बंगाल में त्रिशंकु विधानसभा का खतरा: 148 के जादुई आंकड़े पर फंसा पेंच, जानें कौन बनेगा किंगमेकर?
India News Live,Digital Desk : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के एग्जिट पोल के आंकड़ों ने राज्य की सियासत में 'सस्पेंस' को चरम पर पहुंचा दिया है। अधिकांश सर्वे संकेत दे रहे हैं कि मुकाबला इतना करीबी है कि महज 5-10 सीटों का अंतर पूरे राज्य की सत्ता का भविष्य बदल सकता है। 294 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 148 का आंकड़ा पार करना अनिवार्य है, लेकिन त्रिशंकु विधानसभा (Hung Assembly) की प्रबल संभावना ने रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है।
क्या कहते हैं एग्जिट पोल के समीकरण?
एग्जिट पोल के रुझानों ने बीजेपी और टीएमसी दोनों के लिए उम्मीद और डर, दोनों पैदा कर दिए हैं:
बीजेपी का पलड़ा: मैट्रीज और पीमार्क जैसे पोल बीजेपी को 146 से 175 के बीच दिखा रहे हैं। यदि बीजेपी 146 पर रुकती है, तो वह बहुमत से दो कदम दूर रह जाएगी।
टीएमसी की स्थिति: टीएमसी को 120 से 140 के बीच सीटें मिलने का अनुमान है। अगर बीजेपी बहुमत से चूकती है, तो ममता बनर्जी एक बार फिर 'विपक्षी एकजुटता' के दम पर वापसी की कोशिश कर सकती हैं।
वोटरों की चुप्पी: 'एक्सिस माई इंडिया' जैसे बड़े पोलस्टर ने आंकड़े जारी न करते हुए साफ किया कि वोटरों ने अपनी पसंद गुप्त रखी है, जो अक्सर सत्ता विरोधी लहर या बेहद कड़े मुकाबले का संकेत होता है।
त्रिशंकु विधानसभा हुई तो क्या होगा?
यदि 4 मई को किसी भी दल को 148 सीटें नहीं मिलती हैं, तो बंगाल की राजनीति में ये 3 स्थितियां बन सकती हैं:
1. राज्यपाल की भूमिका:
संवैधानिक नियमों के अनुसार, राज्यपाल सबसे बड़ी पार्टी (Single Largest Party) को सरकार बनाने का न्योता देते हैं और उन्हें एक निश्चित समय के भीतर विधानसभा में फ्लोर टेस्ट (Floor Test) के जरिए बहुमत साबित करना होता है।
2. कौन बनेगा 'किंगमेकर'?
ऐसी स्थिति में छोटी पार्टियों और निर्दलीय विधायकों की अहमियत 'सोने' के समान हो जाएगी।
कांग्रेस और लेफ्ट: भले ही सर्वे में इनका प्रदर्शन कमजोर दिख रहा हो, लेकिन 2-4 सीटें भी इन्हें 'किंगमेकर' की कुर्सी पर बिठा सकती हैं।
ममता का दांव: ममता बनर्जी बीजेपी को रोकने के लिए कांग्रेस और लेफ्ट से समर्थन मांग सकती हैं। मल्लिकार्जुन खरगे के हालिया बयानों ने इस संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं है।
3. जोड़-तोड़ और 'ऑपरेशन लोटस':
बीजेपी अगर बहुमत के करीब पहुंचती है, तो वह निर्दलीयों और अन्य छोटे गुटों के साथ मिलकर जादुई आंकड़ा जुटाने की कोशिश करेगी। वहीं टीएमसी अपनी सत्ता बचाने के लिए 'विपक्षी मोर्चा' तैयार करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।
92% बंपर वोटिंग के मायने
बंगाल में इस बार 92 प्रतिशत से अधिक की भारी वोटिंग हुई है।
बीजेपी के लिए: भारी मतदान अक्सर 'बदलाव' की लहर का संकेत माना जाता है।
TMC के लिए: यह ममता बनर्जी के 'आधार वोट' (महिलाएं और अल्पसंख्यक) की मजबूत लामबंदी भी हो सकती है।