भड़काऊ भाषण केस: अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को 'सुप्रीम' राहत; SC ने बताया क्यों नहीं दर्ज होगी FIR
India News Live,Digital Desk : सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेताओं अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को साल 2020 के कथित 'हेट स्पीच' (Hate Speech) मामले में बड़ी राहत दी है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि इन नेताओं के बयानों से कोई भी संज्ञेय अपराध (Cognizable Offense) नहीं बनता है।
यह मामला 2020 में दिल्ली के शाहीन बाग में चल रहे सीएए (CAA) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान दिए गए भाषणों से जुड़ा था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 3 बड़ी वजहें
1. किसी समुदाय विशेष पर प्रहार नहीं:
कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस निष्कर्ष से सहमति जताई जिसमें कहा गया था कि ये बयान किसी खास समुदाय के खिलाफ नहीं थे। अदालत के अनुसार, इन भाषणों ने न तो हिंसा भड़काई और न ही सार्वजनिक अव्यवस्था (Public Disorder) पैदा करने के लिए उकसाया।
2. स्वतंत्र आकलन और स्टेटस रिपोर्ट:
बेंच ने 26 फरवरी, 2020 को निचली अदालत में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री का सावधानीपूर्वक अध्ययन किया। कोर्ट ने पाया कि रिकॉर्ड में ऐसी कोई सामग्री नहीं है जिससे एफआईआर (FIR) दर्ज करने का पर्याप्त आधार बनता हो।
3. 'मंजूरी' के तर्क पर कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी:
निचली अदालत और हाईकोर्ट ने पहले इस आधार पर राहत दी थी कि एफआईआर के लिए 'सक्षम प्राधिकारी' से पूर्व मंजूरी (Prior Sanction) नहीं ली गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को थोड़ा स्पष्ट करते हुए कहा:
FIR दर्ज करने या जांच शुरू करने के लिए पूर्व मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती।
मंजूरी केवल संज्ञान (Cognizance) लेने के लिए जरूरी है।
हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि चूंकि अपराध ही नहीं बनता, इसलिए हाईकोर्ट के अंतिम फैसले (राहत देने) में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है।
क्या था विवाद?
माकपा (CPI-M) नेता वृंदा करात और के.एम. तिवारी ने आरोप लगाया था कि:
27 जनवरी 2020: अनुराग ठाकुर ने रिठाला की एक रैली में भड़काऊ नारे लगवाए थे।
28 जनवरी 2020: प्रवेश वर्मा ने शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसने पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया था।
हेट स्पीच पर कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
अपने 125 पन्नों के विस्तृत फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नफरत फैलाने वाले भाषण हमारे गणतंत्र के नैतिक ताने-बाने पर प्रहार करते हैं और भाईचारे के संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ हैं। हालांकि, कोर्ट ने माना कि मौजूदा कानून (IPC/CrPC) इन मुद्दों से निपटने के लिए पर्याप्त हैं और इस विशिष्ट मामले में आपराधिक कार्रवाई की जरूरत नहीं है।
इस फैसले के बाद अब अनुराग ठाकुर (पूर्व केंद्रीय मंत्री) और प्रवेश वर्मा (दिल्ली के मंत्री) को इस कानूनी लड़ाई से पूरी तरह मुक्ति मिल गई है।