जापान की 'अदृश्य' परमाणु शक्ति: क्या 44.4 टन प्लूटोनियम से कांप उठा है चीन

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India News Live,Digital Desk : चीन के आधिकारिक सैन्य समाचार पत्र 'पीएलए डेली' (PLA Daily) की एक हालिया रिपोर्ट ने एशियाई राजनीति और रक्षा गलियारों में खलबली मचा दी है। रिपोर्ट का दावा है कि जापान, जिसे दुनिया एक शांतिप्रिय राष्ट्र के रूप में जानती है, वास्तव में एक 'छिपी हुई परमाणु महाशक्ति' है। चीन का आरोप है कि जापान के पास इतना प्लूटोनियम जमा है कि वह रूस और अमेरिका जैसी सैन्य शक्तियों को भी पीछे छोड़ सकता है।

1. 44.4 टन प्लूटोनियम: आंकड़ों का मायाजाल

चीनी मीडिया के अनुसार, जापान के पास वर्तमान में 44.4 टन प्लूटोनियम का विशाल भंडार है। यह सामग्री परमाणु बम बनाने के लिए सबसे प्रमुख ईंधन मानी जाती है।

कहां रखा है यह भंडार?

जापान के भीतर: 8.6 टन।

ब्रिटेन में: 21.7 टन।

फ्रांस में: 14.1 टन।

स्रोत: यह प्लूटोनियम जापान के नागरिक परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से निकलने वाले खर्च किए गए ईंधन (Spent Fuel) के पुनर्संसाधन (Reprocessing) से प्राप्त किया गया है।

2. 5,500 परमाणु बम: क्या जापान बनेगा दुनिया का नंबर-1?

विशेषज्ञों का गणित कहता है कि 1 परमाणु बम बनाने के लिए लगभग 4 से 8 किलोग्राम प्लूटोनियम की आवश्यकता होती है। इस आधार पर चीनी मीडिया ने डरावना दावा किया है:

क्षमता: जापान अपने भंडार से लगभग 5,500 परमाणु हथियार तैयार कर सकता है।

तुलना: वर्तमान में रूस के पास दुनिया में सबसे अधिक 5,400 परमाणु हथियार हैं। यदि चीन का दावा सही है, तो जापान रातों-रात दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु शक्ति बन सकता है।

3. 'शांतिवाद' का मुखौटा या हकीकत?

चीन का आरोप है कि जापान अपनी 'थ्री नॉन-न्यूक्लियर प्रिंसिपल्स' (परमाणु हथियार न रखना, न बनाना और न आने देना) की नीति के पीछे अपनी सैन्य महत्वाकांक्षाओं को छुपा रहा है।

बजट में भारी उछाल: रिपोर्ट के अनुसार, जापान ने अपने रक्षा अनुसंधान कार्यक्रम के लिए 2025 में 109.6 मिलियन डॉलर आवंटित किए हैं, जो 2022 की तुलना में 18 गुना अधिक है।

दोहरी तकनीक (Dual Use Technology): चीन का कहना है कि जापान नागरिक अंतरिक्ष और ऊर्जा कार्यक्रमों की आड़ में ऐसी तकनीक विकसित कर रहा है जिसे चंद हफ्तों में मिसाइल और बम तकनीक में बदला जा सकता है। इसे अक्सर 'पैरा-न्यूक्लियर' क्षमता कहा जाता है।

4. अंतरराष्ट्रीय संधियाँ और जापान की मजबूरी

जापान और ईरान (जो वर्तमान में युद्ध और परमाणु चर्चाओं के केंद्र में हैं) दोनों परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के हस्ताक्षरकर्ता हैं।

निरीक्षण: जापान के प्लूटोनियम भंडार पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की कड़ी नजर रहती है।

जापान का पक्ष: टोक्यो का हमेशा से तर्क रहा है कि उसका प्लूटोनियम भंडार केवल ऊर्जा सुरक्षा के लिए है और वह परमाणु हथियारों का कट्टर विरोधी है, क्योंकि वह दुनिया का एकमात्र देश है जिसने परमाणु हमले (हिरोशिमा-नागासाकी) का दंश झेला है।