ऑपरेशन सिंदूर: जासूसी के आरोपी देवेंद्र सिंह को हाई कोर्ट से मिली जमानत, सबूतों के अभाव में पंजाब और हरियाणा कोर्ट ने उठाया सवाल
India News Live,Digital Desk : पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने भारतीय सेना के 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोपी देवेंद्र सिंह को जमानत दे दी है। जस्टिस विनोद एस भारद्वाज की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सका कि संवेदनशील जानकारी वास्तव में पाकिस्तान के साथ साझा की गई थी।
क्या था मामला?
यह मामला मई 2025 का है, जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों के खिलाफ 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया था। देवेंद्र सिंह पर आरोप था कि उसने इस ऑपरेशन से जुड़ी गोपनीय जानकारी और सेना की गतिविधियों के वीडियो पाकिस्तानी संपर्कों के साथ साझा किए थे।
गिरफ्तारी की शुरुआत: देवेंद्र सिंह पुलिस की रडार पर सबसे पहले आर्म्स एक्ट के तहत आया था। उसने फेसबुक पर पिस्टल और गन के साथ अपनी तस्वीरें कथित तौर पर अपलोड की थीं।
जासूसी का शक: आर्म्स एक्ट में जांच के दौरान पुलिस ने उसका फोन जब्त किया, जिसके बाद पूछताछ में उसके पाकिस्तानी संबंधों का खुलासा होने का दावा किया गया।
कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार और जांच एजेंसियों से कई तीखे सवाल पूछे:
सबूतों का अभाव: कोर्ट ने पूछा कि क्या ऐसा कोई ठोस वीडियो या डिजिटल साक्ष्य मिला है जो यह साबित करे कि सेना से संबंधित सामग्री पाकिस्तान भेजी गई थी? राज्य इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सका।
ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट (OSA): कोर्ट ने नोट किया कि इस मामले में ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत आवश्यक मंजूरी अभी तक नहीं मिली थी, जिसके कारण ट्रायल आगे नहीं बढ़ पा रहा था।
समय का अंतर: देवेंद्र के वकील ने तर्क दिया कि कथित बातचीत 18 अप्रैल से 10 मई के बीच हुई थी, जबकि ऑपरेशन 9 मई 2025 को ही पूरा हो गया था। वकील के अनुसार, ऑपरेशन शुरू होने के बाद किसी भी तरह की बातचीत के सबूत नहीं हैं।
आरोपी की पृष्ठभूमि और संपर्क
अभियोजन पक्ष के अनुसार, देवेंद्र नवंबर 2024 में करतारपुर साहिब और ननकाना साहिब की तीर्थयात्रा पर गया था। आरोप है कि वहां वह शाह जी, राशिद मोहम्मद, अर्सलान और रिजा नाम की महिला के संपर्क में आया था, जिनके बारे में संदेह है कि वे जासूसी नेटवर्क का हिस्सा थे। पुलिस का दावा था कि देवेंद्र के फोन से सेना के वाहनों के वीडियो मिले हैं और उसने गिरफ्तारी के डर से कुछ डेटा डिलीट भी कर दिया था।
फैसला: क्यों मिली जमानत?
कोर्ट ने आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि आर्म्स एक्ट के पुराने मामले के अलावा देवेंद्र का कोई पिछला आपराधिक इतिहास नहीं है। साथ ही, जांच एजेंसी यह दिखाने में विफल रही कि बरामद सामग्री वास्तव में सीमा पार साझा की गई थी।