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September 09 2026 03:48 am

अमिताभ बच्चन ने जब अपनी ही फिल्म के सेट से मशहूर डायरेक्टर को निकाल दिया था बाहर: 'नमक हलाल' के आइकॉनिक सीन के दौरान क्यों बिग बी ने दी थी ये नसीहत

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सिनेमा जगत में अमूमन यही देखा और सुना जाता है कि फिल्म के सेट पर डायरेक्टर ही सर्वेसर्वा होता है। वह अपनी मर्जी के मुताबिक कलाकारों से काम करवाता है और अगर कोई एक्टर सेट पर अनुशासन तोड़े या बार-बार गलतियां करे, तो डायरेक्टर उसे डांटकर सेट से बाहर तक कर देता है। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने भी अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों में कई निर्देशकों की डांट खाई थी और एक बार तो देर से पहुंचने पर उन्हें सेट से 'गेट आउट' तक कह दिया गया था। लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि अपने करियर के चरम पर पहुंच चुके उसी सुपरस्टार ने एक दिन अपनी ही फिल्म के सबसे बड़े और दिग्गज डायरेक्टर को सेट से बाहर जाने का फरमान सुना दिया था?

यह सुनकर पहली नजर में किसी को भी लग सकता है कि शायद अमिताभ बच्चन ने गुस्से, अहंकार या किसी अनबन के चलते ऐसा कदम उठाया होगा। लेकिन इसके पीछे की असली वजह कोई झगड़ा नहीं, बल्कि एक ऐसा मजेदार और अप्रत्याशित वाकया था जिसे जानकर हर सिनेमा प्रेमी मुस्कुराए बिना नहीं रह सकता। यह पूरा किस्सा साल 1982 में रिलीज हुई भारतीय सिनेमा की कल्ट कॉमेडी-एक्शन ब्लॉकबस्टर फिल्म 'नमक हलाल' की शूटिंग के दौरान का है।

'आई कैन टॉक इंग्लिश, आई कैन वॉक इंग्लिश...': वो आइकॉनिक डायलॉग जिसने डायरेक्टर को किया लोटपोट

फिल्म 'नमक हलाल' में अमिताभ बच्चन द्वारा निभाया गया 'अर्जुन सिंह' का किरदार आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे बेहतरीन और मनोरंजक किरदारों में गिना जाता है। फिल्म का एक खास दृश्य, जिसमें अर्जुन सिंह फाइव स्टार होटल में इंटरव्यू देने पहुंचता है और अंग्रेजी भाषा को लेकर एक लंबा-चौड़ा मोनोलॉग बोलता है, वह दृश्य आज भी कल्ट क्लासिक का दर्जा रखता है।

वह मशहूर डायलॉग था—"आई कैन टॉक इंग्लिश, आई कैन वॉक इंग्लिश, आई कैन लाफ इंग्लिश बिकॉज़ इंग्लिश इज सच अ फनी लैंग्वेज..."

दिलचस्प बात यह है कि यह लंबा और जटिल डायलॉग मूल स्क्रिप्ट में इस तरह से लिखा ही नहीं गया था। अमिताभ बच्चन ने अपने गजब के सेंस ऑफ ह्यूमर और कॉमिक टाइमिंग के दम पर सेट पर ही इस पूरे सीन को इम्प्रोवाइज किया था। जब बिग बी ने इस सीन की रिहर्सल शुरू की और अपने ठेठ देसी अंदाज में अंग्रेजी के शब्दों को मरोड़कर बोलना शुरू किया, तो सेट पर मौजूद सभी लोगों की हंसी छूट गई। लेकिन सबसे बुरा हाल फिल्म के दिग्गज निर्देशक प्रकाश मेहरा का हुआ। प्रकाश मेहरा अमिताभ के इस कॉमिक अवतार और चेहरे के भावों को देखकर इतने मुग्ध हो गए कि वे अपनी हंसी पर बिल्कुल भी काबू नहीं रख पा रहे थे।

फोकस और परफेक्शन की खातिर उठाया कदम: प्रकाश मेहरा को क्यों जाना पड़ा सेट से बाहर?

अमिताभ बच्चन अपने काम और सीन के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते हैं। जब फाइनल टेक की बारी आई, तो जैसे ही बिग बी अपना डायलॉग बोलना शुरू करते, कैमरे के ठीक पीछे मॉनिटर के पास बैठे डायरेक्टर प्रकाश मेहरा जोर-जोर से ठहाके लगाने लगते थे। निर्देशक के बार-बार हंसने की वजह से शॉट कट करना पड़ता था और टेक खराब हो जाता था।

अमिताभ बच्चन जानते थे कि यह कोई सामान्य सीन नहीं है; इस दृश्य में शब्दों की गति, चेहरे की मासूमियत और बिना हंसे गंभीर रहकर कॉमेडी करने (Deadpan Humor) की जरूरत थी। प्रकाश मेहरा की लगातार छूटती हंसी से बिग बी का ध्यान भटक रहा था और सीन की लय टूट रही थी।

ऐसे में अमिताभ बच्चन ने बेहद संजीदगी और आदरपूर्वक प्रकाश मेहरा से कहा—"प्रकाश जी, अगर आप ऐसे ही हंसते रहेंगे, तो मैं यह शॉट कभी पूरा नहीं कर पाऊंगा। मुझे इस सीन के लिए सेट पर बिल्कुल सन्नाटा और एकाग्रता चाहिए। बेहतर होगा कि जब तक यह टेक पूरा नहीं हो जाता, आप सेट से बाहर चले जाएं।"

सेट पर मौजूद हर कोई यह सुनकर सन्न रह गया कि एक अभिनेता अपने डायरेक्टर को ही बाहर जाने के लिए कह रहा था। लेकिन प्रकाश मेहरा और अमिताभ बच्चन के बीच केवल निर्देशक-कलाकार का नहीं, बल्कि एक बेहद गहरे दोस्त और परस्पर सम्मान का रिश्ता था। प्रकाश मेहरा अमिताभ की कला और उनके परफेक्शन की जरूरत को भली-भांति समझते थे। उन्होंने बिना किसी ईगो या झिझक के बिग बी की बात मानी और मुस्कुराते हुए सेट से बाहर चले गए। इसके बाद अमिताभ बच्चन ने बिना किसी रुकावट के शांति में पूरा सीन एक ही बार में परफेक्टली शूट कर दिया। जब शॉट पूरा हुआ, तो प्रकाश मेहरा वापस अंदर आए और उन्होंने बिग बी के इस लाजवाब परफॉर्मेंस की जमकर सराहना की।

'नमक हलाल' के निर्माण के दौरान बिग बी के सामने आया था बड़ा 'हिरोइन संकट'

'नमक हलाल' की शूटिंग का दौर अमिताभ बच्चन के करियर का वह समय था जब उनके सामने अपनी फिल्मों के लिए मुख्य अभिनेत्रियों (Heroines) का एक अजीबोगरीब संकट खड़ा हो गया था। उस दौर के घटनाक्रमों पर नजर डालें तो बॉलीवुड में कई बड़े बदलाव हो रहे थे:

रेखा के साथ दूरी: उस समय तक बिग बी ने रेखा के साथ फिल्मों में काम न करने का फैसला ले लिया था, जिसके चलते इंडस्ट्री की सबसे हिट जोड़ी अलग हो चुकी थी।

राखी और मैच्योर रोल्स: राखी उस समय तक मां या अधिक परिपक्व (Mature) भूमिकाओं की ओर रुख कर चुकी थीं।

परवीन बाबी का स्वास्थ्य: परवीन बाबी उस दौर में अपनी मानसिक और शारीरिक सेहत की गंभीर समस्याओं से जूझ रही थीं, जिसके कारण वे शूटिंग्स के लिए नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हो पाती थीं।

नीतू सिंह का संन्यास: नीतू सिंह ऋषि कपूर से शादी के बाद अभिनय की दुनिया को अलविदा कह चुकी थीं।

मौशमी और शबाना: रिपोर्ट्स के अनुसार, अमिताभ बच्चन उस समय मौशमी चटर्जी या शबाना आजमी के साथ इस तरह के विशुद्ध कमर्शियल रोल में सहज नहीं थे।

स्मिता पाटिल की एंट्री और 'आज रपट जाएं': आर्ट सिनेमा की क्वीन का कमर्शियल धमाका

जब 'नमक हलाल' के लिए मुख्य अभिनेत्री की तलाश चल रही थी, तब अमिताभ बच्चन ने ही निर्देशक प्रकाश मेहरा को एक बेहद चौंकाने वाला सुझाव दिया। बिग बी ने कहा कि हमें इस कमर्शियल फिल्म के लिए समानांतर सिनेमा (Art/Parallel Cinema) की सबसे सशक्त अभिनेत्री स्मिता पाटिल को अप्रोच करना चाहिए।

उस समय स्मिता पाटिल 'मंथन', 'भूमिका' और 'आक्रोश' जैसी गंभीर आर्ट फिल्मों की पहचान थीं और उनका किसी ऐसी फुल-ऑन मसाला फिल्म में काम करना अकल्पनीय माना जाता था। लेकिन प्रकाश मेहरा और अमिताभ के समझाने पर स्मिता पाटिल ने यह रोल स्वीकार कर लिया। हालांकि, फिल्म के मशहूर बारिश वाले गाने 'आज रपट जाएं तो हमें ना उठाइयो' की शूटिंग के बाद स्मिता पाटिल बेहद भावुक हो गई थीं और रोने लगी थीं क्योंकि उन्हें लगा था कि बारिश में भीगकर इस तरह का बोल्ड और कमर्शियल डांस करना उनकी संजीदा छवि को नुकसान पहुंचाएगा। उस समय अमिताभ बच्चन ने ही उन्हें बैठाकर समझाया था कि यह सिनेमा का हिस्सा है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। बाद में यह गाना और फिल्म दोनों ही ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुए।

शशि कपूर और अमिताभ बच्चन की बतौर लीड हीरो आखिरी ब्लॉकबस्टर फिल्म

'नमक हलाल' भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक और खास वजह से हमेशा याद की जाती है। यह फिल्म अमिताभ बच्चन और शशि कपूर की एक साथ बतौर लीड हीरो आखिरी फिल्म थी। 70 और 80 के दशक में 'दीवार', 'त्रिशूल', 'काला पत्थर', 'सुहाग', 'कभी कभी' और 'दो और दो पांच' जैसी दर्जनों सुपरहिट फिल्में देने वाली इस ऐतिहासिक जोड़ी ने 'नमक हलाल' में आखिरी बार एक साथ मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं।

इसके बाद साल 1991 में आई फिल्म 'अकेला' में अमिताभ बच्चन मुख्य नायक थे और शशि कपूर ने उसमें एक सीनियर पुलिस अफसर का चरित्र रोल निभाया था। वहीं, इसके बाद शशि कपूर ने बतौर निर्देशक अमिताभ बच्चन को लेकर भव्य फैंटेसी फिल्म 'अजूबा' का निर्माण और निर्देशन किया था। इस प्रकार, 'नमक हलाल' इन दो महान दिग्गजों के स्वर्णिम युग की आखिरी सबसे बड़ी जुगलबंदी के रूप में इतिहास में दर्ज हो गई।

प्रकाश मेहरा और अमिताभ बच्चन: अटूट विश्वास और सम्मान की मिसाल

प्रकाश मेहरा वही निर्देशक थे जिन्होंने 1973 में 'जंजीर' बनाकर लगातार 12 फ्लॉप फिल्में दे चुके एक संघर्षशील अमिताभ बच्चन को 'एंग्री यंग मैन' बनाकर रातों-रात सुपरस्टार के पद पर बिठाया था। इसके बाद इस जोड़ी ने 'हेरा फेरी', 'खून पसीना', 'मुकद्दर का सिकंदर', 'लावारिस', 'नमक हलाल' और 'शराबी' जैसी ऐतिहासिक ब्लॉकबस्टर फिल्मों की झड़ी लगा दी थी।

सेट से डायरेक्टर को बाहर भेजने का यह किस्सा इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि दोनों के बीच का पेशेवर और व्यक्तिगत रिश्ता कितना गहरा, पारदर्शी और खुला था। जहां एक तरफ अमिताभ बच्चन को अपने काम की गुणवत्ता के लिए डायरेक्टर को बाहर जाने का अनुरोध करने में कोई झिझक नहीं थी, वहीं प्रकाश मेहरा ने भी एक सच्चे और परिपक्व निर्देशक की तरह अपने कलाकार की सहजता को प्राथमिकता दी। यही आपसी तालमेल, समर्पण और कला के प्रति अटूट निष्ठा थी जिसने 80 के दशक के उस दौर को भारतीय सिनेमा का स्वर्ण काल बना दिया।