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September 23 2026 11:00 pm

फिल्मों में क्यों घटते जा रहे हैं गाने? हिमेश रेशमिया ने खोला बॉलीवुड का कड़वा सच; बोले- 'Gen Z भी मिस कर रही पुराना संगीत

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भारतीय सिनेमा और बॉलीवुड फिल्मों की सबसे बड़ी पहचान उनकी रूहानी मेलोडी और सदाबहार गाने रहे हैं। एक दौर था जब एक ही फिल्म के आठ से दस गाने रिलीज होते थे और महीनों तक रेडियो, कैसेट्स और टीवी चैनलों पर छाए रहते थे। हालांकि, बीते कुछ वर्षों में हिंदी फिल्मों में गानों की संख्या तेजी से सिमटकर दो या तीन तक रह गई है। इस बदलते चलन और संगीत के गिरते स्तर पर अब देश के जाने-माने संगीतकार व गायक हिमेश रेशमिया ने खुलकर बात की है। जाने-माने फिल्म निर्देशक सूरज बड़जात्या की आगामी पारिवारिक ड्रामा फिल्म 'ये प्रेम मोल लिया' के म्यूजिक लॉन्च इवेंट के दौरान हिमेश ने इस बात पर चिंता जताई कि कैसे आज का सिनेमा बजट और सोशल मीडिया रील्स के गणित में उलझकर संगीत की मूल आत्मा को खोता जा रहा है।

'मैंने प्यार किया' में 14 गाने थे और अब केवल 6—हिमेश ने समझाया अंतर

सूरज बड़जात्या की राजश्री प्रोडक्शंस हमेशा से भव्य म्यूजिकल फिल्मों के लिए जानी जाती रही है। इवेंट के दौरान हिमेश रेशमिया और सूरज बड़जात्या ने आंकड़ों के जरिए फिल्मों में संगीत के घटते ग्राफ का जिक्र किया। हिमेश ने याद दिलाते हुए कहा कि साल 1989 में आई सलमान खान की क्लासिक ब्लॉकबस्टर 'मैंने प्यार किया' में पूरे 14 गाने थे। इसके बाद साल 2015 में जब उन्होंने खुद सूरज बड़जात्या के साथ 'प्रेम रतन धन पायो' बनाई, तो उस एल्बम में 10 गाने शामिल किए गए थे। लेकिन अब आयुष्मान खुराना और शरवरी वाघ स्टारर उनकी नई फिल्म 'ये प्रेम मोल लिया' में गानों की संख्या घटकर सिर्फ 6 रह गई है। हिमेश ने साफ किया कि यह बदलाव किसी एक निर्देशक या संगीतकार का नहीं, बल्कि पूरे इंडस्ट्री इकोसिस्टम के बदलने का नतीजा है।

प्रोड्यूसर्स का बदला गणित और रोज रिलीज होने वाले 300 गाने

हिमेश रेशमिया ने फिल्मों में गाने कम होने के पीछे सबसे बड़ा कारण निर्माताओं के नजरिए में आए बदलाव और भारी डिजिटल ट्रैफिक को बताया। उन्होंने कहा कि पुराने दौर में बहुत ज्यादा ओटीटी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स नहीं थे। उस समय गानों की शूटिंग और उनके प्रमोशन का खर्च सीमित और व्यवस्थित होता था। लेकिन आज हर चीज में व्यावसायिक गणित आ चुका है। आज निर्माता और निर्देशक यह हिसाब लगाते हैं कि दो अतिरिक्त गानों को शूट करने में कितना समय और बजट खर्च होगा और उसका रिटर्न क्या मिलेगा।

इसके साथ ही डिजिटल युग में संगीत की अधिकता भी एक बड़ी चुनौती बन गई है। हिमेश के अनुसार, आज सभी भाषाओं और प्लेटफॉर्म्स को मिलाकर हर दिन लगभग 300 नए गाने रिलीज हो रहे हैं। इस भारी भीड़ और डिजिटल ट्रैफिक के बीच किसी एक गाने को दर्शकों के दिलों तक पहुंचने और ब्लॉकबस्टर बनने में कभी-कभी साल भर से ज्यादा का समय लग जाता है। ऐसे में नए संगीतकार अक्सर कलात्मक प्रयोग के बजाय तुरंत अप्रूवल और लाइक्स पाने के दबाव में काम करने लगते हैं।

'Gen Z को भी खटक रही यह बात'—युवाओं को याद आ रहा 90s का मेलोडी

आमतौर पर यह माना जाता है कि आज की नई पीढ़ी यानी जेन-जी (Gen Z) केवल फास्ट बीट्स और शॉर्ट वीडियोज पसंद करती है, लेकिन हिमेश रेशमिया ने इस धारणा को पूरी तरह खारिज कर दिया। अपने लाइव म्यूजिक कॉन्सर्ट्स का अनुभव साझा करते हुए हिमेश ने बताया कि उनके शोज में भारी तादाद में आने वाले 18 से 25 साल के युवा खुद उनसे कहते हैं कि वे 90 के दशक और 2000 के शुरुआती दौर की मेलोडी को बेहद मिस करते हैं।

हिमेश ने कहा, "हम अक्सर आपस में चर्चा करते हैं कि बॉलीवुड में पहले जैसा संगीत क्यों नहीं बन रहा। यहां तक कि जो जेन-जी मेरे कॉन्सर्ट्स में आती है, वो भी यही शिकायत करती है कि आज के गानों में वो पुरानी गहराई और ठहराव गायब है।" नई पीढ़ी भी ऐसे गानों की तलाश में है जो सिर्फ 15 सेकंड के लिए नहीं, बल्कि जिंदगी भर उनकी प्लेलिस्ट का हिस्सा बने रहें।

रील्स के लिए बनाए गए गानों में नैचुरल मेलोडी नहीं होती

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, खासकर इंस्टाग्राम रील्स पर निशाना साधते हुए हिमेश ने बेहद कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पहले जब 6 या 7 मिनट का लंबा गाना बनता था, तो वह अपनी कहानी और धुन के दम पर सुपरहिट होता था। लेकिन आज संगीतकार और कंपनियां उम्मीद करती हैं कि 3 मिनट का गाना भी ऐसा बने जो सिर्फ रील्स पर वायरल हो सके।

हिमेश ने जोर देकर कहा कि अगर कोई संगीतकार किसी धुन को सिर्फ इस नीयत से बनाता है कि वह रील्स पर ट्रेंड कर जाए, तो उसमें ऑर्गेनिक यानी स्वाभाविक संगीतमयता कभी नहीं आ सकती। जब दर्शकों को कोई गाना सचमुच पसंद आता है, तो उसके लिए समय की सीमा मायने नहीं रखती। उन्होंने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके पुराने 6 से 7 मिनट के लंबे गाने आज भी युवाओं द्वारा रील्स और शॉर्ट्स पर उतने ही बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाते हैं। संगीत जब दिल से और कहानी के अनुसार बनता है, तो वह हर माध्यम पर अपनी जगह खुद बना लेता है।