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August 05 2026 03:33 pm

सावन में इस बार सोमवार के दुर्लभ संयोग पर है नाग पंचमी, जानें सही पूजा मुहूर्त और जीवन की हर बाधा दूर करने वाले चमत्कारी मंत्र

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सावन का पवित्र महीना हिंदू धर्म में विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व रखता है। यह पूरा मास देवों के देव महादेव और माता पार्वती की आराधना को समर्पित होता है। सावन के इस पावन कालखंड में भगवान शिव के साथ-साथ नाग देवता की पूजा का भी विधान है। सनातन संस्कृति में नागों को भगवान शिव का आभूषण और अत्यंत पूज्यनीय माना गया है। ऐसे में सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आने वाली नाग पंचमी का इंतजार हर एक शिवभक्त को साल भर रहता है। इस वर्ष नाग पंचमी का पर्व बेहद खास और फलदायी रहने वाला है, क्योंकि लंबे अंतराल के बाद यह पावन पर्व सीधे सोमवार के दिन पड़ रहा है। सोमवार का दिन भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय है, जिससे इस दिन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

सोमवार के दुर्लभ संयोग में आ रही है नाग पंचमी, जानिए इसका धार्मिक महत्व

धर्म ग्रंथों के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग देवता की पूजा करने से कालसर्प दोष, राहु-केतु के अशुभ प्रभावों और जीवन की तमाम प्रकार की अड़चनों से मुक्ति मिलती है। जब नाग पंचमी सोमवार के दिन पड़ती है, तो इसे 'सोमवारी नाग पंचमी' कहा जाता है, जो शिव भक्तों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस दिन विधि-विधान के साथ नाग देवता और भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने से घर में सुख, शांति, समृद्धि और अखंड सौभाग्य का वास होता है। जो लोग जीवन में बार-बार असफलताओं का सामना कर रहे हैं या जिन्हें अज्ञात भय सताता है, उनके लिए यह दिन विशेष रूप से फलदायी साबित होता है।

नाग पंचमी 2026 का सटीक शुभ मुहूर्त और पंचांग गणना

किसी भी धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ की पूर्ण सफलता के लिए उसका सही समय या शुभ मुहूर्त जानना बेहद आवश्यक होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का आरंभ 16 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 22 मिनट से होगा। वहीं, इस पवित्र तिथि का समापन अगले दिन यानी 17 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 30 मिनट पर होगा। उदयातिथि और प्रदोष काल के नियमों को ध्यान में रखते हुए नाग पंचमी का मुख्य पर्व 17 अगस्त को ही मनाया जाएगा। पूजा-अर्चना के लिए सबसे उत्तम और शुभ समय सुबह 6 बजकर 46 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। इस निर्धारित शुभ मुहूर्त में नाग देवता और शिव परिवार की पूजा करना साधक के लिए अत्यंत फलदायी और कल्याणकारी माना गया है।

नाग पंचमी पूजा विधि: ऐसे करें भगवान शिव और नाग देवता को प्रसन्न

नाग पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ गोबर, गेरू या हल्दी से नाग देवता का चित्र बनाएं या बाजार से नाग देवता की मूर्ति या तस्वीर लाकर स्थापित करें। पूजा स्थल पर ताजे फूल, दूर्वा, अक्षत, रोली, चंदन और मिठाई अर्पित करें। नाग देवता को दूध, लावा और धान का लावा चढ़ाने की परंपरा है। इसके साथ ही भगवान शिव का जलाभिषेक या दुग्धाभिषेक करें क्योंकि नाग देवता भोलेनाथ के गले की शोभा बढ़ाते हैं। इस दिन व्रत रखने वाले जातकों को सात्विक आहार का पालन करना चाहिए और किसी भी जीव को हानि न पहुँचाने का संकल्प लेना चाहिए।

पहला चमत्कारी मंत्र: नाग गायत्री मंत्र से पाएं असीम कृपा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नाग पंचमी के पावन अवसर पर कुछ विशेष मंत्रों का जाप करने से मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इसमें पहला और सबसे प्रभावी मंत्र 'नाग गायत्री मंत्र' है। इस दिन स्फटिक या रुद्राक्ष की माला से कम से कम 108 बार नाग गायत्री मंत्र का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि मंत्र जाप करते समय यदि शिवलिंग और नाग देवता को दूध अर्पित किया जाए, तो साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। वह चमत्कारी मंत्र इस प्रकार है— ॐ नवकुलाय विद्महे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्। इस मंत्र के नियमित स्मरण से राहु-केतु जनित परेशानियां शांत होती हैं और मानसिक शांति मिलती है।

दूसरा शक्तिशाली मंत्र: आस्तिक मुनि मंत्र और घर की नकारात्मक ऊर्जा का नाश

नाग पंचमी के दिन 'आस्तिक मुनि मंत्र' का जाप करना अत्यंत लाभकारी और चमत्कारिक परिणाम देने वाला माना जाता है। यह एक बेहद छोटा और सरल मंत्र है, जिसे कोई भी आसानी से याद करके जप सकता है। मंत्र इस प्रकार है— ॐ आस्तिक मुनिभ्यो नमः। पौराणिक कथाओं के अनुसार, आस्तिक मुनि ने ही नागों के वंश की रक्षा की थी, इसलिए उनके नाम का स्मरण करने से नाग देवता प्रसन्न होते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करने से घर के अंदर सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का संचार होता है। इसके अलावा, इस मंत्र को रोली की मदद से अपने घर के मुख्य द्वार पर भी लिखा जा सकता है। ऐसा करने से घर में किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नजर या प्रेत बाधा प्रवेश नहीं कर पाती है।

तीसरा अचूक मंत्र: सर्प भय निवारण मंत्र से दूर करें हर प्रकार का डर

कई लोगों के मन में सांपों को लेकर एक अजीब सा अज्ञात भय या फोबिया रहता है। ऐसे जातकों के लिए नाग पंचमी के दिन सर्प भय निवारण मंत्र का जाप करना रामबाण उपाय है। इस मंत्र के प्रभाव से सर्प भय हमेशा के लिए दूर हो जाता है और जीवन की तमाम बाधाएं छंट जाती हैं। वह चमत्कारी मंत्र इस प्रकार है— सर्पापसर्प भद्रं ते गच्छ सर्प महाविष, जनमेजयस्य यज्ञान्ते आस्तीकवचनं स्मरण। नाग पंचमी के दिन इस मंत्र का सच्चे मन से पाठ करने से न केवल सर्पदंश का भय समाप्त होता है, बल्कि जीवन में चल रहे अदृश्य शत्रुओं के षड्यंत्र भी विफल हो जाते हैं।

सावन और नाग पंचमी के विशेष ज्योतिषीय उपाय

सावन के महीने में ज्योतिषीय उपायों का विशेष महत्व होता है। यदि आपकी कुंडली में कालसर्प दोष, पितृ दोष या नाग दोष जैसी स्थितियां बनी हुई हैं, तो नाग पंचमी का दिन आपके लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। इस दिन किसी योग्य ब्राह्मण से महामृत्युंजय मंत्र का अनुष्ठान करवाएं या चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा प्रवाहित करें। इसके साथ ही, अपनी राशि के अनुसार शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, कच्चा दूध और गंगाजल अर्पित करने से भगवान शिव की असीम अनुकंपा प्राप्त होती है। इस पावन पर्व पर गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना भी आपके जीवन में सुख-समृद्धि के नए द्वार खोल सकता है। इसलिए पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ इस पर्व को मनाएं और अपने जीवन को शिवमय बनाएं।