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October 24 2026 02:32 am

हिटमैन समझकर जिसे दी 1 लाख डॉलर की सुपारी, वह निकला अमेरिकी एजेंट, जानिए पन्नू केस में कैसे दोषी साबित हुआ निखिल गुप्ता

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India News Live, Digital Desk: सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू का नाम एक बार फिर चर्चा में है। इस बार पन्नू के समर्थन में एक नया विवाद सामने आया है, जिसमें निखिल गुप्ता का नाम प्रमुख है। पहले यह समझा जा रहा था कि निखिल गुप्ता एक भारतीय हिटमैन है, जिसे पन्नू के विरोधियों ने एक लाख डॉलर की सुपारी दी थी। लेकिन मामले की गहरी जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि निखिल गुप्ता असल में एक अमेरिकी एजेंट था, जिसने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को धोखा दिया।

मामले की शुरुआत

निखिल गुप्ता और गुरपतवंत सिंह पन्नू का कनेक्शन कई महीने पहले सामने आया था जब गुप्ता के खिलाफ एक आरोप पत्र दाखिल किया गया था। गुप्ता पर यह आरोप था कि उसने पन्नू के खिलाफ एक साजिश को अंजाम देने के लिए भारतीय विरोधियों से एक लाख डॉलर की सुपारी ली थी। पहले इसे एक साधारण अपराध के तौर पर देखा गया, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, यह बात सामने आई कि गुप्ता की असल पहचान कुछ और थी।

एक लाख डॉलर की सुपारी का रहस्य

जब गुप्ता को पकड़ा गया और उससे पूछताछ की गई, तो पता चला कि उसे कालेहिस्तान के आंदोलन को बढ़ावा देने के लिए काम करने के लिए पैसे दिए गए थे। हालांकि, गुप्ता ने इस दौरान अपने असल इरादों को छुपाया और खुद को एक साधारण हिटमैन के रूप में पेश किया। उसे भारतीय एजेंट समझकर उसकी गतिविधियों को गंभीरता से लिया गया, लेकिन बाद में यह पता चला कि गुप्ता ने अमेरिकी सुरक्षा एजेंसी के लिए काम किया था।

अमेरिकी एजेंट की सच्चाई

गुप्ता को अब अमेरिकी संघीय अदालत में पेश किया गया है, जहां उसके खिलाफ कई गंभीर आरोप हैं। अदालत में उसकी पहचान और भूमिका पर गहन बहस हुई, और उसने अपनी असली पहचान को स्वीकार किया। उसने बताया कि कैसे वह कालेहिस्तान के आंदोलन के लिए काम कर रहा था और किस तरह से अमेरिकी एजेंट की भूमिका निभा रहा था। अदालत ने गुप्ता को दोषी ठहराते हुए उसे सजा देने का निर्णय लिया।

कालेहिस्तान आंदोलन से जुड़ी गंभीर साजिशें

गुरपतवंत सिंह पन्नू और कालेहिस्तान आंदोलन के अन्य समर्थकों के खिलाफ चल रही जांच में यह नया खुलासा एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है। अमेरिकी संघीय अदालत में गुप्ता की सच्चाई सामने आने के बाद यह सवाल उठता है कि कालेहिस्तान आंदोलन और उसके समर्थकों के बीच विदेशी एजेंटों का क्या कनेक्शन है। यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है, जो भारतीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।