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September 23 2026 07:51 pm

नेटफ्लिक्स पर आते ही नंबर-1 बनी रवि तेजा की 'इरुमुडी', सिनेमाघरों में गदर मचाने के बाद ओटीटी पर तोड़े रिकॉर्ड

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साउथ सिनेमा का जादू इस वक्त बड़े पर्दे से लेकर ओटीटी प्लेटफॉर्म्स तक सिर चढ़कर बोल रहा है। हाल ही में सिनेमाघरों में शानदार कारोबार करने के बाद ओटीटी दिग्गज नेटफ्लिक्स (Netflix) पर रिलीज हुई साउथ सुपरस्टार रवि तेजा की फिल्म 'इरुमुडी' (Irumudi) ने डिजिटल दुनिया में जबरदस्त तहलका मचा दिया है। स्ट्रीमिंग शुरू होते ही यह फिल्म भारत के नेटफ्लिक्स ट्रेंडिंग चार्ट्स में नंबर-1 की गद्दी पर काबिज हो गई है। दर्शकों के साथ-साथ क्रिटिक्स की तरफ से भी इसे जबर्दस्त पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिल रहा है, और फिल्म को मशहूर रेटिंग प्लेटफॉर्म IMDb पर 7.1/10 की शानदार रेटिंग हासिल हुई है। अगर आप एक इमोशनल, रहस्यमयी और होश उड़ा देने वाली थ्रिलर फिल्म की तलाश में हैं, तो यह फिल्म आपकी वीकेंड वॉचलिस्ट के लिए बिल्कुल मुफीद है।

क्या है फिल्म 'इरुमुडी' की कहानी?

फिल्म 'इरुमुडी' की शुरुआत एक बेहद रहस्यमयी और इमोशनल दृश्य के साथ सड़क पर होती है। एक व्यक्ति सड़क से गुजरने वाली गाड़ियों को हाथ देकर रोकता है और ड्राइवरों से गुजारिश करता है कि वे हॉर्न न बजाएं क्योंकि उसकी छोटी बच्ची सो रही है। ज्यादातर लोग उसकी बात मानकर चले जाते हैं, लेकिन एक ट्रक ड्राइवर जानबूझकर तेज आवाज में हॉर्न बजाकर उसका मजाक उड़ाता है। इसी मोड़ पर सीन में दमदार एंट्री होती है तिरुनाथ (रवि तेजा) की, जो उस ड्राइवर की जमकर धुनाई कर देता है।

इसके बाद कहानी फ्लैशबैक में चली जाती है, जहां तिरुनाथ का बीता हुआ जीवन दिखाया जाता है। तिरुनाथ और उसकी पत्नी कावेरी शादी के चार साल बीत जाने के बाद भी माता-पिता बनने के सुख से वंचित होते हैं। इसी बीच तिरुनाथ की मुलाकात अपने गुरु गोपीराज से होती है, जो उन्हें भगवान अय्यप्पा स्वामी की कठिन पूजा और व्रत रखने की सलाह देते हैं। भगवान की कृपा और मन्नत से तिरुनाथ के आंगन में एक नन्हीं बेटी जन्म लेती है, जिसका नाम वे मणिकर्ण (मणि) रखते हैं। मणि तिरुनाथ की जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा और उसकी जान बन जाती है।

गांव का माहौल, स्कूल की टीचर और छेड़खानी करने वाले गुंडे

जैसे-जैसे मणि बड़ी होती है, वह स्कूल जाने लगती है। जब उसे आगे की पढ़ाई के लिए गांव से दूर के स्कूल जाना पड़ता है, तो आने-जाने की कोई सरकारी व्यवस्था नहीं होती। अपनी बेटी और गांव की अन्य बच्चियों की सुरक्षा के लिए तिरुनाथ सीधे स्थानीय मंत्री से मिलकर गांव के बच्चों के लिए बस की व्यवस्था करवाता है।

इसी दौरान कहानी में कुछ असामाजिक तत्वों की एंट्री होती है। गांव के चार आवारा लड़के नशे के आदी हैं और स्कूल जाने वाली लड़कियों को रास्ते में छेड़ते हैं। जब यह बात तिरुनाथ तक पहुंचती है, तो वह उन मनचलों को कड़ा सबक सिखाता है। कुछ समय बाद उनमें से एक लड़के की हत्या हो जाती है, और पूरा गांव शक की सुई तिरुनाथ की तरफ घुमा देता है, हालांकि वह मर्डर तिरुनाथ ने नहीं किया होता है।

कहानी में एक और बड़ा मोड़ तब आता है जब स्कूल की एक भ्रष्ट और क्रूर महिला टीचर अपनी पुरानी सजा काटकर वापस लौटती है। यह वही टीचर होती है जिसने पहले भी एक मासूम छात्रा को प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए मजबूर किया था। वह टीचर गुरु गोपीराज की बेटी गायत्री और एक अन्य लड़की को ट्यूशन पढ़ाने के बहाने अपने घर बुलाती है। घर पर गायत्री के साथ बेहद शर्मनाक हरकत की कोशिश की जाती है, और जब वह रोते हुए अपमानित होकर लौट रही होती है, तभी रास्ते में वही गुंडे उसके सामने आ जाते हैं।

मणि की दर्दनाक मौत और कहानी का सबसे बड़ा सस्पेंस

उधर उसी रात, तिरुनाथ अपनी बेटी मणि से शराब न पीने का वादा करके भगवान अय्यप्पा की पूजा में शामिल होने निकलता है। रास्ते में कुछ गुंडे अचानक तिरुनाथ पर हमला कर देते हैं। ठीक उसी वक्त तिरुनाथ के फोन पर उसकी नन्हीं बेटी मणि की कॉल आती है, लेकिन हमलावर उसका फोन छीनकर जमीन पर पटक कर तोड़ देते हैं और वह अपनी बेटी की बात नहीं सुन पाता।

अगली सुबह गांव में हड़कंप मच जाता है जब गुरु गोपीराज की बेटी गायत्री घर नहीं लौटती। थोड़ी देर बाद खबर फैलती है कि गांव के बाहर एक लड़की की क्षत-विक्षत लाश मिली है। पूरा गांव दौड़कर मौके पर पहुंचता है, लेकिन यहीं फिल्म का सबसे रोंगटे खड़े कर देने वाला ट्विस्ट सामने आता है। वह लाश गायत्री की नहीं, बल्कि तिरुनाथ की जान से प्यारी मन्नत वाली बेटी मणि की होती है!

बेटी के शव को देखकर तिरुनाथ का मानसिक संतुलन डगमगा जाता है। वह इस सच को स्वीकार ही नहीं कर पाता कि उसकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं है। तभी दर्शकों को फिल्म के पहले दृश्य का असली दर्द समझ आता है, जब वह सड़क पर गाड़ियों को रोककर कह रहा था कि हॉर्न मत बजाओ, मेरी बच्ची सो रही है।

कातिल की तलाश और क्लाइमेक्स जो उड़ा देगा होश

बेटी को खोने के बाद तिरुनाथ के जीवन का केवल एक ही मकसद बचता है—अपनी मासूम बच्ची के हत्यारे को बेनकाब करना और उसे मौत के घाट उतारना। तिरुनाथ अपने उसी टूटे हुए फोन को ठीक करवाता है, जो हमले के वक्त टूटा था। कॉल रिकॉर्डिंग से उसे उस रात का खौफनाक सच पता चलता है, क्योंकि मणि ने दम तोड़ने से पहले अपने कातिल का नाम पुकारा था।

जब कातिल का चेहरा और असली वजह सामने आती है, तो दर्शकों के पैरों तले जमीन खिसक जाती है। तिरुनाथ सीधे अपने गुरु गोपीराज के सामने जाकर खड़ा हो जाता है और उससे हिसाब मांगता है। शुरुआत से लेकर अंत तक जिस घटना पर दर्शकों को गुंडों या टीचर पर शक होता है, क्लाइमेक्स में वह पूरी कहानी एकदम अलग ही दिशा में मुड़ जाती है।

ओटीटी पर क्यों हो रही है इतनी तारीफ?

फिल्म 'इरुमुडी' केवल एक थ्रिलर नहीं है, बल्कि यह एक पिता और बेटी के अटूट रिश्ते की बेहद भावुक दास्तान है। रवि तेजा ने तिरुनाथ के किरदार में एक बेबस पिता के दर्द, गुस्से और बदले की आग को अपने अभिनय से जीवंत कर दिया है।

फिल्म की पटकथा इतनी कसी हुई है कि यह दर्शकों को 2 घंटे से ज्यादा समय तक पलक झपकाने का मौका नहीं देती। बैकग्राउंड म्यूजिक, ग्रामीण पृष्ठभूमि की सिनेमैटोग्राफी और भावनात्मक उतार-चढ़ाव इस फिल्म को बेहद खास बनाते हैं। अगर आपने अब तक यह फिल्म नहीं देखी है, तो नेटफ्लिक्स पर यह फिल्म मस्ट-वॉच कैटेगरी में शामिल है।