Chardham Yatra 2026: चारधाम यात्रा में सबसे पहले कौन सा मंदिर आता है? जानें क्यों यमुनोत्री से ही होती है इस महापर्व की शुरुआत
India News Live,Digital Desk : हिमालय की बर्फीली चोटियों के बीच बसे उत्तराखंड के चार पवित्र धामों की यात्रा आस्था और भक्ति का सबसे बड़ा संगम है। साल 2026 की चारधाम यात्रा का आगाज 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर हो चुका है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस यात्रा का एक तय क्रम है और इसकी शुरुआत हमेशा एक खास मंदिर से ही होती है?
यमुनोत्री धाम: चारधाम यात्रा का पहला पड़ाव
परंपरा और शास्त्रों के अनुसार, चारधाम यात्रा का श्रीगणेश हमेशा यमुनोत्री धाम से होता है। उत्तरकाशी जिले में समुद्र तल से 3,291 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह धाम देवी यमुना को समर्पित है। चारधाम यात्रा में मंदिरों का क्रम पश्चिम से पूर्व की ओर चलता है, जिसमें सबसे पहले यमुनोत्री, फिर गंगोत्री, उसके बाद केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ के दर्शन किए जाते हैं।
क्यों यमुनोत्री से ही शुरू होती है यात्रा?
यमुनोत्री से यात्रा शुरू करने के पीछे गहरे धार्मिक और आध्यात्मिक कारण छिपे हैं:
पापमुक्ति का द्वार: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यमुना जी मृत्यु के देवता यमराज की बहन हैं। माना जाता है कि यमुनोत्री में स्नान और दर्शन करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और मनुष्य को यमलोक की यातनाएं नहीं सहनी पड़तीं।
शुद्धिकरण: यात्रा की नींव पवित्रता पर रखी जाए, इसलिए भक्त सबसे पहले यमुना माता के चरणों में शीश नवाते हैं ताकि आगे का कठिन मार्ग निर्विघ्न और सफल रहे।
दिव्य सूर्यकुंड: यहाँ उबलते हुए गर्म पानी के प्राकृतिक कुंड (सूर्यकुंड) हैं, जहाँ भक्त प्रसाद के रूप में चावल और आलू पकाते हैं, जिसे माता का आशीर्वाद माना जाता है।
चारधाम यात्रा 2026 का पूरा शेड्यूल
अगर आप भी इस साल दर्शन का मन बना रहे हैं, तो इन प्रमुख तिथियों को नोट कर लें:
यमुनोत्री और गंगोत्री: इन दोनों धामों के कपाट 19 अप्रैल 2026 (अक्षय तृतीया) को खुल चुके हैं।
केदारनाथ धाम: महादेव के इस धाम के कपाट 22 अप्रैल 2026 को सुबह 8:00 बजे भक्तों के लिए खोले जाएंगे।
बद्रीनाथ धाम: यात्रा का अंतिम और पूर्ण पड़ाव भगवान विष्णु का बद्रीनाथ धाम है, जिसके कपाट 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6:15 बजे खुलेंगे।
श्रद्धालुओं के लिए विशेष सलाह
2026 की यात्रा को लेकर प्रशासन ने कड़े नियम बनाए हैं। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे अपना पंजीकरण (Registration) अनिवार्य रूप से कराएं। ऊँचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी और ठंड को देखते हुए स्वास्थ्य जांच कराना और गर्म कपड़े साथ रखना बेहद जरूरी है। यमुनोत्री की कठिन चढ़ाई भक्तों के धैर्य की परीक्षा लेती है, लेकिन माँ यमुना के दर्शन होते ही सारी थकान आध्यात्मिक आनंद में बदल जाती है।