LPG संकट से राहत: 45 हजार टन गैस लेकर 'होर्मुज' पार कर रहा भारतीय सुपरटैंकर; कीमतों में कमी की उम्मीद
India News Live,Digital Desk : ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी के कारण देश में गहराते एलपीजी संकट के बीच एक राहत भरी खबर आई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का एक विशाल सुपरटैंकर 'सर्व शक्ति' करीब 45,000 टन एलपीजी लेकर होर्मुज के चुनौतीपूर्ण रास्ते को पार कर रहा है। इसके भारत पहुंचने से बाजार में गैस की किल्लत कम होने और कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है।
सुपरटैंकर 'सर्व शक्ति' का रूट और स्थिति
मौजूदा लोकेशन: शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, शनिवार को यह टैंकर 'लारक' और 'केसम' द्वीपों के पास देखा गया था।
रास्ता: यह टैंकर ओमान की खाड़ी के जरिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा में प्रवेश कर भारत के पश्चिमी तट (गुजरात या महाराष्ट्र) की ओर बढ़ रहा है।
चुनौती: 13 अप्रैल से जारी अमेरिकी नाकेबंदी और ईरान की सख्ती के कारण इस रास्ते से निकलना बेहद जोखिम भरा बना हुआ है।
देश में एलपीजी की मौजूदा स्थिति
होर्मुज बंद होने का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ा है:
कीमतों में भारी उछाल: हाल ही में 5 किलो वाले छोटे गैस सिलेंडर की कीमत में 261 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, कमर्शियल सिलेंडर के दाम 1,000 रुपये तक बढ़ गए हैं।
आपूर्ति बाधित: भारत के कम से कम 14 जहाज फिलहाल फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। ईरान की चेतावनी के बाद दो जहाजों को वापस लौटना पड़ा था।
क्या है 'वैकल्पिक रास्ता' जिससे बच रहे हैं टैंकर?
अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी से बचने के लिए टैंकर अब 'ऑफ-लिमिट्स' रास्तों का सहारा ले रहे हैं:
ईरानी तटीय क्षेत्र: अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, अमेरिकी नौसेना किसी अन्य देश की समुद्री सीमा के भीतर जहाज नहीं रोक सकती। टैंकर ईरान के तट के करीब रहकर चाबहार की ओर बढ़ रहे हैं।
पाकिस्तानी सीमा: एक रास्ता पाकिस्तान की समुद्री सीमा से होकर भी गुजरता है, लेकिन सुरक्षा कारणों और कूटनीतिक तनाव की वजह से यह बेहद खतरनाक माना जाता है।
सफलता: रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक करीब 34 टैंकर अमेरिकी नाकेबंदी को चकमा देकर निकलने में सफल रहे हैं।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी संकट के बादल
एलपीजी के साथ-साथ अब पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने की भी पूरी संभावना है:
कच्चा तेल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो वर्तमान में 110 डॉलर के आसपास बनी हुई हैं।
सरकारी रुख: सूत्रों के अनुसार, पिछले चार साल से कीमतें स्थिर रहने और बढ़ते घाटे के कारण अब तेल कंपनियां कभी भी 4 से 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर सकती हैं।