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May 02 2026 05:20 pm

हिमाचल में कुदरत का कहर,मंडी में बादल फटा, 62 की मौत, 56 अब भी लापता

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India News Live,Digital Desk : हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में बादल फटने और अचानक आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 62 हो गई है, जबकि 56 लोग अभी भी लापता हैं। मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात को हुई इस त्रासदी ने पूरे इलाके में तबाही मचा दी। प्रशासन और राहत एजेंसियां ​​लगातार लापता लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आपदा प्रभावित क्षेत्र स्याठी गांव (धर्मपुर) का दौरा किया और विशेष राहत पैकेज की घोषणा की। उन्होंने पशुधन और गौशालाओं के नुकसान के लिए अतिरिक्त मुआवजे का भी वादा किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के घर नष्ट हो गए हैं, उन्हें सरकार जमीन देगी, चाहे वह वन विभाग के अधीन ही क्यों न हो।

इन जिलों में चेतावनी: 
मंगलवार को राज्य में बादल फटने की 11 घटनाएं, बाढ़ की 4 घटनाएं और भूस्खलन की एक घटना सामने आई, जिसमें मंडी जिले में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। मौसम विभाग ने चंबा, कुल्लू, मंडी, कांगड़ा और शिमला जिलों में अचानक बाढ़ की चेतावनी जारी की है, जिससे राहत कार्यों में बाधा आने की आशंका है।

मंडी में 151 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं, 489 ट्रांसफार्मर और 465 पेयजल परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। अब तक राज्य भर में 245 सड़कें बंद हैं, 918 ट्रांसफार्मर खराब हैं और 3,698 पेयजल परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं।

इस आपदा में अब तक 148 घर, 104 पशुबाड़े, 14 पुल और 31 वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं। 162 मवेशी मारे गए हैं, जबकि 370 लोगों को बचाया गया है, जिनमें से 316 मंडी के हैं।

'खेती वाले इलाकों में भी भूस्खलन चिंता का विषय' 
मुख्यमंत्री सुखू ने नुकसान का आकलन करने के लिए हवाई सर्वेक्षण किया और राहत सामग्री भी वितरित की। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी तबाही पहले कभी नहीं देखी गई और खेती वाले इलाकों में भी भूस्खलन चिंता का विषय है, जिसके लिए वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत है। मंडी जिले के सिराज क्षेत्र से विधायक और विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने आशंका जताई है कि लापता लोगों की संख्या और बढ़ सकती है। उन्होंने राशन को हवाई मार्ग से पहुंचाने की भी मांग की है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) की टीमें घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं।