BREAKING:
September 09 2026 03:39 am

28 अगस्त को भद्रा के साए से पूरी तरह मुक्त रहेगा रक्षाबंधन, बन रहे हैं 7 दुर्लभ महायोग

Post

भाई-बहन के अटूट विश्वास, स्नेह और पारिवारिक सुरक्षा का महापर्व रक्षाबंधन इस वर्ष 28 अगस्त को अत्यंत धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाए जाने वाले इस पावन पर्व को लेकर इस बार श्रद्धालुओं और बहनों के लिए सबसे बड़ी और राहत भरी खबर यह है कि त्योहार के पूरे दिन भद्रा का कोई साया नहीं रहेगा। वर्षों बाद ऐसा अद्भुत खगोलीय और ज्योतिषीय संयोग बना है जब रक्षाबंधन का पर्व पूरी तरह से भद्रा-मुक्त रहेगा और इस दिन एक साथ 7 अत्यंत शुभ और मंगलकारी महायोगों का निर्माण हो रहा है। ज्योतिषविदों के अनुसार, इन दिव्य योगों में भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधने से भाई की दीर्घायु, यश, पद-प्रतिष्ठा और दोनों के जीवन में सुख-समृद्धि की अपार वृद्धि होगी।

भद्रा का साया समाप्त: 28 अगस्त को क्यों मनाया जा रहा है रक्षाबंधन?

रक्षाबंधन के पर्व पर हर वर्ष सबसे बड़ा असमंजस भद्रा काल को लेकर होता है, क्योंकि शास्त्रों का स्पष्ट आदेश है कि 'भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा' यानी भद्रा काल में न तो श्रावणी उपाकर्म (रक्षाबंधन) करना चाहिए और न ही होलिका दहन।

पंचांग गणना के अनुसार, श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह 09:08 बजे से प्रारंभ होकर 28 अगस्त की सुबह 09:48 बजे तक रहेगी। हालांकि, 27 अगस्त को पूर्णिमा के साथ ही भद्रा का प्रवेश हो गया था जो उसी रात लगभग 09:34 बजे समाप्त हो गया। धर्मसिंधु और निर्णय सिंधु ग्रंथों के अनुसार, जब पूर्णिमा तिथि उदयातिथि में विद्यमान हो और भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो चुकी हो, तो उसी दिन रक्षाबंधन का पर्व शास्त्रसम्मत माना जाता है। 28 अगस्त के सूर्योदय के समय पूरा वातावरण भद्रा के दोष से मुक्त है, इसलिए पूरा देश 28 अगस्त को ही यह पावन पर्व मना रहा है।

राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त: सुबह से दोपहर तक का समय चक्र

28 अगस्त को प्रातः काल से ही बहनों के पास अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए एक बेहद पवित्र और लंबा समय उपलब्ध रहेगा:

प्रातःकालीन मुख्य शुभ मुहूर्त: सुबह 05:57 बजे से लेकर सुबह 09:48 बजे तक (अवधि: लगभग 3 घंटे 51 मिनट)। इस दौरान श्रावण पूर्णिमा तिथि पूर्ण रूप से विद्यमान रहेगी।

अमृत और शुभ चौघड़िया मुहूर्त: सुबह 05:57 बजे से सुबह 07:32 बजे तक 'चर' चौघड़िया, सुबह 07:32 बजे से सुबह 09:08 बजे तक 'लाभ' चौघड़िया और सुबह 09:08 बजे से सुबह 10:43 बजे तक 'अमृत' चौघड़िया रहेगा।

अपराह्न काल (दोपहर का वैकल्पिक समय): यदि किसी कारणवश परिवार सुबह के मुहूर्त में अनुष्ठान पूरा नहीं कर पाते हैं, तो दोपहर 01:30 बजे से शाम 04:00 बजे के बीच अपराह्न काल में भी रक्षा सूत्र बांधा जा सकता है, क्योंकि उदयातिथि के प्रभाव से पूरे दिन पूर्णिमा का पुण्य प्रभाव बना रहता है।

वर्जित समय (राहुकाल): सुबह 10:45 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक राहुकाल रहेगा। इस समयावधि में राखी बांधने या कोई भी नया मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए।

रक्षाबंधन पर बन रहे 7 दुर्लभ शुभ योग और उनका प्रभाव

28 अगस्त का दिन आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से एक असाधारण दिन बन गया है क्योंकि इस दिन ग्रहों और नक्षत्रों के संयोग से 7 महायोग बन रहे हैं:

शोभन योग: यह योग संबंधों में आकर्षण, प्रेम, सौहार्द और परिवार में शांति का कारक माना जाता है।

सर्वार्थ सिद्धि योग: इस योग में किए गए सभी धार्मिक संकल्प और अनुष्ठान निश्चित रूप से सफल और फलदायी होते हैं।

रवि योग: सूर्य के प्रभाव से युक्त यह योग समस्त नकारात्मक ऊर्जाओं और दोषों को भस्म करने की शक्ति रखता है।

शतभिषा नक्षत्र का मंगल संयोग: शतभिषा नक्षत्र आरोग्यता, दीर्घायु और शारीरिक बल प्रदान करने वाला नक्षत्र है।

बुधादित्य राजयोग: सूर्य और बुध की युति से बनने वाला यह योग भाइयों के करियर, व्यापार और बौद्धिक विकास में अप्रत्याशित सफलता दिलाता है।

गजकेसरी योग का सूक्ष्म प्रभाव: गुरु और चंद्रमा के प्रभाव से यह योग आर्थिक समृद्धि और धन के निरंतर प्रवाह को सुनिश्चित करता है।

गायत्री जयंती और संस्कृत दिवस का महासंयोग: इस दिन श्रावण पूर्णिमा के साथ-साथ गायत्री जयंती, नारली पूर्णिमा और विश्व संस्कृत दिवस का पावन संगम है, जो इस दिन के आध्यात्मिक महत्व को कई गुना बढ़ा देता है।

रक्षा सूत्र बांधने की संपूर्ण वैदिक विधि और पूजन थाली

रक्षाबंधन के दिन बहनों को स्नान के बाद स्वच्छ पीले, लाल या केसरिया वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा की थाली को सुंदर ढंग से सजाएं जिसमें निम्नलिखित सामग्रियां अवश्य शामिल हों:

पूजा थाली की सामग्री: कुमकुम/रोली, शुद्ध चंदन, अक्षत (अखंडित चावल), दीपक, ताजी मिठाइयां, दूर्वा घास, रक्षा सूत्र (राखी), सूखा नारियल (गोला) और जल का पात्र।

बैठने की सही दिशा: भाई को हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके लकड़ी की चौकी या स्वच्छ आसन पर बैठाएं। बहन का मुख पश्चिम या दक्षिण की ओर होना चाहिए।

तिलक और अक्षत: सबसे पहले भाई के माथे पर अनामिका उंगली से रोली और चंदन का तिलक लगाएं और उसके ऊपर अक्षत लगाएं। अक्षत भाई की विजय और संपन्नता का प्रतीक है।

रक्षा सूत्र बंधन: भाई की दाहिनी कलाई पर तीन गांठें लगाते हुए रक्षा सूत्र बांधें। राखी बांधते समय इस प्रसिद्ध वैदिक रक्षा मंत्र का उच्चारण अवश्य करें: "येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।"

आरती और मिष्ठान: इसके बाद शुद्ध घी के दीपक से भाई की आरती उतारें ताकि सभी बुरी नजरों और नकारात्मक प्रभावों से उसकी रक्षा हो सके। अंत में भाई को मिठाई खिलाएं और सूखा नारियल भेंट करें। भाई अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा अनुसार बहन को उपहार दें और उसके पैर छूकर आशीर्वाद लें।

राखी बांधते समय इन 5 महत्वपूर्ण गलतियों से बचें

शास्त्रों के अनुसार रक्षाबंधन का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए कुछ सावधानियां रखना अनिवार्य है:

काले रंग की राखी का प्रयोग न करें: रक्षा सूत्र हमेशा लाल, पीले, नारंगी या रेशमी धागे का होना चाहिए। काले, नीले या गहरे भूरे रंग के धागे और प्लास्टिक की खंडित राखियों से परहेज करें।

सिर खुला न रखें: राखी बंधवाते समय भाई को कभी भी नंगे सिर नहीं बैठना चाहिए। सिर पर रुमाल, साफा या टोपी अवश्य रखें।

दक्षिण दिशा में मुख न करें: भाई का मुख कभी भी दक्षिण दिशा की ओर नहीं होना चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा यम की दिशा मानी जाती है।

खंडित अक्षत का प्रयोग न करें: तिलक लगाते समय ध्यान रखें कि चावल के दाने टूटे हुए न हों।

प्लास्टिक और नुकीली वस्तुएं: पूजा थाली में कैंची, सेफ्टी पिन या कोई भी धारदार धातु न रखें।

एनआरआई और दूरदराज रहने वाले परिवारों के लिए समन्वय

जो भाई-बहन भौगोलिक दूरियों के कारण एक साथ नहीं हैं, वे वीडियो कॉल या डिजिटल माध्यम से शुभ मुहूर्त के समय इस अनुष्ठान को संपन्न कर सकते हैं। बहनें भाई के चित्र या भगवान श्रीकृष्ण को साक्षी मानकर रक्षा सूत्र अर्पित कर सकती हैं और बाद में डाक से भेजी गई राखी को भाई अपने स्थानीय समय अनुसार सुबह के शुभ चौघड़िया में कलाई पर बांध सकते हैं।

28 अगस्त 2026 का यह रक्षाबंधन भद्रा के भय से मुक्त होकर पूरे देश और दुनिया में भारतीय परिवारों के बीच प्रेम, एकता और अटूट विश्वास का नया उजाला लेकर आ रहा है।