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October 06 2026 11:27 pm

सपा ने अचानक बदले MLC चुनाव के 2 प्रत्याशी: गोरखपुर से संजयन त्रिपाठी और आगरा से डॉ. आकाश अग्रवाल को टिकट

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उत्तर प्रदेश विधान परिषद (शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र) के आगामी चुनावों को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बड़ा रणनीतिक दांव चलते हुए अपने दो घोषित उम्मीदवारों के नाम अचानक बदल दिए हैं। सपा की ओर से जारी आधिकारिक घोषणा के मुताबिक, आगरा शिक्षक खंड निर्वाचन क्षेत्र से प्रकाश चंद्र गुप्त (राम प्रकाश गुप्ता) का टिकट काटकर पूर्व एमएलसी डॉ. आकाश अग्रवाल को पार्टी का नया प्रत्याशी बनाया गया है। वहीं, गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पहले से तय प्रत्याशी कमलेश यादव की जगह डॉ. संजयन त्रिपाठी को समाजवादी पार्टी ने चुनावी मैदान में उतार दिया है।

अखिलेश यादव ने दोनों नए प्रत्याशियों—डॉ. आकाश अग्रवाल और डॉ. संजयन त्रिपाठी—का पार्टी में स्वागत किया। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व प्रत्याशी कमलेश यादव और प्रकाश चंद्र गुप्त, उनके परिजनों, समर्थकों और अब तक चुनाव प्रचार में डटे रहे कार्यकर्ताओं के प्रति आभार प्रकट करते हुए एकजुट होकर चुनाव लड़ने का आह्वान किया।

भाजपा के बागियों पर सपा का दांव: कैसे बदला सियासी समीकरण?

सपा द्वारा घोषित दोनों नए चेहरे हाल ही में भारतीय जनता पार्टी से बगावत कर चर्चा में आए थे। गोरखपुर-फैजाबाद सीट से भाजपा के प्रमुख दावेदार रहे डॉ. संजयन त्रिपाठी टिकट न मिलने पर खासे भावुक हो गए थे और उन्होंने अपनी गाड़ी से भाजपा का झंडा हटाकर निर्दलीय ताल ठोकने का ऐलान किया था। इस नाराजगी को तुरंत भांपते हुए अखिलेश यादव ने उन्हें सीधे सपा का सिंबल सौंप दिया।

ठीक इसी तरह, आगरा शिक्षक सीट पर पूर्व एमएलसी डॉ. आकाश अग्रवाल भाजपा से टिकट की दावेदारी कर रहे थे। भाजपा द्वारा अन्य नाम तय किए जाने के बाद सपा ने प्रकाश चंद्र गुप्त का टिकट बदलकर आकाश अग्रवाल को अपना उम्मीदवार बना दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव ने सीधे भाजपा खेमे में सेंधमारी करते हुए असंतुष्ट मजबूत चेहरों को अपने पाले में कर शिक्षक एमएलसी चुनाव को सीधे मुकाबले में तब्दील कर दिया है।

शिक्षकों के मुद्दे, OPS और शिक्षा व्यवस्था पर सरकार को घेरा

उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और योगी सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के 10 वर्षों के कार्यकाल में राज्य की स्कूली और उच्च शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह बदहाल हो चुकी है। पेपर लीक की लगातार घटनाओं और सरकारी भर्तियों में कथित भेदभाव के चलते युवाओं व शिक्षकों का भरोसा सिस्टम से उठ चुका है।

अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी शिक्षक एमएलसी चुनाव में शिक्षकों के अधिकारों को मुख्य मुद्दा बनाएगी। उन्होंने कहा कि तदर्थ शिक्षकों की बहाली, वित्तविहीन शिक्षकों का मानदेय, शिक्षामित्रों की समस्याएं और पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली जैसे मुद्दे सपा के चुनावी घोषणा पत्र का प्रमुख हिस्सा होंगे। सपा प्रमुख ने कहा कि पार्टी सीधे जनता और शिक्षकों के बीच जाकर भाजपा की कथित विफलता और दमनकारी नीतियों की पोल खोलेगी।

गोरखपुर में कानून-व्यवस्था पर तंज और किसान कर्जमाफी का वादा

प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने गोरखपुर का उदाहरण देते हुए कानून-व्यवस्था और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब गोरखपुर के एक नागरिक ने जलभराव की समस्या का वीडियो सोशल मीडिया पर डाला तो उस पर प्रशासन ने गुंडा एक्ट लगा दिया। संतकबीरनगर में पहलवान की हत्या का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में अपराध और पुलिस की कार्यशैली पर अब अदालतें भी सवाल उठा रही हैं।

किसानों के मुद्दे पर बोलते हुए अखिलेश ने याद दिलाया कि नेताजी (स्व. मुलायम सिंह यादव) के दौर में किसानों के कर्ज माफ किए गए थे। जब केंद्र और राज्य की नीतियां बड़े-बड़े उद्योगपतियों के अरबों रुपये के कर्ज माफ कर सकती हैं, तो देश के अन्नदाता किसानों के कर्ज क्यों नहीं माफ हो सकते? उन्होंने भरोसा दिलाया कि आगामी घोषणा पत्र में किसानों की संपूर्ण कर्जमाफी और गरीबों के मुफ्त इलाज की ठोस गारंटी शामिल होगी।