मरीज जल रहे थे, कर्मचारी बैग लेकर भाग रहे थे दुकान की चाबियों की 30 मिनट तक तलाश की गई: जयपुर में हुई 6 मौतों का 'आधिकारिक सच'

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India News Live, Digital Desk :राजस्थान की राजधानी जयपुर के सरकारी अस्पताल में लगी आग ने सिस्टम की बड़ी लापरवाही उजागर कर दी है। Sawai Man Singh Hospital (SMS Hospital) के ट्रॉमा सेंटर में लगी आग की जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। इस हादसे में 6 मरीजों की मौत हो गई थी।

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30 मिनट तक नहीं मिली स्टोर की चाबी

जांच रिपोर्ट के अनुसार, आग लगने के बाद हालात बेहद अफरातफरी वाले थे।

मरीजों को सुरक्षित निकालने में देरी हुई

स्टाफ के कुछ सदस्य जरूरी उपकरण छोड़कर बाहर निकल गए

फायर सेफ्टी उपकरणों वाले स्टोर की चाबी करीब 30 मिनट तक ढूंढी जाती रही

रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि समय पर अग्निशमन उपकरण उपलब्ध हो जाते, तो नुकसान कम हो सकता था।

क्या थी आग की वजह?

प्राथमिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग का संभावित कारण बताया गया है। ट्रॉमा सेंटर में धुआं तेजी से फैल गया, जिससे ICU और वार्ड में भर्ती गंभीर मरीजों को निकालना मुश्किल हो गया।

कई मरीज वेंटिलेटर पर थे, जिन्हें समय पर शिफ्ट नहीं किया जा सका।

लापरवाही या सिस्टम फेल?

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि:

फायर अलार्म सिस्टम सही तरीके से काम नहीं कर रहा था

इमरजेंसी ड्रिल नियमित रूप से नहीं कराई गई

स्टाफ को आग से निपटने की पर्याप्त ट्रेनिंग नहीं थी

इन खामियों ने हादसे को और भयावह बना दिया।

सरकार का क्या कहना है?

राज्य सरकार ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है। साथ ही प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में फायर सेफ्टी ऑडिट कराने का निर्देश दिया गया है।

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सवाल जो उठ रहे हैं

क्या अस्पतालों में फायर सेफ्टी सिर्फ कागजों तक सीमित है?

क्या नियमित मॉक ड्रिल और ऑडिट होते हैं?

गंभीर मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?

इस हादसे ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।