लाल आतंक के गढ़ में 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप': जब डीआरजी के जवानों ने जंगल में बिछाया जाल, नक्सलियों के पैरों तले खिसकी जमीन...
India News Live,Digital Desk : बस्तर के घने जंगलों में पिछले कई दशकों से जारी खूनी खेल अब अपने अंतिम पड़ाव पर नजर आ रहा है। सुरक्षाबलों ने माओवादी हिंसा को जड़ से खत्म करने के लिए 'जंगल का उल्टा खेल' शुरू कर दिया है, जिसमें शिकारी खुद शिकार बन रहे हैं। हाल ही में डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) के जांबाज जवानों ने रणनीतिक सूझबूझ का परिचय देते हुए नक्सलियों को उनके ही सुरक्षित ठिकानों पर घेर लिया। इस मुठभेड़ ने यह साफ कर दिया है कि अब जंगलों में माओवादियों की समानांतर सरकार का अंत निकट है।
डीआरजी की अचूक रणनीति: बैकफुट पर माओवादी कैडर
अमर उजाला को मिली जानकारी के अनुसार, नक्सलियों ने सुरक्षाबलों को एम्बुश में फंसाने की साजिश रची थी, लेकिन डीआरजी के जवानों ने इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर बाजी पलट दी। जवानों ने रात के अंधेरे और ऊबड़-खाबड़ रास्तों का फायदा उठाते हुए नक्सलियों के कोर इलाके में घुसपैठ की और उन्हें तीन तरफ से घेर लिया। यह घेराबंदी इतनी जबरदस्त थी कि माओवादियों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। जंगल के जिस इलाके को नक्सली अपना अभेद्य किला मानते थे, आज वहीं वे अपनी जान बचाने के लिए भागते फिर रहे हैं।
माओवादी हिंसा का अंत: विकास की ओर बढ़ता बस्तर
कभी बारूद की गंध और गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंजने वाले बस्तर के जंगलों में अब शांति की बयार बहने लगी है। सरकार और सुरक्षाबलों के साझा प्रयासों ने नक्सलियों की सप्लाई चेन और भर्ती नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। डीआरजी के इस ताजा एक्शन से न केवल माओवादियों का मनोबल टूटा है, बल्कि स्थानीय आदिवासियों में भी सुरक्षा का भाव जागा है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की बढ़ती संख्या और मुठभेड़ में मिल रही सफलताएं इस बात का प्रमाण हैं कि हिंसा का यह काला अध्याय अब बंद होने वाला है।
जंगल का 'उल्टा खेल' और जवानों का जज्बा
इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें 'गुरिल्ला वॉरफेयर' का जवाब उसी की भाषा में दिया गया। डीआरजी के जवान, जिनमें से कई पूर्व माओवादी या स्थानीय युवक हैं, जंगल की रग-रग से वाकिफ हैं। उन्होंने नक्सलियों के पारंपरिक छिपने के ठिकानों को ही उनके लिए पिंजरा बना दिया। अधिकारियों का कहना है कि जब तक आखिरी माओवादी हथियार नहीं डाल देता या उसका सफाया नहीं हो जाता, तब तक यह अभियान इसी आक्रामकता के साथ जारी रहेगा।