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May 03 2026 11:43 am

राज्य मेला घोषित करने के लिए नई गाइडलाइन लागू

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India News Live,Digital Desk : राज्य सरकार ने नगरीय निकायों में आयोजित होने वाले धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को राजकीय मेला घोषित करने की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और संगठित बनाने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू कर दी है।

अब किसी आयोजन को राजकीय मेला घोषित कराने के लिए केवल जनसैलाब ही काफी नहीं होगा, बल्कि आयोजन का धार्मिक, पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व भी सिद्ध करना होगा। साथ ही, मेले में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं या पर्यटकों की न्यूनतम संख्या पांच लाख होना अनिवार्य कर दी गई है।

नगर विकास विभाग की इस नई व्यवस्था के तहत जिलाधिकारी (DM) की अध्यक्षता में गठित समिति मेला घोषित करने के लिए प्रस्ताव भेजेगी। प्रस्ताव में मेले की अवधि, उसका स्वरूप (राज्य स्तरीय या अंतरराष्ट्रीय), आयोजन स्थल का नक्शा, अवस्थापना सुविधाएं, आयोजन समिति की जानकारी और ऐतिहासिकता से संबंधित प्रमाण देना जरूरी होगा।

महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी नए स्थल पर मेले का प्रस्ताव नहीं भेजा जा सकेगा। केवल राजकीय या आयोजन निकाय की भूमि पर ही आयोजन को मंजूरी दी जाएगी।

अर्थिक सहायता का निर्धारण श्रद्धालुओं की संख्या के आधार पर:

मेले में भाग लेने वाले लोगों की संख्या के हिसाब से सरकार आर्थिक मदद देगी, जो ₹25 लाख से ₹1.5 करोड़ तक हो सकती है:

5 से 10 लाख श्रद्धालु: ₹25–50 लाख

10 से 20 लाख श्रद्धालु: ₹50–75 लाख

20 से 40 लाख श्रद्धालु: ₹75 लाख–₹1 करोड़

40 से 60 लाख श्रद्धालु: ₹1 करोड़–₹1.25 करोड़

60 लाख से अधिक श्रद्धालु: ₹1.25 करोड़–₹1.5 करोड़

SOP के अनुसार, खर्च की भरपाई मेले की आय या CSR (कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) फंड से की जाएगी। अन्य विभागों के कार्य उनके ही बजट से पूरे होंगे। जरूरत पड़ने पर डीएम शासन से अतिरिक्त धन की मांग कर सकते हैं।

निरीक्षण और पारदर्शिता की व्यवस्था:

राज्य सरकार द्वारा दी गई राशि से होने वाले कार्यों का थर्ड पार्टी निरीक्षण अनिवार्य होगा। इसके लिए डीएम एजेंसी तय करेंगे और निरीक्षण रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।

यह नई व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि केवल भीड़ नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक मूल्यों वाले आयोजन ही राज्य मान्यता प्राप्त करें।