जीभ पर कब बैठती हैं मां सरस्वती? इस चमत्कारी समय में भूलकर भी न बोलें ये बातें, रखें 5 बातों का ध्यान
नई दिल्ली ब्यूरो: अक्सर आपने अपने घर के बड़े-बुजुर्गों को यह कहते जरूर सुना होगा कि— "हमेशा सोच-समझकर और मीठा बोला करो, पता नहीं किस समय जीभ पर मां सरस्वती बैठी हों!" सनातन धर्म और लोक मान्यताओं में यह केवल एक साधारण कहावत नहीं, बल्कि एक गहरा सच माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, 24 घंटे में एक ऐसा विशेष और पवित्र काल आता है, जब मनुष्य की वाणी सीधे ब्रह्मांड से जुड़ती है और उस दौरान मुंह से निकली हर बात (चाहे वह अच्छी हो या बुरी) सच हो सकती है।
आइए जानते हैं कि शास्त्रों के अनुसार मां सरस्वती हमारी जीभ पर किस समय विराजमान होती हैं और इस दौरान हमें किन 5 बेहद महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए।
कब होता है मां सरस्वती का जीभ पर वास?
पौराणिक मान्यताओं और ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, मां सरस्वती हर रोज ब्रह्म मुहूर्त के दौरान मनुष्य की जीभ पर विराजमान होती हैं।
ब्रह्म मुहूर्त का समय: यह समय सूर्योदय से ठीक डेढ़ घंटा (लगभग 1 घंटे 36 मिनट) पहले का होता है। रात का चौथा प्रहर यानी सुबह 4:00 बजे से लेकर 5:30 बजे तक का समय मुख्य रूप से ब्रह्म मुहूर्त कहलाता है। इस काल में वातावरण में सत्व गुण की प्रधानता होती है और मानसिक चेतना अत्यंत तीव्र होती है।
ब्रह्म मुहूर्त में जीभ पर सरस्वती वास के दौरान रखें इन 5 बातों का ध्यान:
यदि आप इस पवित्र समय में सोकर उठते हैं, तो अपनी किस्मत को चमकाने और जीवन में सकारात्मकता लाने के लिए इन 5 नियमों का पालन अवश्य करें:
1. हमेशा अच्छा और सकारात्मक बोलें (Positive Affirmations)
चूंकि इस समय आपकी वाणी में मां सरस्वती का प्रभाव होता है, इसलिए जागते ही सबसे पहले सकारात्मक बातें कहें। कभी भी दिन की शुरुआत चिड़चिड़ेपन या अपशब्दों से न करें। सुबह उठकर खुद से कहें— "आज का मेरा दिन बेहद शानदार रहेगा, मेरे सारे काम आसानी से पूरे होंगे और मैं हर किसी के साथ प्रेम से पेश आऊंगा/आऊंगी।" इस दौरान कही गई बातें आपके पूरे दिन की ऊर्जा को तय करती हैं।
2. भूलकर भी किसी को बद्दुआ या श्राप न दें
यदि ब्रह्म मुहूर्त में कही बात सच होती है, तो कई लोग अनजाने में या गुस्से में दूसरों के लिए बुरा बोलने की गलती कर बैठते हैं। वास्तु और शास्त्रों के अनुसार, यदि आप इस समय किसी को बद्दुआ देते हैं, तो उसका नकारात्मक असर (Karma) लौटकर आपकी खुद की जिंदगी पर पड़ता है। यदि आप किसी का भला नहीं सोच सकते, तो कम से कम उसके प्रति मौन रहें।
3. इष्ट देव का ध्यान और मंत्र जाप करें
यह समय ध्यान (Meditation) और पूजा-पाठ के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस शांत वातावरण में मां सरस्वती, भगवान विष्णु या आप जिन भी इष्ट देव को मानते हैं, उनका ध्यान करें। यदि संभव हो तो "ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः" या गायत्री मंत्र का मानसिक जाप करें। इससे मन शांत होता है और पूरे दिन शरीर में अद्भुत ऊर्जा बनी रहती है।
4. विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई का सबसे उत्तम समय
अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए ब्रह्म मुहूर्त वरदान की तरह है। इस समय मस्तिष्क पूरी तरह तरोताजा और शांत रहता है। शास्त्रों की मान्यता है कि इस काल में पढ़ी या याद की गई चीजें सीधे बुद्धि में बैठ जाती हैं और लंबे समय (Long Term) तक याद रहती हैं। कठिन विषयों की तैयारी के लिए यह समय सर्वश्रेष्ठ है।
5. कभी भी झूठ न बोलें और न ही निंदा करें
चूंकि ब्रह्म मुहूर्त का सीधा संबंध ज्ञान की देवी मां सरस्वती से है, इसलिए इस दौरान असत्य (झूठ) का सहारा बिल्कुल न लें। किसी की पीठ पीछे बुराई या निंदा करने से बचें। अपनी वाणी को पवित्र रखें, सोच-समझकर शब्दों का चयन करें और दूसरों के प्रति सम्मान का भाव रखें।