ईरान का बड़ा फैसला: ट्रंप और पाकिस्तान दोनों को लगा झटका, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज विवाद से दुनिया में महा-टेंशन
मिडिल ईस्ट में जारी भीषण सैन्य टकराव के बीच ईरान ने एक ऐसा सख्त और अप्रत्याशित कदम उठाया है, जिसने न सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधी चुनौती दी है, बल्कि पाकिस्तान को भी बड़ा कूटनीतिक झटका दिया है। ईरान ने अमेरिका पर सीजफायर (युद्धविराम) समझौते का खुलेआम उल्लंघन करने का संगीन आरोप लगाते हुए पहले से तय द्विपक्षीय मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) को लागू न करने का एलान कर दिया है। इस फैसले के बाद एशिया से लेकर वाशिंगटन तक कूटनीतिक और सैन्य गलियारों में महा-टेंशन पसर गया है।
इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता से ईरान का साफ इनकार
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने तेहरान में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्पष्ट किया कि उनका देश अब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में प्रस्तावित दूसरे दौर की शांति वार्ता में हिस्सा नहीं लेगा। ईरान के इस कड़े रुख से मध्यस्थता की कोशिशों में जुटे पाकिस्तान को तगड़ा झटका लगा है। प्रवक्ता बघाई ने दो टूक शब्दों में कहा:
"तेहरान और वाशिंगटन के बीच संबंध इस समय अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। जब तक दूसरा पक्ष (अमेरिका) अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियां और वादे पूरी तरह नहीं निभाता, तब तक अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार का नया समझौता या बातचीत संभव नहीं है।"
6 जुलाई के जहाज हमलों के बाद टूटी नाजुक शांति
दरअसल, पिछले महीने ही दोनों देशों के बीच युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसके बाद स्विट्जरलैंड में कई दौर की बैक-चैनल बैठकें भी आयोजित की गईं। लेकिन 6 जुलाई 2026 को रणनीतिक रूप से संवेदनशील 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के पास तीन कमर्शियल जहाजों पर हुए घातक हमलों ने इस नाजुक शांति को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया। इन हमलों के बाद दोनों महाशक्तियों ने एक-दूसरे पर सैन्य आक्रामकता का आरोप लगाया, जिसके बाद खाड़ी में मिसाइल और ड्रोन हमलों का नया सिलसिला शुरू हो गया। ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर की गई हालिया सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए इसे अपनी संप्रभुता की रक्षा में उठाया गया कदम बताया है।
होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी दखल बर्दाश्त नहीं: ईरान
प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने हॉर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यावसायिक जहाजों को नौसैनिक सुरक्षा (Naval Escort) देने के नाम पर अमेरिका इस सामरिक जलमार्ग में ईरान की संप्रभुता को चुनौती दे रहा है, जो सीजफायर का सीधा उल्लंघन है। ईरान ने चेतावनी दी है कि वह इस अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे में नहीं पड़ने देगा। ईरान ने अमेरिका को क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने का मुख्य जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अमेरिकी दखलंदाजी से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार में असुरक्षा की भावना और ज्यादा बढ़ेगी।