कैंसर को हराकर पायलट बनी विवेक ओबेरॉय की गोद ली बेटी, अब नेपाली फिल्म में निभाएंगी लीड रोल
बॉलीवुड अभिनेता विवेक ओबेरॉय अपनी फिल्मों के साथ-साथ सामाजिक कार्यों और वंचित बच्चों की मदद के लिए हमेशा आगे रहने के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एक ऐसा भावुक और प्रेरणादायी पल देखने को मिला जिसने वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम कर दीं। अभिनेता विवेक ओबेरॉय की गोद ली हुई बेटी सहारा शाह (सेहरा शाह), जिन्होंने बचपन में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को मात दी और हाल ही में एविएशन की ट्रेनिंग पूरी कर कमर्शियल पायलट बनी हैं, अब फिल्मों में बतौर मुख्य अभिनेत्री कदम रखने जा रही हैं। उन्होंने विवेक ओबेरॉय की मौजूदगी में नेपाली सिनेमा की एक बड़ी फिल्म में लीड रोल मिलने की घोषणा की, जिसे सुनते ही विवेक ओबेरॉय गर्व और खुशी से भावुक हो गए और बेटी को गले से लगा लिया।
ढाई साल की उम्र में लड़ी कैंसर से जंग, विवेक ओबेरॉय ने थामा था हाथ
सहारा शाह की जिंदगी का सफर किसी बड़े चमत्कार और अदम्य साहस से कम नहीं है। जब वह महज ढाई साल की थीं, तब उन्हें कैंसर का पता चला था। उस बेहद नाजुक और दर्दनाक दौर में विवेक ओबेरॉय ने उस नन्हीं बच्ची की जिम्मेदारी उठाई थी। वे सहारा को मुंबई स्थित 'कैंसर पेशेंट्स एड एसोसिएशन' (CPAA) लेकर आए, जो भारत में वंचित और जरूरतमंद कैंसर मरीजों के इलाज में मदद करने वाली प्रमुख संस्था है। विवेक ने न सिर्फ सहारा के महंगे इलाज और कीमोथेरेपी का पूरा खर्च उठाया, बल्कि उनकी पढ़ाई-लिखाई और भविष्य की जिम्मेदारी भी अपने कंधों पर ली। सालों के लंबे संघर्ष और बेहतर इलाज के बाद आज 22 साल की सहारा पूरी तरह कैंसर मुक्त होकर स्वस्थ जिंदगी जी रही हैं।
आसमान छूने का सपना हुआ पूरा, अब पायलट के बाद बनेंगी हीरोइन
सहारा ने अपनी शारीरिक चुनौतियों को कभी अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया। उन्होंने कठिन एविएशन ट्रेनिंग पूरी कर ली है और वह बहुत जल्द एक कमर्शियल पायलट के रूप में उड़ान भरने के लिए तैयार हैं। लेकिन सहारा का सफर यहीं नहीं थमा। मुंबई में आयोजित 'कैंसर रोज डे' कार्यक्रम के मंच से उन्होंने एक और बड़ा ऐलान करते हुए सबको चौंका दिया। सहारा ने बताया कि वह अपने फॉस्टर पिता विवेक ओबेरॉय के नक्शेकदम पर चलते हुए अभिनय की दुनिया में भी कदम रखने जा रही हैं। उन्हें एक नेपाली फिल्म में मुख्य अभिनेत्री (लीड रोल) के तौर पर चुना गया है, जो अगले साल सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।
पिता विवेक ओबेरॉय को दिया सरप्राइज, आशीर्वाद लेकर साइन की फिल्म
इवेंट के दौरान मंच पर सहारा ने विवेक ओबेरॉय से मुखातिब होते हुए कहा, "मैंने अपनी एविएशन ट्रेनिंग पूरी कर ली है और मैं जल्द ही आपसे दुबई में मिलूंगी। इसके साथ ही मैं आपको एक सरप्राइज देना चाहती हूं। मैं एक नेपाली फिल्म में लीड एक्ट्रेस का किरदार निभाने जा रही हूं। मैंने अभी तक इस फिल्म को साइन नहीं किया था क्योंकि मैं सबसे पहले आपका आशीर्वाद लेना चाहती थी। आप मेरी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा रहे हैं। जब मैं एक छोटी बच्ची थी, तभी से मैंने आपको देखा है और मैं हमेशा से आपके नक्शेकदम पर चलना चाहती थी। जब भी बात एक्टिंग, डांस या मेरे किसी भी सपने की आई, आपने हमेशा एक पिता की तरह मेरा साथ दिया।" सहारा प्यार से विवेक ओबेरॉय को 'दादा' कहकर पुकारती हैं। उन्होंने कहा कि जिस पृष्ठभूमि से वे आती हैं, वहां इतने बड़े सपने देखना कभी मुमकिन नहीं था, लेकिन विवेक के साथ ने उन्हें हर मुकाम हासिल करने का हौसला दिया।
'गर्व से मेरी आंखें भर आईं, कभी मत भूलना कि तुम विनर हो' - विवेक ओबेरॉय
अपनी लाडली की इस ऐतिहासिक सफलता और जज्बे को देखकर विवेक ओबेरॉय अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए। उन्होंने नम आंखों से सहारा को सीने से लगा लिया और कहा, "यह मेरे लिए सबसे बड़े गर्व और सम्मान का दिन है। मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता कि मैं आज कितना खुश हूं। मेरी आंखें गर्व के आंसुओं से भरी हैं। मैंने उस ढाई साल की मासूम बच्ची को देखा था, जिसकी आंखें लाल थीं और चेहरा पीला पड़ चुका था। वह कैंसर के दर्द और कीमोथेरेपी से जूझ रही थी। लेकिन जिस मजबूती से उसने उस वक्त मेरी उंगली पकड़ी थी, मुझे उसी दिन यकीन हो गया था कि वह यह जंग जरूर जीतेगी। मैं हर रोज उसके लिए दुआ करता था। आज उसने कैंसर को हराया है, पायलट बनी है और अब सिनेमा के पर्दे पर चमकने जा रही है। भगवान तुम्हें हमेशा खुश रखे बेटा, कभी मत भूलना कि तुम एक विनर (विजेता) हो।"
गौरतलब है कि विवेक ओबेरॉय और उनकी पत्नी प्रियंका अल्वा के दो बायोलॉजिकल बच्चे (बेटा विवान वीर और बेटी अमेया निर्वाणा) हैं, लेकिन विवेक ने सामाजिक दायित्व निभाते हुए कई कैंसर पीड़ित बच्चों को गोद ले रखा है। हाल ही में अपने 50वें जन्मदिन के मौके पर भी उन्होंने 50 और कैंसर पीड़ित बच्चों के पूरे इलाज का खर्च उठाने का संकल्प लिया है। सहारा शाह की यह विजय गाथा न सिर्फ विवेक ओबेरॉय के मानवीय पक्ष को दर्शाती है, बल्कि दुनिया भर के उन लाखों कैंसर मरीजों के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद है जो इस बीमारी से जंग लड़ रहे हैं।