राघव चड्ढा vs AAP: "मजबूत रिश्ते थे कुछ कमजोर लोगों से", राघव चड्ढा के बहाने BJP का केजरीवाल पर बड़ा तंज
India News Live,Digital Desk : आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मची अंदरूनी कलह अब खुलकर सड़क पर आ गई है। पार्टी ने अपने सबसे चर्चित चेहरों में से एक, राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर (उप-नेता) के पद से हटा दिया है। इतना ही नहीं, पार्टी नेतृत्व ने उनकी वफादारी पर भी सवाल उठाए हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चुटकी लेते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला है।
बीजेपी का प्रहार: "केजरीवाल को योग्य नेताओं से डर लगता है"
दिल्ली भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने 'आप' के इस फैसले पर तंज कसते हुए इसे अलोकतांत्रिक करार दिया। उनके बयान की मुख्य बातें:
अलोकतांत्रिक कदम: सचदेवा ने कहा कि पद से हटाना पार्टी का आंतरिक मामला हो सकता है, लेकिन राज्यसभा सचिवालय को यह पत्र लिखना कि "राघव चड्ढा को बोलने की अनुमति न दी जाए", पूरी तरह अलोकतांत्रिक है। हर सांसद को सदन में अपनी बात रखने का अधिकार है।
इतिहास का हवाला: भाजपा ने पुरानी फेहरिस्त गिनाते हुए कहा कि अरविंद केजरीवाल ने हमेशा उन नेताओं को किनारे किया जो उनसे ज्यादा लोकप्रिय या तेजतर्रार हुए। उन्होंने अन्ना हजारे, प्रशांत भूषण, आशुतोष और स्वाति मालिवाल का उदाहरण दिया।
शायराना तंज: सचदेवा ने राघव चड्ढा की स्थिति पर तंज कसते हुए कहा— "बहुत मजबूत रिश्ते थे कुछ कमजोर लोगों से..."। उन्होंने कहा कि केजरीवाल केवल उन लोगों को पसंद करते हैं जो उनके सामने सिर न उठाएं।
राघव चड्ढा का पलटवार: "मैं घायल हूं, इसलिए घातक हूं"
पद से हटाए जाने और वफादारी पर सवाल उठने के बाद राघव चड्ढा ने भी आक्रामक रुख अपना लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया और बयानों के जरिए अपनी बात रखी:
साजिश का आरोप: चड्ढा ने कहा कि उनके खिलाफ पार्टी के भीतर एक गहरी साजिश रची गई है और एक ही झूठ को बार-बार फैलाया जा रहा है।
वफादारी पर सफाई: उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि कोई एक उदाहरण दिखाएं जहां उन्होंने विपक्ष या पार्टी के स्टैंड का साथ न दिया हो। इसकी सच्चाई राज्यसभा के सीसीटीवी फुटेज से जांची जा सकती है।
संसदीय मर्यादा: चड्ढा ने कहा, "मैं संसद में जनता के मुद्दे उठाने गया हूं, चीखने-चिल्लाने या कुर्सियां फेंकने नहीं।" उन्होंने साफ किया कि वह हर झूठ का पर्दाफाश करेंगे।
कैसे खराब हुए रिश्ते? (विवाद के मुख्य बिंदु)
आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच दूरियां बढ़ने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं:
संसद में कम आक्रामकता: पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि राघव चड्ढा सदन में भाजपा सरकार के खिलाफ उतने आक्रामक नहीं रहे, जितनी पार्टी अपेक्षा करती थी।
निजी वफादारी पर शक: हाल के दिनों में उनके कुछ बयानों और पार्टी की मुख्य गतिविधियों से उनकी अनुपस्थिति को लेकर सवाल खड़े किए गए।
लोकप्रियता का टकराव: राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चड्ढा की बढ़ती राष्ट्रीय लोकप्रियता और दिल्ली/पंजाब के बाहर उनके बढ़ते प्रभाव से पार्टी का एक धड़ा असहज महसूस कर रहा था।