चंदा चोरी विवाद पर राम मंदिर के पहले CEO जीतेंद्र मिश्र का बड़ा बयान, 'ऑपरेशन सिंदूर' का जिक्र...
अयोध्या के भव्य श्रीराम मंदिर में हाल के महीनों में दान पेटियों से नकदी गायब होने के आरोपों, एसआईटी की आठ गिरफ्तारियों और ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों के इस्तीफों के बाद मचे प्रशासनिक भूचाल के बीच भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र ने मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के रूप में कमान संभाल ली है। मंदिर के इतिहास में पहली बार कॉरपोरेट और सैन्य अनुशासन का समन्वय करने पहुंचे जीतेंद्र मिश्र ने पदभार संभालने के साथ ही विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे 'चंदा चोरी' के तीखे आरोपों और पिछली प्रशासनिक चूकों पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। 'ऑपरेशन सिंदूर' में भारतीय वायुसेना की पश्चिमी कमान का कुशल नेतृत्व करने वाले इस जांबाज रिटायर्ड सैन्य कमांडर ने दो टूक शब्दों में कहा कि मंदिर प्रशासन को अतीत के विवादों से कड़ा सबक लेना चाहिए, लेकिन उस बोझ को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अयोध्या में किसी व्यक्तिगत रणनीति को थोपने नहीं, बल्कि सैन्य अनुशासन, पारदर्शिता और टीम भावना के जरिए रामलला के भक्तों की सेवा करने आए हैं।
'अतीत से सबक लेंगे, लेकिन बोझ हावी नहीं होने देंगे': चंदा विवाद पर दो टूक
राम मंदिर के चढ़ावा कक्ष से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत पूरे विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे चंदा चोरी के आरोपों पर जब नवनियुक्त सीईओ से सवाल किया गया, तो उनका दृष्टिकोण एक सधे हुए कमांडर जैसा नजर आया।
जीतेंद्र मिश्र ने बिना किसी लाग-लपेट के कहा, "हमें अतीत की घटनाओं और गलतियों से कड़ा सबक लेना चाहिए, लेकिन अतीत के बोझ को अपने वर्तमान और भविष्य पर हावी नहीं होने देना चाहिए।" उन्होंने जोर देकर कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र एक अत्यंत पावन और सुव्यवस्थित संस्था है, जो देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। उन्होंने कहा कि पिछली घटनाओं के बाद ट्रस्ट ने जो सुधार के कदम उठाए हैं, वे स्वागत योग्य हैं। उनका मुख्य ध्येय इस व्यवस्था से जुड़कर मंदिर के दैनिक संचालन, वित्तीय लेखा-जोखा और सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत, त्रुटिहीन और पारदर्शी बनाना है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता या सवाल खड़े होने की रत्ती भर भी गुंजाइश न बचे।
'भगवान को नहीं, देश की जनता को है मेरी जरूरत': 5,585 आवेदनों के बीच क्यों किया था आवेदन?
जब उनसे पूछा गया कि देश भर से आए 5,585 दिग्गजों के बीच उन्होंने इस बेहद चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील पद के लिए आवेदन क्यों किया, तो एयर मार्शल (रिटा.) मिश्र ने बेहद दार्शनिक और विनम्र उत्तर दिया।
उन्होंने कहा, "मैंने भी उन्हीं राष्ट्रभक्ति और सेवा के कारणों से आवेदन किया था, जिन कारणों से देश भर के अन्य हजारों योग्य उम्मीदवारों ने किया था। मेरा एकमात्र उद्देश्य अपने देश की सेवा करना है। सच तो यह है कि भगवान श्रीराम को मेरी किसी सेवा की आवश्यकता नहीं है, वे तो त्रिभुवन के स्वामी हैं। बल्कि वास्तविकता यह है कि हमारे देश, यहां की व्यवस्था और यहां आने वाली देश-विदेश की जनता को मेरी प्रशासनिक और प्रबंधकीय सेवाओं की जरूरत है।" उन्होंने कहा कि वे खुद को अत्यंत भाग्यशाली मानते हैं कि प्रभु राम की जन्मभूमि पर राष्ट्र और भक्तों की सेवा का यह दुर्लभ अवसर चयन समिति ने उन्हें सौंपा है।
'ऑपरेशन सिंदूर' का जिक्र: जब पश्चिमी सीमा पर प्रहार किया, तब भी टीम भावना ही थी जीत का आधार
अपनी सैन्य पृष्ठभूमि और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रहे 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान अपनी भूमिका को याद करते हुए जीतेंद्र मिश्र ने कहा कि युद्ध हो या शांति का कोई बड़ा मिशन, सफलता केवल एक व्यक्ति के पराक्रम से नहीं मिलती।
मई 2025 में हुए उस ऑपरेशन के दौरान एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र भारतीय वायुसेना की सबसे संवेदनशील 'वेस्टर्न एयर कमांड' के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ थे, जहां से सीमा पार 314 किलोमीटर भीतर सटीक हवाई हमलों को निर्देशित किया गया था। इस अदम्य साहस के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक प्राप्त कर चुके मिश्र ने कहा, "ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जब मेरे देश को मेरी आवश्यकता थी, तब मैं अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए पूरी तत्परता से सीमा पर मुस्तैद था और ईश्वर की कृपा से हम उस अभियान में पूरी तरह सफल रहे। यह हमेशा एक टीम का सामूहिक प्रयास होता है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार वायुसेना में हर सैनिक, तकनीशियन और पायलट एक सूत्र में बंधकर मिशन पूरा करता है, ठीक उसी तरह राम मंदिर में भी हर सेवादार, सुरक्षाकर्मी, पुजारी और प्रशासनिक अधिकारी मिलकर एक अभेद्य और पारदर्शी व्यवस्था का निर्माण करेंगे।
'अकेले कोई रणनीति नहीं बनाऊंगा': प्रबंधन के सिद्धांतों और ट्रस्ट के मार्गदर्शन पर जोर
मंदिर के रोजमर्रा के प्रशासन, दान पेटियों की सुरक्षा और लाखों श्रद्धालुओं के दर्शन प्रबंधन को लेकर अपनी भावी योजना पर बात करते हुए नए सीईओ ने स्पष्ट किया कि वे अकेले कोई मनमानी रणनीति नहीं बनाएंगे।
उन्होंने कहा, "रणनीति हमेशा ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों के मार्गदर्शन और मेरी पूरी प्रशासनिक टीम के सहयोग से ही तय होगी। यदि मैं अपनी टीम को साथ लेकर नहीं चलूंगा या ट्रस्ट के विजन की अनदेखी करूंगा, तो कोई भी रणनीति निष्प्रभावी हो जाएगी और हम आगे नहीं बढ़ पाएंगे।" जीतेंद्र मिश्र ने प्रबंधन का बुनियादी फलसफा समझाते हुए कहा कि मैनेजमेंट की बुनियादी प्रक्रियाएं चाहे वह सेना हो, कॉरपोरेट संस्थान हो या कोई विशाल धार्मिक न्यास, हर जगह एक जैसी ही होती हैं। मुख्य बात यह होती है कि उन बुनियादी प्रक्रियाओं को वर्तमान कार्य की विशेष आवश्यकताओं और आस्था की मर्यादा के अनुसार कैसे ढाला जाता है।
देवरिया के लाल से राम मंदिर के शिखर तक: 'फोन बज रहे हैं, मां कर रही हैं इंतजार'
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के छोटे से गांव भोपतपुरा से ताल्लुक रखने वाले जीतेंद्र मिश्र के लिए यह नियुक्ति व्यक्तिगत रूप से भी बेहद भावुक करने वाली है। एक साधारण शिक्षक परिवार में जन्मे मिश्र ने 1983 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) से अपने सफर की शुरुआत की थी और 39 वर्षों तक फाइटर पायलट व टेस्ट पायलट के रूप में देश का मान बढ़ाया।
सीईओ बनने की खबर सार्वजनिक होने के बाद के पलों का जिक्र करते हुए उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, "फिलहाल तो देश-विदेश से लगातार बधाई संदेश और फोन कॉल्स आ रहे हैं, मैं फोन से हट ही नहीं पा रहा हूं। लेकिन जैसे ही इन कॉल्स का सिलसिला थमेगा, मेरी 85 वर्षीय मां मेरा इंतजार कर रही हैं। वे बेसब्री से मेरी प्रतीक्षा कर रही हैं और मेरा पहला काम जाकर उनके चरण छूकर उनका आशीर्वाद लेना है।" देवरिया से अयोध्या की दूरी महज तीन घंटे की है, और स्थानीय लोगों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की मिट्टी से जुड़े होने के कारण वे यहां की सामाजिक और प्रशासनिक नब्ज को बाहर के किसी भी अधिकारी की तुलना में कहीं बेहतर समझते हैं।
अयोध्या में आधुनिक गवर्नेंस का नया सवेरा: जीरो टॉलरेंस और ऑटोमेशन का संकल्प
राम मंदिर के नवनियुक्त सीईओ के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा लगातार उठाए जा रहे 'राम धन' की सुरक्षा के सवाल और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही एसआईटी जांच के बीच उन्हें मंदिर में वित्तीय पारदर्शिता का ऐसा नया मानक स्थापित करना है, जिस पर कोई उंगली न उठा सके।
ट्रस्ट के नए महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि और कोषाध्यक्ष महेश भागचंदका के साथ मिलकर जीतेंद्र मिश्र अब चढ़ावा गणना कक्ष में पूर्ण ऑटोमेशन, मानवरहित कैश वैन, बायोमेट्रिक व एआई-आधारित सर्विलांस और एक कड़े मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को लागू करने की तैयारी में हैं। एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्र का यह स्पष्ट और बेबाक संदेश यह साबित करता है कि राम मंदिर में अब सियासत और विवादों के दिन पीछे छूटने वाले हैं, और उसकी जगह एक सख्त, ईमानदार, पारदर्शी और राष्ट्र-समर्पित प्रशासनिक व्यवस्था आकार लेने जा रही है।