नहीं करना चाहती, लेकिन एक बात साफ कर दूं कि मैं इतनी आसानी से माफ करने वाली इंसान नहीं हूं। 'माफी' शब्द मेरी डिक्शनरी में मौजूद ही नहीं है।"

सुनीता ने तंज कसते हुए आगे कहा, "यह कोई तरीका नहीं होता कि आप जो मन में आए वो करें, मनमर्जी से जिएं, हदों को पार करें और फिर आकर हाथ जोड़कर माफी मांग लें। गलतियां अनजाने में होती हैं, लेकिन जब चीजें बार-बार जानबूझकर की जाएं तो वो आदत बन जाती हैं। मैंने अपनी जिंदगी में रिश्ते बचाने के लिए एक बार मौका दिया, दो बार दिया, तीन बार मौके दिए। लेकिन जब सामने वाले को कद्र ही न हो, तो फिर इंसान कहता है कि जहां जाना है जाओ, अपनी जिंदगी जियो।"

'जो पुरुष अच्छी महिला के प्यार की कद्र न करे, उसे बाहर फेंक देना चाहिए'

अपने आत्मसम्मान की बात करते हुए सुनीता आहूजा ने भारतीय महिलाओं को भी एक कड़ा और मजबूत संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्यार कभी भी अपनी गरिमा और स्वाभिमान को गिरवी रखकर हासिल नहीं किया जा सकता।

सुनीता ने कहा, "अगर कोई पुरुष किसी महिला के सच्चे प्यार, त्याग और समर्पण की कद्र नहीं कर सकता, तो मेरा साफ मानना है कि उस पुरुष को महिला की जिंदगी से फौरन बाहर हो जाना चाहिए। वह पुरुष उस अच्छी महिला के लायक ही नहीं है। अगर कोई इंसान अपनी जिंदगी में एक वफादार, मजबूत और अच्छी साथी की कद्र नहीं कर पाता, तो यह उसका खुद का सबसे बड़ा नुकसान है। मैं इसे अपनी बदकिस्मती या हार कतई नहीं मानती। आज हम दोनों उस मोड़ पर पहुंच चुके हैं जहां गोविंदा अपनी जिंदगी जी रहे हैं और मैंने खुलकर अपनी शर्तों पर अपनी जिंदगी जीना शुरू कर दिया है।"

सुनीता आहूजा के इस दो टूक और निर्भीक बयान ने यह साबित कर दिया है कि चार दशक तक परिवार को एक धागे में पिरोकर रखने वाली स्टार-वाइफ अब किसी भी समझौते के मूड में नहीं हैं। उनके इस रुख को सोशल मीडिया पर महिलाओं का जबर्दस्त समर्थन मिल रहा है, जो इसे नारी स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की मिसाल बता रही हैं।